इंदौर। केंद्र सरकार ने शकर का बफर स्टॉक 20 लाख टन बढ़ाकर अब तक के सर्वकालिक ऊंचे स्तर 50 लाख टन तक ले जाने की योजना बनाई है, ताकि मिलों और गन्ना किसानों को राहत दी जा सके।

सरकार शकर मिलों को राहत देने के लिए बफर स्टॉक 30 लाख टन से बढ़ाकर 50 लाख टन कर सकती है। बफर स्टॉक की मियाद भी एक साल के लिए बढ़ाए जाने का प्रस्ताव है। इसके लिए खाद्य मंत्रालय ने कैबिनेट नोट जारी किया है, जिस पर अगले हफ्ते मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला हो सकता है।

गन्ना किसानों के बकाया भुगतान में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार मिलों को करीब 1,100 करोड़ रुपए की सबसिडी दे सकती है।

यह रियायत बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के ब्याज का बोझ कम करेगी, जबकि 20 लाख टन अतिरिक्त शकर की बिक्री से होने वाली आय के जरिए बैंकों की उधारी चुकाने और किसानों का बकाया भुगतान करने में मदद मिलेगी।

गन्ना किसानों का बकाया 18,958 करोड़

एक अक्टूबर, 2018 से शुरू पेराई सीजन 2018-19 (अक्टूबर से सितंबर) में शकर मिलों में पेराई बंद होने के बाद भी गन्ना किसानों का बकाया 18,958 करोड़ रुपए है। बकाया में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों की है। प्रदेश के शकर मिलों पर किसानों का बकाया 11,082 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

इसके बावजूद कर्नाटक की शकर मिलों पर 1,704 करोड़ रुपए और महाराष्ट्र की शकर मिलों पर 1,338 करोड़ रुपए का बकाया है। अन्य राज्यों में पंजाब में गन्ना किसानों का राज्य की मिलों पर बकाया 989 करोड़ रुपए, गुजरात और बिहार की शकर मिलों पर किसानों का बकाया क्रमशः 965 करोड़ रुपए और 923 करोड़ रुपए हैं।

14 दिन के भीतर भुगतान की शर्त

गन्ना खरीदने के 14 दिन के भीतर शकर मिलों को बकाया का भुगतान करना होता है, लेकिन चालू सीजन में पेराई बंद होने के बावजूद किसानों के बकाए का भुगतान नहीं हो पा रहा है। इससे गन्ना किसानों के बीच मिलों के साथ ही केंद्र सरकार के खिलाफ भी रोष बढ़ रहा है।

शकर उत्पादन घटने का अनुमान

उद्योग के अनुसार चालू पेराई सीजन में 330 लाख टन शकर उत्पादन का अनुमान है। पिछले पेराई सीजन में320 लाख टन शकर का उत्पादन हुआ था। कई राज्यों में सूखे जैसे हालात के कारण पहली अक्टूबर, 2019 से शुरू होने वाले पेराई सीजन में करीब 15 प्रतिशत कम शकर उत्पादन की आशंका है।

Posted By: Nai Dunia News Network