इंदौर। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर रुझान के बीच मांग सुस्त पड़ने के कारण सोयाबीन के वायदा भाव छह महीनों के निचले स्तर पर आ गए। इसका असर तेल पर भी नजर आया। सोया तेल करीब तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया।

दरअसल, मानसून की चाल के साथ ही कमोडिटी बाजार कदमताल करता नजर आ रहा है। खेती वाले इलाकों में बारिश होने से सोयाबीन 3,500 रुपए प्रति क्विंटल से नीचे आ गया, हालांकि बाद में स्थिति थोड़ी सुधरी और 3,550 रुपए के आसपास रहा। इसका असर सरसों जैसे अन्य तिलहन के भाव पर भी नजर आया। इसका भाव करीब एक महीने के निचले स्तर तक गिर गया।

प्रमुख तिलहन के भाव गिरने का असर खाद्य तेल की कीमतों पर देखा गया। घरेलू बाजार में सोया और पाम तेल के भाव तकरीबन एक प्रतिशत टूट गए।

असल में आपसी व्यापार को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव कम होने के जो संकेत मिले थी, उस मामले में कोई ठोस प्रगति होती नजर नहीं आ रही है। सोयाबीन जैसी कमोडिटी के भाव पर इसका नकारात्मक असर हो रहा है।

बुआई घटने के बावजूद मंदी

देश में खरीफ तिलहन की बुआई में अब तक लगभग 42 प्रतिशत गिरावट आ चुकी है। बावजूद इसके वायदा में सोयाबीन का भाव 6 महीनों के निचले स्तर तक गिर गए। गौर करने वाली बात है कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में सोयाबीन की 90 प्रतिशत खेती होती है और इन राज्यों में पिछले एक हफ्ते से जोरदार बारिश हुई है। ऐसे में सोयाबीन पर दबाव बढ़ गया है।

बारिश की स्थिति सुधरी

जून में सुस्त चाल के बाद इस महीने बारिश में काफी सुधार हुआ। खास तौर पर खेती के लिए अहम माने जाने वाले 8 राज्यों में मानसून की बारिश कमोवेश सामान्य हो गया है।

पिछले एक हफ्ते के दौरान जोरदार बारिश की वजह से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के कई इलाकों में पानी की कमी की समस्या अब खत्म हो गई है।

वहीं ओडिशा, जम्मू-कश्मीर और कर्नाटक में भी इस सीजन में अब तक अच्छी बारिश हुई है। हालांकि उत्तर भारत में पंजाब और हरियाणा समेत दक्षिण भारत में तमिलनाडु में अब भी बारिश की कमी है। इन राज्यों में अब तक सामान्य से करीब 50 फीसदी तक कम बारिश हुई है।

Posted By: Nai Dunia News Network