मुंबई। सरकार की तरफ से तय न्यूनतम बिक्री मूल्य पर शकर बेचने में महाराष्ट्र की मिलों को दिक्कत आ रही है। इस वजह से कई मिलें थर्ड पार्टी कोटा का इस्तेमाल करके न्यूनतम बिक्री मूल्य से कम कीमत पर शकर का निर्यात कर रही हैं।

रिकॉर्ड उत्पादन के बीच शकर को रखने की लागत बड़ी मुसीबत बनती जा रही है। बारिश का सीजन शुरू होने वाला है फिर भी कुछ मिलों को शकर खुले में रखना पड़ रहा है। स्थानीय बाजार में शकर की कमजोर मांग के कारण मिलों के लिए न्यूनतम बिक्री मूल्य पर माल खपाना मुश्किल हो गया है।

शकर कारोबारियों के अनुसार महाराष्ट्र को आवंटित शकर का मासिक कोटा करीब-करीब हर महीने बच रहा है। इस बीच मिलों को निर्यात कोटे के बाद थर्ड पार्टी निर्यात कोटा पर शकर बेचने से अतिरिक्त शकर खपाने में मदद मिल रही है।

महाराष्ट्र में मिलों के थर्ड पार्टी कोटा के इस्तेमाल से 3-4 लाख टन शकर बिकने का अनुमान है। यह शकर 28-28.50 रुपए प्रति किलो भाव पर बेची गई है। सरकार ने प्रत्येक मिल को निर्यात कोटा जारी किया है। जो मिलें अपने कोटा पर शकर का निर्यात नहीं करना चाहती उन्हें अन्य बिकवालों को इस कोटे को बेचने की अनुमति है।

139 लाख टन स्टॉक बचने का अनुमान

2018-19 का पेराई का सीजन खत्म होने वाला है। इस साल देश में शकर का कुल उत्पादन 330 लाख टन रहने का अनुमान है। 1 अक्टूबर, 2019 से पेराई का नया सीजन शुरू होने पर देश में शकर का शुरुआती स्टॉक रिकॉर्ड 139 लाख टन रह सकता है।

पीएमओ से राहत की मांग

नेशनल को-ऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज फेडरेशन के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के साथ बैठक में 30 लाख टन शकर का बफर स्टॉक बनाने की स्कीम आगे बढ़ाने की मांग की है।

उन्होंने शकर के भाव बढ़ाने में मदद के लिए स्टॉक की मात्रा बढ़ाकर 50 लाख टन करने की जरूरत बताई। ऐसा करने से सप्लाई चेन से अतिरिक्त शकर हट जाएगा। फेडरेशन ने शकर का न्यूनतम बिक्री मूल्य भी 31 रुपए प्रति किलो के मौजूदा स्तर से बढ़ाने की मांग की है।

सबसिडी की अवधि बढ़ाई

केंद्र सरकार ने शकर मिलों को आवंटित निर्यात कोटा के बदले किसानों को गन्ने के भुगतान के लिए मिलों को सबसिडी की अवधि भी बढ़ा दी है। 2018-19 के लिए कुल निर्यात कोटा 50 लाख टन का था। शकर उद्योग का कहना है कि देश को 70-80 लाख टन शकर निर्यात करने की जरूरत है और निर्यात के लिए प्रोत्साहन जारी रखा जाना चाहिए।

भाव भी दबाव में

शकर के न्यूनतम बिक्री मूल्य की वजह से कई मिलें अपने निर्धारित मासिक कोटा भी बेचने में सफल नहीं हो पा रही हैं। वे अपने कोटे का माल रीसेल में बेचने की कोशिश कर रही हैं। इससे खुले बाजार में भाव लगातार दबाव में हैं। इंदौर के थोक बाजार में शकर इन दिनों 3,350-3,380 रुपए प्रति क्विंटल है।

Posted By: Nai Dunia News Network