नई दिल्ली। बजट में लिस्टेड कंपनियों में मिनिमम पब्लिक होल्डिंग यानी न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत करने पर विचार करने की बात कही है। बाजार नियामक सेबी यदि इस पर आगे बढ़ता है तो कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों के शेयरों गिरावट आ सकती है।

शेयरखान के संजीव होटा ने कहा कि सार्वजनिक हिस्सेदारी 25 फीसदी से बढ़ाकर 35 फीसदी करने का प्रस्ताव बहुराष्ट्रीय कंपनियां और ऐसी कंपनियां, जिनमें प्रमोटरों यानी मालिकों की हिस्सेदारी ज्यादा है, उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। ऐसी कंपनियां आसानी से यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं करेंगी।

फिलहाल 40 सरकारी कंपनियां ऐसी हैं, जिनकी पब्लिक होल्डिंग 35 फीसदी से कम है। पिछले साल सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के लिए 25 प्रतिशत मिनिमम पब्लिक होल्डिंग करने की समयसीमा बढ़ाकर अगस्त, 2020 कर दी थी।

सेबी ने पहले 2013 में सभी लिस्टेड कंपनियों के लिए न्यूनतम शेयरधारिता के नियमों का पालन करने के लिए समयसीमा तय की थी। बाद में निर्णय लिया गया कि सरकारी कंपनियों में भी निजी क्षेत्र की कंपनियों के साथ मिनिमम पब्लिक होल्डिंग 25 फीसदी बनाए रखना चाहिए।

Posted By: Nai Dunia News Network