नई दिल्ली। हाल ही में प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार कॉर्पोरेट सेक्टर में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए कुछ अलग तरह के कदम उठा सकती है। कंपनियों में निरीक्षक की भूमिका निभाना यानी स्वतंत्र निदेशक बनना मुश्किल हो सकता है।

'मैं भी चौकीदार' अभियान के जरिए चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने वाले मोदी कॉर्पोरेट सेक्टर में चौकीदार की भूमिका निभाने वाले निदेशकों को चुस्त बनाने पर विचार कर रहे हैं, ताकि घोटालों पर लगाम लगाई जा सके।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियों के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों को नियुक्ति से पहले परीक्षा पास करनी होगी। दूसरी तरफ बाजार नियामक सेबी की एक योजना के मुताबिक क्रेडिट रेटिंग कंपनियों में बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

दरअसल, प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी के पहले कार्यकाल में कॉर्पोरेट सेक्टर में कई ऐसे घोटाले सामने आए, जिनसे सरकार को काफी मुश्किलें हुईं। मसलन, गहनों के मशहूर कारोबारी नीरव मोदी और उनके संबंधी मेहुल चोकसी ने पंजाब नैशनल बैंक में करीब 14 हजार करोड़ रुपए के घोटाले को अंजाम दिया और आईएलएंडएफएस ने गैर-बैंकिंग फाइनेंस सेक्टर की जड़ें हिला दीं।

सरकार की ये है मंशा

रिपोर्ट में कॉरर्पोरेट मामलों की जिम्मेदारी संभाल रहे नौकरशाह इंजेती श्रीनिवास के हवाले से कहा है कि सरकार कॉर्पोरेट लिटरेसी (कंपनियों के मामले में साक्षरता) को बढ़ावा देकर स्वतंत्र निदेशकों को उनकी जिम्मेदारी और भूमिका से अवगत कराना चाहती है।

ऑनलाइन परीक्षा का प्रस्ताव

श्रीनिवास ने कहा कि प्रस्तावित ऑनलाइन परीक्षा इंडियन कंपनी लॉ, एथिक्स और पूंजी बाजार के नियम-कायदे पर आधारित होगी। स्वतंत्र निदेशक बनने के इच्छुक लोगों को एक निश्चित समय में यह परीक्षा पास करनी होगी। जो पहले से निदेशक हैं, उन्हें इससे छूट होगी। उन्हें केवल खुद को सरकार के डेटाबेस में रजिस्टर कराना होगा। मौजूदा नियमों के मुताबिक भारत में लिस्टेड हर कंपनी के बोर्ड में कम से कम एक तिहाई स्वतंत्र निदेशक होते हैं। इनकी मुख्य जिम्मेदारी निरीक्षक के रूप में काम करने और छोटे शेयरधारकों के हितों की रक्षा होती है।

सेबी की है योजना

क्रेडिट रेटिंग कंपनियों को जल्द ऐसा इंतजाम करना पड़ सकता है कि उनके बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों का बहुमत हो। इसके अलावा उन्हें बोर्ड में बाजार नियामक के एक नॉमिनी को भी रखना पड़ सकता है। आईएलएंडएफएस डिफॉल्ट के बाद सेबी ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों के गवर्नेंस ढांचे में बड़े बदलाव की योजना बनाई है। उसकी योजना उनके बोर्ड का कंपोजिशन बदलने और डिसक्लोजर नॉर्म्स बढ़ाने की है, ताकि बिजनेस प्रैक्टिसेज में हितों के टकराव दूर किए जा सकें। मामले से वाकिफ एक शख्स ने बताया कि इसके अलावा सेबी ने कंपेनसेशन और ऑडिट कमेटियों से शेयरधारक-निदेशकों को हटाने का प्रस्ताव भी तैयार किया है।

Posted By: Nai Dunia News Network