अंबिकापुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

सरगुजा जिले में अगस्त माह के अंतिम सप्ताह तक धान की रोपाई चल ही रही है। मानसून की गड़बड़ी के कारण किसान 40 दिन से अधिक हो चुके धान की नर्सरी को रोपाई कराने मजबूर हैं। हालांकि कृषि विभाग के मुताबिक सरगुजा जिले में कुल एक लाख 13 हजार हेक्टेयर में धान की फसल लेने का लक्ष्य था जिसमें 48 हजार हेक्टेयर में बोता पद्घति से धान लगाने का लक्ष्य था किंतु अल्प बारिश के कारण बोता पद्घति का रकबा किसानों ने बढ़ा दिया है।

रोपाई के लिए पानी की व्यवस्था नहीं हो रही थी। इस कारण जिन किसानों ने धान का थरहा किया था वह इंतजार करते रहे और डेढ़ महीने बाद नर्सरी उखाड़ कर रोपाई करा रहे हैं जिससे उत्पादन प्रभावित होना तय है। इधर भादो मास लगने के बाद एक-दो दिन में रुक-रुककर हो रही अलग-अलग क्षेत्र में बारिश से किसान तो खुश हैं पर धान की नर्सरी इतनी बढ़ चुकी है कि रोपाई से ज्यादा फायदा मिलने वाला नहीं है, क्योंकि आजकल हाइब्रिड किस्म के धान की नर्सरी मात्र 20 दिन के अंदर लगाना होता है। यह अवधि कब की पार हो चुकी है और 40-40 दिन का धान नर्सरी उखाड़ कर रोपाई कराने मजबूर हैं। किसान हार नहीं मान रहे और रोपाई में लगे हुए हैं। उधर जिन किसानों ने बोता पद्धति अपनाया वे सफल हुए हैं। सीधे खेतों में धान की बुवाई कर देने से धान उगाया और अब रोपाई से भी बेहतर स्थिति में है किंतु जो किसान रोपाई के लिए इंतजार करते रहे वे पिछड़ चुके हैं और उनकी खेती भी पिछड़ गई है। जिले के कई इलाकों में अभी भी रोपाई का काम चल रहा है जबकि एक सप्ताह बाद सितंबर माह लग जाएगा। सरगुजा में कम अवधि के धान अक्टूबर माह में ही पक जाते हैं और एक महीना पहले यहां रोपाई चल रही है। इसी से सरगुजा में पिछड़ी खेती का अनुमान लगाया जा सकता है।

निर्धारित लक्ष्य के करीब बोवाई-रोपाई- भगत

कृषि विभाग के उपसंचालक एमआर भगत का कहना है कि सरगुजा में एक लाख 13 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य रखा था जो लगभग पूरा होने की स्थिति में है। इनमें 48 हजार हेक्टेयर में बोता पद्धति से धान लग चुका है बल्कि बोता पद्धति का प्रतिशत 100 प्रतिशत से भी पार हो चुका है। उन्होंने बताया कि रोपाई पद्धति से धान का लक्ष्य 65 हजार हेक्टेयर रखा गया था जो लगभग 90 प्रतिशत हो चुका है।

कीट-व्याधियों का सता रहा भय-

लेट-लतीफ चल रहे धान की रोपाई के बाद अब कीट-व्याधियों के प्रकोप का भय किसानों को सता रहा है। किसानों के खेतों में कीट एवं रोग का प्रकोप भी शुरु हो गया है। इधर दो दिनों से मौसम में बदलाव आया है। मूसलाधार बारिश के साथ रिमझिम बारिश का दौर भी जारी है इससे किसानों की चिंता तो थोड़ी कम हुई है पर धान की खेती पिछड़ने से कीट-व्याधियों के प्रकोप लगने का खतरा मंडरा रहा है।

हाइब्रिड किस्म को ज्यादा नुकसान-

कृषि जानकारो के मुताबिक हाइब्रिड किस्म के धान बीज की नर्सरी लगाने के 15 से 20 दिन के भीतर उखाड़कर उसकी रोपाई आवश्यक होती है। 20 दिन से अधिक होने पर धान में ग्रोथ नहीं होता और उत्पादन प्रभावित होता है। अल्प वर्षा के कारण 20 दिन के भीतर रोपाई की जाने वाली हाइब्रिड किस्मों को 30 से 40 दिन बाद लगाया जा रहा है जिससे उत्पादन में भारी नुकसान होने का अनुमान है।

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