भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) की मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के नतीजों की जानकारी शुक्रवार को गवर्नर शक्तिकांत दास देंगे। दुनियाभर के केंद्रीय बैंक बढ़ती महंगाई को देखते हुए यह संकेत दे चुके हैं कि ब्याज दरों में नरमी का मौजूदा दौर अपने अंतिम चरण में है। जानकारों का कहना है कि देश में बढ़ती महंगाई को देखते हुए आरबीआइ गवर्नर भी ब्याज दरों की भावी दिशा का संकेत देंगे। जानकारों का एक बड़ा वर्ग यह भी मान रहा है कि इकोनामी में सुधार की अभी जो गति है, उसके महत्व को देखते हुए केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर ही रखना चाहेगा। यह भी हो सकता है कि दो महीने पहले केंद्रीय बैंक ने 5.9 फीसद की महंगाई दर का जो लक्ष्य रखा था उसे और घटा दे।

होम लोन, आटो लोन व दूसरे पर्सनल लोन की दरें निचले स्तर पर

RBI ने पिछले वर्ष की शुरुआत में कोरोना का प्रकोप सामने आने के बाद से ही ब्याज दरों को लेकर काफी लचीला रुख अपनाया हुआ है। इस वजह से होम लोन, आटो लोन व दूसरे पर्सनल लोन की दरें पिछले दो दशकों के निचले स्तर पर हैं। कई बैंक महज 6.5 फीसद सालाना ब्याज पर होम लोन दे रहे हैं। आरबीआइ ने कई उद्योग क्षेत्रों को आसानी से कर्ज दिलाने की भी व्यवस्था की है। इसके तहत छोटे व मझोले उद्यमियों से लेकर फार्मास्युटिकल्स उद्योग, हाउसिग व हेल्थ सेक्टर को सस्ती दरों पर कर्ज दिलाने की खास व्यवस्था की है। जानकार मानते हैं कि आरबीआइ सस्ते कर्ज की कई योजनाओं को वापस लेने की शुरुआत कर सकता है।

जानकारों का यह है अनुमान

HDFC बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री अभीक बरुआ का कहना है कि RBI बैंकिग व्यवस्था में तरलता (फंड की स्थिति) को सामान्य रखते हुए रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट स्थिर रखेगा। एमके शोध एजेंसी का भी यही अनुमान है कि आरबीआइ मौजूदा हालात में रेपो रेट में कोई वृद्धि करके सभी संबंधित पक्षों को झटका देने की कोशिश नहीं करेगा।

Posted By: Navodit Saktawat