नई दिल्ली। अमेरिका और चीन के बीच छिड़े व्यापार युद्ध ने वैश्विक व्यापार में भारत के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं। खासतौर पर टेक्सटाइल, मेटल, फार्मास्यूटिकल, केमिकल और इलेक्ट्रिकल जैसे क्षेत्रों में न सिर्फ निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी बल्कि देश में विदेशी निवेश का प्रवाह भी बढ़ेगा।

दोनों देशों के बीच हुए इस विवाद को उद्योग जगत बड़े मौके के रूप में देख रहा है। अमेरिका ने चीन से आयात होने वाले मेटल और अन्य उत्पादों पर आयात शुल्क में भारी वृद्धि की है। इसके जवाब में चीन ने भी अमेरिका से होने वाले कई उत्पादों पर शुल्क बढ़ा दिया।

चीन पर अमेरिकी प्रतिबंधों की देखा देखी कई यूरोपीय देशों ने भी वहां से आयात सीमित कर दिया। अमेरिका ने चीन से आयात होने वाली लगभग 260 अरब डॉलर की वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाया है वहीं चीन ने भी जवाबी कदम उठाते हुए अमेरिका से होने वाले 100 अरब डॉलर के आयात पर टैरिफ बढ़ाया है।

निर्यात संघों के फेडरेशन फियो के महानिदेशक अजय सहाय का कहना है, 'अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ को लेकर छिड़ी जंग से भारत समेत कई देशों के लिए व्यापार के नए अवसर पैदा हुए हैं। भारत फार्मास्यूटिकल, केमिकल और इलेक्ट्रिकल उत्पादों के अमेरिकी बाजार में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है।

इसी तरह चीन के बाजार में भारत सोयाबीन, सरसों और मक्का के निर्यात की संभावनाएं तलाश सकता है।' हालांकि फियो मानता है कि इन उत्पादों का दोनों देशों में बाजार इतना बड़ा है कि भारत को अपनी उत्पादन क्षमता में विस्तार की आवश्यकता होगी।

सहाय के मुताबिक 'इस लिहाज से भारत में विदेशी निवेश के मौके भी बढ़ेंगे जिसका लाभ उठाया जा सकता है।' उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक दोनों देशों में ट्रेड वार शुरू होने के बाद भारत में दोनों देशों से कई उत्पादों के लिए पूछताछ होना शुरू हो गई है।

फिक्की के प्रेसिडेंट संदीप सोमानी ने कहा, 'भारत को टेक्सटाइल और अपैरल के क्षेत्र में काफी कारोबारी पूछताछ मिली हैं। इसके अतिरिक्त केमिकल और सिरेमिक उत्पादों को लेकर भी विदेशी बाजारों में संभावनाएं काफी बढ़ गई हैं।' दरअसल चीन निर्मित उत्पादों पर अमेरिकी प्रशासन की तरफ से ड्यूटी बढ़ने के बाद अमेरिका के आयातकों में अनिश्चितता बढ़ गई है।

सोमानी के मुताबिक 'उन्हें नहीं पता कि भविष्य में ड्यूटी का स्वरूप क्या रहने वाला है। इसलिए वे चीन से और आयात करने में हिचकिचा रहे हैं। भारत के लिए यही मौका है जब वह अपनी जगह अमेरिकी बाजार में बना सकता है।' दोनों देशों के बीच छिड़े इस व्यापार युद्ध का लाभ देश में मैन्यूफैक्चरिंग के विस्तार में भी मिल सकता है।

चीन लगातार अन्य देशों में अपनी मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयों का विस्तार कर रहा है। इसमें वियतनाम, थाईलैंड आदि देश प्रमुख हैं। लेकिन जानकारों का मानना है कि इन देशों में मैन्यूफैक्चरिंग विस्तार की संभावनाएं काफी सीमित हैं। जबकि भारत में मैन्यूफैक्चरिंग के लिए अपार संभावनाएं हैं। इसलिए यह ट्रेड वार भारत में निवेश के नए रास्ते भी खोलेगी।

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