अंबिकापुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

विवि अनुदान आयोग के प्रावधानों के अनुरूप संत गहिरागुरु विवि प्रबंधन द्वारा पहली बार पीएचडी प्रवेश परीक्षा 2019 का आयोजन किया गया। अंबिकापुर के राजमोहिनी देवी शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आयोजित पीएचडी प्रवेश परीक्षा में 21 विषयों में 560 परीक्षार्थी शामिल हुए। 255 रिक्त सीटों के लिए आयोजित प्रवेश परीक्षा का परिणाम शीघ्र जारी करने की तैयारी में प्रबंधन लगा हुआ है।

विवि की स्थापना के बाद पूर्व में एक बार पीएचडी की प्रवेश परीक्षा आयोजित की गई थी। उस दौरान विवि अनुदान आयोग के प्रावधानों को पूरा कराने कोई व्यवस्था नहंी की गई थी। न तो शोध केंद्रों की स्थापना की गई थी और न ही गाइड ही नियुक्त किए गए थे। कोर्स वर्क की भी कोई व्यवस्था नहीं थी। उक्त परीक्षा में सफल हुए कई परीक्षार्थी कमियों के कारण पीएचडी नहीं कर सके। जिन्होंने पीएचडी की, वह भी सिर्फ नाम की रही, क्योंकि यूजीसी द्वारा तय गाइड लाइन का पालन नहीं होने से उसकी मान्यता नहीं थी। इसी समस्या को देखते हुए संत गहिरागुरु विवि के कुलपति प्रो. रोहिणी प्रसाद ने नई पहल की। सबसे पहले उन्होंने विषयवार गाइड नियुक्त किए। तत्पश्चात शोध केंद्रों की स्थापना कराई ताकि यूजीसी के नियमों के अनुरूप कोर्स वर्क हो सके। बिना कोर्स वर्क के पीएचडी की कोई मान्यता नहीं होने से सारी व्यवस्था पूर्ण कर लेने के बाद बुधवार को प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया गया। 21 विषयों में कुल 560 परीक्षार्थी शामिल हुए। कुलपति प्रो. रोहिणी प्रसाद परीक्षा आरंभ होने के पहले से परीक्षा समाप्त होने के बाद तक परीक्षा केंद्र में ही डटे रहे। उन्होंने परीक्षा केंद्र के एक-एक कक्षों का निरीक्षण कर संपूर्ण व्यवस्था का जायजा लिया।

255 रिक्त सीट के लिए हुई परीक्षा

विवि प्रबंधन द्वारा नेट-सेट उत्तीर्ण विद्यार्थियों तथा कालेजों में पदस्थ सहायक प्राध्यापकों के लिए कुछ माह पहले से पीएचडी कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, क्योंकि इनके लिए लिखित परीक्षा क्वालीफाई करना जरूरी नहीं होता। उक्त प्रावधान में लगभग 91 शोधार्थी शोध प्रक्रिया में शामिल हो रहे हैं। वर्तमान में उपलब्ध गाइडों के पास रिक्त 255 सीटों के लिए बुधवार को परीक्षा आयोजित की गई। पहली बार आयोजित परीक्षा को लेकर परीक्षार्थियों में उत्साह भी देखा गया।

आरक्षण नियमों के अनुरूप जारी होगी सूची

पीएचडी प्रवेश परीक्षा को क्वालीफाई करने के लिए कम से कम 50 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी है। उक्त न्यूनतम अंक हासिल करने वाले परीक्षार्थियों को ही क्वालीफाई माना जाएगा। जितनी रिक्त सीटें हैं, उनका आरक्षण तय किया जाएगा। आरक्षण नियमों के अनुरूप मेरिट सूची जारी होगी। उस सूची में जिन परीक्षार्थियों का नाम शामिल रहेगा, वे शोध की अगली प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।

कम से कम साढ़े तीन साल में होगी पीएचडी

विवि अनुदान आयोग के गाइड लाइन के मुताबिक कम से कम साढ़े तीन वर्ष का समय पीएचडी पूर्ण करने में लगेगा। इसमें छह माह का कोर्स वर्क भी शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा क्वालीफाई करने वाले परीक्षार्थी जो मेरिट सूची में आएंगे, उन्हें सबसे पहले छह माह का कोर्स वर्क पूरा करना होगा। कोर्स वर्क तीन चरणों में पूरा होगा। सबसे पहले शोध प्रविधि होगी। तत्पश्चात रिव्यू आफ लिट्रेचर की प्रक्रिया शोध केंद्र में पूरी होगी। यहीं संबंधित शोधार्थी शोध की संक्षेपिका तैयार करेगा। तत्पश्चात उन्हें एक लिखित परीक्षा देनी होगी। साथ ही रिसर्च डिग्री कमेटी आरडीसी के समक्ष प्रस्तुतिकरण देना होगा। इस प्रस्तुतिकरण को भी क्वालीफाई करने वाले शोध के लिए अधिकृत किए जाएंगे।

पीएचडी प्रवेश परीक्षा का आयोजन बुधवार को किया गया। 21 विषयों में 560 परीक्षार्थी शामिल हुए। परीक्षा शांतिपूर्वक ढंग से संपन्न हुई। यूजीसी द्वारा निर्धारित गाइड लाइन का पालन करते हुए विवि प्रबंधन द्वारा शोध की प्रक्रिया आरंभ कराई गई है।

प्रो. रोहिणी प्रसाद

कुलपति, संत गहिरागुरु विवि