नई दिल्ली। इस वर्ष अप्रैल में निजी क्षेत्र की विमानन कंपनी जेट एयरवेज के अस्थायी रूप से बंद होने के बाद भारतीय एयरलाइन उद्योग के दबावग्रस्त होने की बातें की जाने लगी थीं। लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार जेट के बंद होने से भारतीय विमानन कंपनियों की माली हालत में तेजी से सुधार हो रहा है।

इस बात की पूरी संभावना है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान वे डेढ़ दशक का सर्वाधिक मुनाफा कमाने में सफल रहें। सेंटर फॉर एशिया पैसिफिक एविएशन (कापा) के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के दौरान भारतीय विमानन कंपनियों को संयुक्त रूप से 3,500-4,800 करो़ड़ रुपये तक का मुनाफा हो सकता है।

दिलचस्प यह है कि इसी अवधि के दौरान घरेलू हवाई यातायात की वृद्धि दर पांच फीसद से भी कम रहने की संभावना है। कापा की जून की रिपोर्ट इस मायने में महत्वपूर्ण है कि इसकी फरवरी की रिपोर्ट में विमानन कंपनियों को चालू वर्ष में 40-45 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया था।

कापा के अनुसार भारतीय एयरलाइन उद्योग को इस समय तीन प्रमुख लो बजट कंपनियां इंडिगो, स्पाइसजेट और गोएयर नियंत्रित कर रही हैं। इनमें अकेले इंडिगो का मुनाफा अगले वर्ष 2,700 से 3400 करोड़ रुपये के बीच रहने वाला है, जो तीनो एयरलाइनों के पिछले वर्ष के कुल मुनाफे से भी ज्यादा है।

यही नहीं, इस वर्ष इंडिगो का मुनाफा पिछले वर्ष के मुकाबले सात गुना रहने की उम्मीद है। कापा के मुताबिक तो अभी 49.9 फीसद बाजार हिस्सेदारी के साथ इंडिगो भारत की अग्रणी एयरलाइन है। जबकि 13.9 फीसद हिस्सेदारी के साथ एयर इंडिया दूसरे और 13.1 फीसद हिस्सेदारी के साथ स्पाइसजेट तीसरे नंबर पर है। 10.8 फीसद हिस्सेदारी वाली गोएयर चौथे स्थान पर है।

बाकी 12.3 फीसद हिस्से पर टाटा विस्तारा, एयर एशिया एवं अन्य छोटी कंपनियों का कब्जा है। लेकिन जेट एयरवेज के बंद होने से मिलने वाले अतिरिक्त यातायात के कारण स्पाइसजेट का बाजार हिस्सा सालभर के भीतर 25 फीसद पर पहुंचने की संभावना जताई गई है। एयर इंडिया को भी फायदा होगा और वो 2020 में शुद्ध मुनाफे की स्थिति में पहुंच सकती है। वित्त वर्ष 2017-18 में एयर इंडिया को 5348 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ था।

हालांकि भारतीय कंपनियों का मुनाफा बढ़ाने में बाजार हिस्सेदारी के मुकाबले बढ़े किराये की भूमिका अधिक रहेगी, जो पिछले पांच महीनों में औसतन 10 फीसद बढ़ गए हैं। जेट के हटने से प्रतिस्पर्द्धा घटने के कारण जनवरी-मार्च के दौरान इंडिगो के किराये में औसतन 12 फीसद की बढ़ोतरी देखने को मिली है।

कापा के अनुसार जेट की उड़ाने बंद होने से विमानन कंपनियों की तीन प्रमुख संरचनात्मक चुनौतियां लगभग खत्म हो गई हैं। इनमें क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर पाना, पायलटों की कमी और एयरपोर्ट स्लॉट की अड़चनें शामिल हैं। इससे उन्हें अपना मुनाफा बढ़ाने और बैलेंस शीट सुधारने का मौका मिल गया है।

रिपोर्ट के अनुसार भारत की बजट एयरलाइन कंपनियों का बाजार पूंजीकरण अपनी कैटेगरी में दुनिया की अन्य कंपनियों के मुकाबले ज्यादा है। इनकी इस स्थिति का भारतीय शेयर बाजारों पर भी असर पड़ेगा। क्योंकि सूचीबद्ध लाभकारी कंपनियों के शेयर खरीदने के प्रति निवेशकों का उत्साह बढ़ सकता है।