अंबिकापुर। Agriculture News: सरगुजा जिले में अचानक बारिश बंद होने के बाद धान की फसल में कीट, व्याधियों का प्रकोप तेजी से बढ़ा है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिक भी किसानों को कीट, व्याधियों से निपटने सलाह दे रहे हैं और खेतों तक पहुंच गए हैं। कृषि विज्ञान केंद्र मैनपाट के प्रभारी डॉ संदीप शर्मा के मार्गदर्शन में गठित वैज्ञानिकों की टीम ने जिले के जगदीशपुर, कुम्हरता, नवानगर, कमलेश्वरपुर, मूसा खोल ग्राम में किसानों के साथ उनके खेतों तक पहुंच स्थिति का जायजा लिया। भ्रमण के दौरान धान, मक्का फसल का जायजा लिया।

किसानों को कीट, व्याधियों के रोकथाम के लिए सलाह दी गई और वर्तमान में अधिकांश क्षेत्रों में लगे झुलसा रोग के लिए उचित दवाइयों का छिड़काव करने की सलाह व विधि बताई गई। लगातार बारिश के कारण धान में झुलसा लगने और बीमारियों की समस्या बढ़ जाने का मामला भी सामने आया। इस समय बांकी, तना छेदक कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। मक्का फसल में विदेशी की फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप भी कहीं कहीं नजर आया है। सब्जी व की फसलों में खासकर टमाटर के फलों में फल छेदक कीट की समस्या भी बढ़ रही है।

वैज्ञानिकों ने किसानों को अनुशंसित यूरिया का छिड़काव करने की सलाह दी है ताकि कीटों का आक्रमण कम हो सके। वैज्ञानिकों ने कीट और रोग हेतु अनुशंसित दवाइयों का छिड़काव करने कहा है। कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी शर्मा के साथ कीट विज्ञानीज सूर्य प्रकाश गुप्ता भी शामिल थे। डॉ शर्मा ने बताया कि बारिश कम होने के कारण और उमस बढ़ने के कारण धान में कीट व्याधियों का प्रकोप अक्सर बढ़ जाता है क्योंकि अभी धान गभोट अवस्था में है और बालियां भी निकल रही हैं, यदि ऐसे समय में धान में रोग व कीट का प्रकोप बढ़ा तो किसानों को नुकसान हो सकता है।

कृषि विज्ञान केंद्र के क्षेत्र में आने वाले गांव में जाकर हम लगातार किसानों को सलाह दे रहे हैं।कई किसानों ने दवाइयों के उपयोग करने का तरीका भी पूछा जिसे मौके पर बताया गया। उन्होंने बताया कि किसानों को सचेत किया गया है कि अनुशंसित कीटनाशक दवाइयों का ही उपयोग करें। किसी भी ऐसी दवाइयों का छिड़काव न करें जिससे कीट व रोगों को कम करने की जगह सीधे फसल को नुकसान हो जाए। गौरतलब है कि जिले में धान व मक्के में कीट व्याधियों के प्रकोप को देखते हुए दो दिन पूर्व ही कृषि विज्ञान केंद्र व अनुसंधान केंद्र अजीरमा के अधिष्ठाता डॉ वीके सिंह ने भी किसानों के लिए अलर्ट जारी किया था और लगातार खेतों पर नजर रखने और दवाइयों का छिड़काव करने व रोकथाम के उपायों की जानकारी दी थी।

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