नई दिल्ली। देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने अगली तिमाही के लिए देश की विकास दर का अनुमान 5 प्रतिशत से भी कम लगाया है। स्टेट बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगली तिमाही में यह विकास दर पांच प्रतिशत से घटकर 4.2 प्रतिशत पर जा सकती है। यह रिपोर्ट इकोरैप एसबीआई की रिसर्च यूनिट ने दी है। स्टेट बैंक द्वारा मंगलवार को यह रिपोर्ट जारी की गई है जिसमें पूरे वित्त वर्ष में विकास दर 5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं रहने का अनुमान लगाया गया है।

भारतीय स्टेट बैंक के प्रमुख अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष के नेतृत्व में तैयार की गई रिपोर्ट में सोमवार को औद्योगिक उत्पादन में 4.3 प्रतिशत की गिरावट के आंकड़े को बेहद चिंताजनक बताया है। चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्घि दर का अनुमान 6.1 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने के पीछे इसे एक बड़ी वजह बताया गया है। अगले वित्त वर्ष सुधार के साथ जीडीपी वृद्घि दर 6.2 प्रतिशत तक पहुंचने की बात कही गई है। इस रिपोर्ट के बाद स्टेट बैंक भी उन दुनियाभर की एजेंसियों में शामिल हो गया है जिन्होंने विकास दर का अनुमान कम आंका है। बता दें कि भारत की विकास दर पहली तिमाही में वैसे भी 6 साल के सबसे कम स्तर 5 प्रतिशत पर रही है।

कृषि क्षेत्र की हालत चुनौतीपूर्ण

औद्योगिक क्षेत्र के साथ ही चालू वित्त वर्ष के दौरान कृषि उत्पादन की स्थिति भी उत्साहजनक नहीं रहने का अनुमान है। इसके लिए मानसून में सामान्य से ज्यादा बारिश को एक बड़ी वजह बताया गया है। इससे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक व पंजाब में खरीफ फसलों के उत्पादन पर भारी असर पड़ने की आशंका है।

ब्याज दरें घटाना समाधान नहीं

मंदी के इस माहौल में ब्याज दरों में एक और कटौती की घोषणा आरबीआइ की तरफ से की जा सकती है लेकिन इससे मांग पर अब भी खास असर पड़ने के आसार नहीं है। उलटा इससे वित्तीय अस्थिरता फैल सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक कर्ज देकर घरेलू खर्चे में बढ़ोतरी का फॉर्मूला दुनिया के किसी भी देश में बहुत सफल नहीं रहा है। भारत का अनुभव भी इससे अलग नहीं हो सकता।

Posted By: Ajay Barve

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