बलरामपुर (नईदुनिया न्यूज)। छत्तीसगढ़ का सीमावर्ती जिला बलरामपुर धीरे-धीरे जैविक खेती की ओर कदम बढ़ा रहा है। जिले को जैविक खेती के लिए पहचान दिलाने में एक सौ स्व सहायता समूह की 736 महिलाएं लगी हुई है, जिन्होंने 233 क्विंटल केंचुआ खाद की बिक्री की है। इन महिलाओं की देखा-देखी दूसरी महिला कृषक भी अपनी बाड़ी और खेतों में रासायनिक उर्वरक के बजाय केंचुआ खाद का उपयोग करने लगी है। रासायनिक उर्वरक की तुलना में दाम कम होने के कारण जिले के कृषकों की ओर से भी लगातार आ रही मांग को देखते हुए समूह की महिलाएं वर्मी कंपोस्ट तैयार करने में लगी है। वर्तमान में 751 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट बिक्री के लिए तैयार किया जा चुका है। कृषि विभाग अब जैविक खेती के रकबा आंकलन में लगा है ताकि यह पता चल सके कि जिले के कितने रकबे में जैविक खेती की जा रही है।

बलरामपुर जिले को रासायनिक उर्वरकों के कम उपयोग वाला जिला बनाने की दिशा में दो वर्ष पूर्व तत्कालीन कलेक्टर संजीव झा ने पहल की थी। उस दौरान शासकीय तौर पर गोबर की खरीदी नहीं होती थी लेकिन उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में जनजागरूकता के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बरकरार रखते हुए खेती में जैविक खाद का उपयोग करने की शुरुआत कराई थी। कृषि विभाग के मैदानी कर्मचारी, किसानों की बाड़ियों में जाकर जैविक खाद बनवा रहे थे इससे रासायनिक उर्वरक की मांग भी कम हुई थी। उनके तबादले के बाद काम धीमा हो गया था लेकिन प्रदेश में कांग्रेस के सत्तासीन होने और गोधन न्याय योजना आरंभ होने के बाद एक बार फिर जैविक खेती ने जोर पकड़ा है। इसमें समूह से जुड़ी महिलाओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका है जो वर्मी कंपोस्ट का निर्माण, उपयोग करने के साथ दूसरे किसानों को भी रासायनिक उर्वरकों का कम इस्तेमाल करने लगातार प्रेरित कर रहे है। बलरामपुर के उप संचालक कृषि अजय अनंत बताते हैं कि जैविक खेती का रकबा बढ़ा है लेकिन अभियान चलाकर रकबा का आंकलन नहीं किया गया है, इसकी प्रक्रिया हम शुरू कर रहे है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन की गतिविधियों से भी वर्मी कंपोस्ट का खेतों में उपयोग बढ़ा है। उन्होंने बताया कि रसायनों के अत्यधिक प्रयोग से भूमि की उर्वरता नष्ट होने से फसल की उत्पादकता पर असर पड़ता है। फसलों में रसायनों के अधिक और अनियंत्रित प्रयोग के अनेकों नुकसान हैं कालांतर में इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं। यही वजह है कि जिले के किसान जागरूक हो रहे है।

वर्मी कंपोस्ट उत्पादन और खपत का आंकड़ा-

बलरामपुर जिले में गोधन न्याय योजना के अंतर्गत 36 हजार 164.62 क्विंटल गोबर की खरीदी की गई है तथा 233.3 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट का विक्रय किया जा चुका है। वर्तमान में गौठान में 751.20 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट की पैकिंग की जा रही है तथा 35 हजार 360.12 क्विंटल गोबर वर्मी टांका में कम्पोस्ट के लिए प्रक्रियाधीन हैं। यह भी जल्द ही जैविक खाद के रूप में बिक्री के लिए उपलब्ध रहेगा। वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने में 100 स्व-सहायता समूह की 736 महिलाएं जुड़ी हुई है तथा खाद विक्रय से अच्छी आय प्राप्त कर रही है।

महिलाओं की मेहनत रंग ला रही-

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की महिलाएं गौठानों में वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के साथ ही समुदाय आधारित स्थायी कृषि परियोजना के अंतर्गत गांव-गांव में जैविक खेती का रकबा बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। शासन के विभिन्न विभागों द्वारा वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग गौठानों में सामुदायिक बाड़ियों तथा उद्यानों में पौधारोपण हेतु किया जा रहा है। ग्रामीण महिला कृषक अपने खेतों तथा घरों की बाड़ियों में भी जैविक खाद का प्रयोग कर रही हैं। समूह की महिलाएं तथा ग्रामीण कृषक महिलाओं की भागीदारी से जैविक खेती का रकबा बढ़ा है।

रैली निकाल जैविक खेती के लिए कर रही जागरूक-

समूह से जुड़ी महिलाओं द्वारा गांव-गांव में गोबर खरीदी तथा जैविक खाद को बढ़ावा देने के लिए जनजागरूकता रैली का भी आयोजन किया जा रहा है। पशुपालकों से दो रूपये प्रति किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है। जिले के छह विकासखण्डों के 100 गौठानों में पशुपालकों तथा कृषकों से गोबर खरीदा जा रहा है तथा गोबर से महिला समूह वर्मी कंपोस्ट भी तैयार कर रही हैं। गोधन न्याय योजना से ग्रामीणों को आर्थिक लाभ तो हो ही रहा है। साथ ही साथ जैविक खाद के उपयोग से भूमि की उर्वरा शक्ति में भी वृद्धि हो रही है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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