अंबिकापुर। Ambikapur News: कोरोना संक्रमण से बचाव और नियंत्रण के लिए जारी लॉकडाउन ने सिर्फ सब्जी उत्पादक किसानों को ही परेशानी में नहीं डाला है बल्कि फल और फूल उत्पादक किसान भी मुश्किल में हैं। सरगुजा में अमरूद का उत्पादन व्यवसायिक तौर पर शुरू हो चुका है लेकिन बाजार बंद रहने से अमरूद खेतों में ही सड़ रहा है। बरसात के सीजन में पेड़ों पर पक चुका अमरूद जल्दी ही जमीन पर गिर जाता है। खरीददार नहीं होने के कारण फल उत्पादक अमरूद को पेड़ पर ही छोड़ रहे हैं जिसका परिणाम यह हो रहा है कि पका हुआ अमरूद खेतों में गिरकर सड़ रहा है।

सरगुजा जिले में ताइवानी अमरूद के अलावा इलाहाबादी और स्थानीय किस्मों की अमरूद का उत्पादन होता है। इस सीजन में फल व्यवसाई सीधे अमरूद के बागानों में जाकर इसकी खरीदी कर बाजार मे ला बिक्री करते हैं। अमरूद के बागान से 10 रुपए प्रति किलो की दर से खरीदी कर बाजार में 20 से 30 रुपए प्रति किलो की दर से लॉकडाउन के पहले तक अमरुद बिक रहा था, लेकिन कोरोना की चेन तोड़ने के लिए लॉक डाउन लग जाने के कारण अमरूद उत्पादक किसान भी परेशान हो गए हैं।

बाजार बंद है। लोगों का घरों से निकलना नहीं हो रहा है। ऐसे में अमरूद को पेड़ पर ही छोड़ देने के सिवाय कोई उपाय भी नहीं रह गया है। इस सीजन में अंबिकापुर के बाजार में ही स्थानीय स्तर पर उत्पादित अमरूद खप जाया करता था लेकिन लॉकडाउन के कारण नुकसान के सिवाय कुछ भी नहीं है। बरसात के सीजन की अमरूद जल्दी सड़ जाता है इसलिए इसे सुरक्षित रखना संभव ही नहीं है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है अमरूद

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने चिकित्सक सलाह दे रहे हैं। चिकित्सकों का मानना है कि व्यक्ति के शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता जितना मजबूत होगा कोरोना संक्रमण का असर उतना ही कम होगा।रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अमरुद को भी महत्वपूर्ण माना गया है। अमरूद के सेवन से कई प्रकार के फायदे हैं लेकिन यह गुणकारी अमरूद लॉकडाउन की वजह से लोगों तक पहुंच ही नहीं पा रहा है।प्रतिदिन सरगुजा में लगभग 10 क्विंटल अमरूद का उत्पादन होता है।

यहां 400 पौधों का है बागान

पर्यावरण सरंक्षण के क्षेत्र में उलेखनीय सेवाओं के कारण राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित वृक्षमित्र ओपी अग्रवाल के बागान में विभिन्न किस्मों के 400 से अधिक अमरूद के पौधों है।वर्ष में दो बार अमरूद का उत्पादन होता है। लॉकडाउन में उनके बागान में अमरूद की बर्बादी देखने को मिल रही है। रोज कई किलो अमरूद बागान में ही सड़ जा रहा है। वे खेती को लाभकारी बनाने नए प्रयोग के लिए किसानों के आदर्श है। कम जमीन पर लाभकारी और अंतरवर्तीय खेती उनकी पहचान है। वे फल उत्पादन के क्षेत्र में भी आगे बढे़ है।

यह है फायदा

अमरूद में पाया जाने वाला विटामिन बी-9 शरीर की कोशिकाओं और डीएनए को सुधारने का काम करता है। अमरूद में मौजूद पोटेशियम और मैग्‍नीशियम दिल और मांसपेशियों को दुरुस्‍त रखकर उन्‍हें कई बीमारियों से बचाता है। अगर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना चाहते हैं तो अमरूद का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। यह कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित रखता है। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए भी यह गुणकारी है।

Posted By: Himanshu Sharma

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