अंबिकापुर। वैलेंटाइन-डे के विरोध के नाम पर संजय पार्क में आतंक का माहौल निर्मित कर छेड़खानी की तर्ज पर युवती को दौड़ाने के मामले में प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर सरगुजा एसपी आशुतोष सिंह ने चार पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। घटना में शामिल तीन-चार लोगों की शिनाख्त भी हो चुकी है। इन सभी के खिलाफ नामजद अपराध पंजीबद्घ कर तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश एसपी ने दिए हैं। उन्होंने कहा है कि शहर में इस तरीके की घटना स्वीकार नहीं की जाएगी और जो कोई भी ऐसी घटनाओं में संलिप्त होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि वैलेंटाइन-डे के विरोध के नाम पर सोशल मीडिया में वायरल वीडियो के आधार पर रविवार को नईदुनिया ने 'पार्क में डंडे लेकर युवती को दौड़ाया" शीर्षक से खबर नईदुनिया वेबसाइट पर जारी की गई थी। पुलिस के निचले स्तर के अधिकारी मामले को दबाने में लगे हुए थे, लेकिन घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी आशुतोष सिंह ने वायरल वीडियो की पड़ताल कराई और समूचे प्रकरण की जांच कराने के साथ ही ड्यूटी में तैनात पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों से पूछताछ भी कराई। घटना के दिन शहर में पुलिस अधीक्षक नहीं थे। शासकीय काम के सिलसिले में शहर से बाहर होने और दूसरे दिन मामला सामने आने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी वायरल वीडियो पर संदेह जता रहे थे। पूरे प्रकरण की जांच के बाद आखिरकार एसपी आशुतोष सिंह ने प्रथम दृष्टया ड्यूटी में तैनात चार पुलिस अधिकारी-कर्मचारी की लापरवाही पाई। इन सभी की ड्यूटी संजय पार्क में शांति, सुरक्षा व कानून व्यवस्था के लिए लगाई गई थी। एसपी आशुतोष सिंह ने बताया कि एक महिला, एक पुरूष आरक्षक के साथ दो पुलिस अधिकारियों को भी निलंबित किया गया है। उन्होंने कहा कि मामले में एफआइआर भी होगी और नामजद आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा जाएगा।

जांच के बाद नामजद हो रही एफआइआर

एसपी आशुतोष सिंह ने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच के बाद तीन-चार लोगों के नाम का पता चल चुका है। उनके खिलाफ नामजद एफआइआर कोतवाली अंबिकापुर में दर्ज की जा रही है। जो घटना हुई, यह स्वीकार योग्य नहीं है। ऐसी घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी स्थिति में शहर की शांति, सुरक्षा व कानून व्यवस्था में खलल डालने वालों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। गुंडागर्दी भी बर्दास्त नहीं की जाएगी।

प्रकरण को दबाने में लगे थे कुछ अधिकारी

मामला उजागर होने के बाद अपना दामन बचाने के लिए कुछ पुलिस अधिकारी प्रकरण को दबाने में लगे हुए थे। बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा वायरल वीडियो की वैधानिकता पर सवाल उठा यह बताने का प्रयास किया जा रहा था कि वीडियो इस साल का नहीं है।

अपने स्तर पर पूरे मामले को दबाने की कोशिश करने वालों को उस वक्त तगड़ा झटका लगा, जब एसपी आशुतोष सिंह ने खुद जांच को लेकर गंभीरता दिखाई और संपूर्ण तथ्यों से अवगत कराने का निर्देश दिया। लापरवाही पर चार पुलिस अधिकारी-कर्मचारी सस्पेंड हुए हैं और अब नामजद आरोपितों की धरपकड़ की तैयारी शुरू हो गई है।

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