बाजार नियामक सेबी चाहता है कि फंड हाउस केवल लिस्टेड इक्विटी या डेट में पैसा लगाएं। कारण यह है कि लिस्टेड कंपनियों को अपनी माली हालत और कारोबार को लेकर पारदर्शिता बरतनी होती है। शेयरधारकों के प्रति उनकी जवाबदेही ज्यादा होती है।

ज्यादा जोखिम वाली संपत्तियों से म्यूचुअल फंड निवेशकों की सुरक्षा के लिए सेबी ने एक बड़ा प्लान तैयार किया है। सेबी चाहता है कि फंड हाउस अपने सभी निवेश चरणबद्घ तरीके लिस्टेड या भविष्य में लिस्ट होने वाली इक्विटी या डेट सिक्योरिटीज में शिफ्ट कर दें। साथ ही वे बिना रेटिंग वाले डेट इंस्ट्रूमेंट्‌स में निवेश 25 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी के स्तर पर ले आएं।

रिस्की डेट सिक्योरिटीज में म्यूचुअल फंडों का निवेश पूंजी बाजार में निवेश करने वालों के लिए बड़े जाखिम के रूप में उभरा है। इसीलिए सेबी निवेशकों को ऐसे बड़े जोखिम सेबचाने के लिए रेगुलेटरी सेफ्टी नेट (नियामकीय सुरक्षा तंत्र) मजबूत बनाने में जुटा है। सेबी ने जून में अपने बोर्ड की मंजूरी वाले कुछ फैसले को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्‌स में निवेश से जुड़े म्यूचुअल फंड स्कीम्स के प्रूडेंशियल नॉर्म्स में संशोधन के मसौदा प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया है।

नए प्रूडेंशियल फ्रेमवर्क के तहत म्यूचुअल फंड्‌स केवल लिस्टेड या लिस्ट होनेवाली इक्विटी और डेट सिक्योरिटीज में निवेश कर पाएंगे। नई व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी।

आगे भी हो सकते हैं बदलाव

सरकारी अधिकारियों के मुताबिक इस महीने होनेवाली सेबी की अगली बोर्ड मीटिंग में कुछ दूसरे संशोधन का भी प्रस्ताव पेश किया जाएगा। मसलनः

1. अलग से तय निवेश मानकों वाले एसेट क्लास को छोड़कर दूसरे बिना रेटिंग वाले डेट इंस्ट्रूमेंट्‌स में म्यूचुअल फंड स्कीमों के निवेश की ओवरऑल लिमिट को मौजूदा 25 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी करना शामिल है।

2. नए प्रस्ताव में बिना रेटिंग वाले डेट इंस्ट्रूमेंट में 10 फीसदी सिंगल इश्यूअर लिमिट के मौजूदा प्रावधान को खत्म किए जाने का जिक्र है। हालांकि बाजार पर असरडालने वाले फैक्टर और बिना रेटिंग वाली डेट सिक्योरिटीज में म्यूचुअल फंडों की सहभागिता को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित लिमिट की सेबी की तरफ से समय-समय पर समीक्षा करने की जरूरत होगी।

फीस को लेकर प्रस्ताव

सेबी के प्रस्तावों के मुताबिक म्यूचुअल फंडों को एकमुश्त फीस लेने की इजाजत दी जाएगी। उन्हें इस तरह की फीस का डिस्क्लोजर वैल्युएशन एजेंसियों के सामने पेश करना होगा। ऐसी फीस के ट्रीटमेंट को लेकर मानक तरीके सेबी के साथ सलाह मशविरे के बाद म्यूचुअल फंडों की प्रतिनिधि संस्था एम्फी की तरफ से जारी की जाएगी।