वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजटीय भाषण में अर्थव्यवस्था के समग्र विकास पर जोर दिया। उन्होंने उन तरीकों को उजागर करने की कोशिश की, जिसमें शहरी जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है और देश की अर्थ व्यवस्था को 5 ट्रिलियन अमरीकी डालर क्लब में प्रवेश कराने की दिशा में ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। उन्होंने अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र पर समान रूप से ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की। इस वित्तीय वर्ष के बजट में " नारी से नारायणी", "हर घर जल" और " मज़बूत देश के मज़बूत नागरिक " जैसे विचारपूर्ण नारे दिए गए।

वित्त क्षेत्र: श्रीमती सीतारमण ने फिस्कल डेफिसिट लक्ष्य को 3.4% से घटाकर 3.3% करने की घोषणा की। 70,000 करोड़ रुपये पीएसयू बैंकों के पुनर्पूंजीकरण के लिए अनुमोदित किया गया है, जो न केवल ब्याज दर संचरण के मुद्दे को संबोधित करेगा, बल्कि तरलता भी बढ़ाएगा। हमें यह कदम अच्छा लगा क्योंकि इससे पीएसयू बैंकों पर तरलता का दबाव कम हो जाएगा।

सरकार ने सेबी को न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी को 25% से 35% तक संशोधित करने के लिए कहा है। श्रीमती सीतारमण ने बीमा में एफडीआई बढ़ाने पर जोर दिया। यह सेक्टर में विदेशी निवेशकों को आमंत्रित करेगा और क्षेत्र को विकसित करने में मदद करेगा।

कर के संबंध में, उन्होंने एंजेल टैक्स को कम करने के बारे में बात की, जो स्टार्ट-अप पर लगाया जाता है। यह स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने वाला है। इसके अलावा, स्टार्ट-अप द्वारा उठाए गए फंड आईटी विभाग द्वारा जांच के अधीन नहीं होंगे। भारत के स्टार्ट-अप्स को इस तरह के कदम की जरूरत थी क्योंकि एंजेल टैक्स उन पर एक बड़ा बोझ था और उन्हें अपनी वृद्धि को पूरा करने के लिए कोई फंड नहीं बचा था। वित्त मंत्री ने जोर दिया कि कर प्रस्तावों का उद्देश्य अर्थव्यवस्था की विकास की भावना को पुनर्जीवित करना था।

जो लोग 2 करोड़ रुपये से 5 करोड़ रुपये कमा रहे हैं उन्हें अब क्रमशः 3% और 7% का अतिरिक्त अधिभार देना होगा। यह सरकार के दृष्टिकोण को मजबूत करता है कि आप जितना अधिक कमा रहे है उतना ही अधिक कर देंगे।

अब, एक बैंक खाते से 1 करोड़ रुपये से अधिक की नकद निकासी पर 2% टीडीएस लागू होगा। यह कदम भारत को कम नकदी अर्थव्यवस्था बनाने और मुद्रा के उपयोग के डिजिटल तरीकों का उपयोग करने की दिशा में निर्देशित है।

रियल्टी और इंफ्रा: एफएम ने कहा बुनियादी ढांचे में भारी निवेश करने की जरूरत है। भारतमाला के माध्यम से राज्यों को अपने संबंधित इन्फ्रा को बनाने में मदद की जाएगी। भारतमाला नए गलियारों, राजमार्गों और सड़क परियोजनाओं के निर्माण में मदद करेगा और सागरमाला देश को रसद क्षेत्रों के प्रदर्शन को बढ़ाने में मदद करेगा। उन्होंने 5 साल में बुनियादी ढांचे के लिए निवेश के लिए100 लाख करोड़ का प्रस्ताव रखा

ऑटो: वित्त मंत्री ने अपने बजट में 10,000 करोड़ रु फेम -II योजना के लिए आवंटित किए है। इस योजना का उद्देश्य भारत में हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना है। वित्त मंत्री ने इन वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के साथ साथ हमारे देश में इन वाहनों के उत्पादन की भी बात कही है। इन योजनाओ का सीधा लाभ इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कम्पनिया महिंद्रा एंड महिंद्रा (उच्च गति और कम गति वाले तीन पहिया और इलेक्ट्रिक कार); टाटा मोटर्स (इलेक्ट्रिक कार); काइनेटिक ग्रीन एनर्जी एंड पावर (उच्च-और कम गति वाले तीन-पहिया); जितेंद्र न्यू ईवी टेक (इलेक्ट्रिक दोपहिया); ओकिनावा ऑटोटेक (इलेक्ट्रिक दोपहिया); अथर एनर्जी (इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर) और एम्पियर वाहन (इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर) को मिलेगा। इस पहल से ऑटोमोबाइल क्षेत्र के परफॉरमेंस में वृद्धि होगी।

शिक्षा क्षेत्र: श्रीमती सीतारमण ने "स्टडी इन इंडिया " कार्यक्रम की घोषणा की है जो विदेशी छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए भारत आने के लिए प्रोत्साहित करेगा। सरकार विश्व स्तरीय उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए 400 करोड़ रु निवेश करेगी। साथ ही उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना भी की जाएगी । शिक्षा क्षेत्र के लिए यह एक बड़ी वृद्धि होगी।

रेलवे और परिवहन: वित्त मंत्री द्वारा अपने बजट में 3000 कि.मी. की मेट्रो रेल परियोजनाओं को मंजूरी मिलने की घोषणा की। सर्कार द्वारा वर्ष 2030 तक रेल अधोसंरचना में 50 लाख करोड़ निवेश करने की घोषणा की गयी। रेलवे भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इन घोषणाओं के साथ वित्त मंत्री ने रेलवे को और अधिक मजबूती प्रदान करने का प्रयास किया है ।

पावर सेक्टर: पावर सेक्टर के लिए वन नेशन वन ग्रिड का स्वप्न वी मंत्री ने अपने बजट के माध्यम से जनता को दिखाया है । इससे प्रदेशो के बीच पावर का आदान प्रदान आसान होगा। जल्द ही बिजली क्षेत्र के टैरिफ के पैकेज की घोषणा की जाएगी और टैरिफ नीति में आवश्यक सुधार किए जाएंगे। सरकार ने एलईडी बल्ब को बढ़ावा देने के लिए किये गए प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए कहा की सरकार ने 35 करोड़ एलईडी बल्ब वितरित किये है जिससे 18341 करोड़ रु की बिजली की बचत हुई है।

रक्षा: भारत में नहीं निर्मित रक्षा उपकरण का आयात शुल्क से मुक्त होगा। इस कदम से विदेशी और अद्वितीय रक्षा उपकरणों के आयात में वृद्धि होगी।

गौरव गर्ग, हेड ऑफ़ रिसर्च, कॅपिटलवाया ग्लोबल रिसर्च