नई दिल्ली। थोक भाव के हिसाब से सितंबर में महंगाई (डब्ल्यूपीआई) दर घटकर 0.33 प्रतिशत रह गई, जो जून 2016 के बाद से अब तक का सबसे निचला स्तर है। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।इस साल अगस्त में थोक महंगाई 1.08 प्रतिशत और पिछले साल सितंबर में 5.22 फीसदी थी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार सितंबर, 2019 में खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर बढ़कर 7.47 फीसदी हो गई, जबकि गैर-खाद्य उत्पादों की महंगाई दर घटकर 2.18 प्रतिशत रह गई।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में थोक महंगाई दर 0.1 फीसदी रही और ईंधन एवं बिजली के मामले में महंगाई 0.5 प्रतिशत घटी है। फलों, सब्जियों, गेहूं, मांस और दूध की थोक महंगाई दर 0.6 फीसदी रही। थोक महंगाई सूचकांक में प्राथमिक उत्पादों की हिस्सेदारी 22.62 फीसदी है।

एक साल पहले प्याज की कीमतों में 122.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी के बावजूद सितंबर में WPI मुद्रास्फीति की दर में गिरावट आई। ICRA के प्रमुख अर्थशास्त्री अदिति नायर के अनुसार "सितंबर 2019 में डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति में अनुक्रमिक स्लाइड 0.3 प्रतिशत के पूर्वानुमान की तुलना में कम है।

क्‍या हैं डब्‍ल्‍यूपीआई के मायने

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) थोक वस्तुओं की एक प्रतिनिधि बॉस्‍केट की कीमत है। कुछ देश (फिलीपींस की तरह) मुद्रास्फीति के केंद्रीय उपाय के रूप में WPI परिवर्तनों का उपयोग करते हैं। लेकिन अब भारत ने मुद्रास्फीति को मापने के लिए नए सीपीआई को अपनाया है। यह स्टॉक और फिक्स्ड प्राइस मार्केट को भी प्रभावित करता है।

फूड इंडेक्स 5.98 प्रतिशत पर

डब्ल्यूपीआई फूड इंडेक्स बढ़कर 5.98 फीसदी पर रहा, जो अगस्त में 5.75 प्रतिशत था। गैर-खाद्य पदार्थों की महंगाई दर में 2.5 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई है।

खास बातें :

- जून 2016 के बाद सबसे कम, ईंधन की कीमतें घटने से राहत

- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में थोक भाव महंगाई दर महज 0.1 प्रतिशत

Posted By: Nai Dunia News Network