Ambikapur News : अम्बिकापुर। कोरोना संकट की घड़ी में सेवा और पूरे समर्पण के साथ प्रथम पंक्ति में खड़े लोगों की हौसला आफजाई कर रहे हैं सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक रतनलाल डांगी। उन्होंने कहा है कि अब तक जिन्हें अनुत्पादक और निकम्मा समझा गया, वही संकट में साथ खड़े नजर आ रहे हैं। इसलिए ऐसे लोगों पर विश्वास और बढ़ाने की जरूरत है। सेवाभावी लोगों से खुद मुलाकात कर आभार जताने वाले आईजी डांगी ने कहा है कि कोई आपको हतोत्साहित करना चाहे तो उसकी बातों पर ध्यान न दें। संकट या आखिरी वक्त में निकम्मा, नालायक बेटा ही सहारा बनता है। सहज और सरल शब्दों में आईजी ने संकट की घड़ी में ऐसे ही लोगों, संस्थाओं के प्रथम पंक्ति में आकर कार्य करने की बात कही है।

आईजी ने कहा है कि निकम्मा या नालायक शब्द घर, गली व मोहल्ले में कई बार सुनने को मिल जाता है। माता-पिता उन बच्चों को ज्यादा प्यार करते हैं जो पढ़ने में होशियार हों। स्कूल, मोहल्ले मे जिनका नाम हो। जिसकी चर्चा किटी पार्टियों मे होती है। और उसको निकम्मा या नालायक बोलते हैं जो पढ़ने मे औसत हो। अपनी मर्जी का मालिक हो, आवारागर्दी करते हुए अपने बहन, भाईयों के बराबर नंबर नही ला पाते हैं। जिसे हर दिन निकम्मे शब्द के अलावा दूसरा कुछ सुनने को नहीं मिलता। चाहे कई बार वो अच्छा भी काम क्यों न कर लें।

आईजी रतनलाल डांगी ने सामाजिक व्यवस्थाओं में सामान्य सोच को इंगित करते हुए कहा है कि होशियार बच्चे जिन पर नाज होता है वे बेहतर कैरियर, धन लाभ के लिए माता- पिता (परिवार) को छोड़कर दूर प्रदेश या विदेश मे चले जाते हैं। और घर परिवार में रह जाता है वहीं जिसको कामचोर या निकम्मा कहा जा रहा था। समय के साथ, उम्र ढलने से, एक दिन जब स्वास्थ्य ठीक नहीं रहने से अस्पताल मे भर्ती कराना हो, दवाई दिलाना हो, सामाजिक कार्यों में जाना हो, तीर्थयात्रा करनी हो तब नजर जाती है उस निकम्मे पर। वही निकम्मा दौड़ के आता है, दिन- रात सेवा करता रहता है।

लेकिन विदेश में रहने वाले समय न रहने, छुट्टी नहीं मिलने के बहाने नहीं पहुंचते हैं। कई बार तो वह होशियार व लाडला अंतिम समय मे भी नहीं पहुंचता है लेकिन फोन से ही औपचारिकता पूरी कर लेता है। परन्तु वो निकम्मा अंतिम सांस के समय भी आंखों के सामने सेवाभाव लिए चेहरे पर उदासी लिए रात-दिन खड़ा रहता है । उसके मन मे अपने माता पिता के प्रति प्यार का ही भाव मिलेगा चाहे उसको उन्होंने तिरस्कार ही क्यों न दिया हो।

आज जब पूरी दुनिया कोरोना के संकट मे फंसी हुई है। लगातार संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं। अपनों को खो भी रहे हैं । तब मैदान मे वे ही लोग सेवा दे रहे हैं जिन्हें निकम्मा, अनुत्पादक कहा जाता हैं। जैसे सरकारी डाक्टर, नर्स, स्वास्थ्य कर्मचारी, पुलिस, शिक्षक, ग्राम सचिव, प्रशासनिक अधिकारी एवम् सार्वजनिक उपक्रमों जिनको निकम्मा, कामचोर ,अनुत्पादक कहा जाता रहा है। हर व्यक्ति निजी हास्पिटल, निजी स्कूलों, उद्योगों को ही सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। सरकारी उपक्रमों, संस्थाओं के निजीकरण की तरफदारी करते रहते हैं।

आईजी ने पूछा है कि कोरोना संकट में आज कोरोना योद्धाओं के रूप मे फिल्ड मे कौन दिखाई दे रहा है? कौन हैं वे जो महीनों से अपने घर नहीं गए हैं? कौन है जिन्होंने ड्यूटी पर जान दी है? कौन है जो लोगों को विदेशों से खुद को संक्रमित होने के खतरे के बावजूद उड़ाने भरकर भारतीयों को ले आए थे? कौन सी संस्थाएँ हैं जिन्होंने अपने सीएसआर का बहुत बड़ा हिस्सा पीएम केयर मे दिया है? भारतीय रेल जो लाखों श्रमिकों को अपने घर पहुंचा रही हैं। और वह संस्थाएं और लोग जो सर्वश्रेष्ठ थे अपने अस्पताल बंद करके लाकडाउन मे अपने परिवार के साथ समय बीता रहे हैं।

कोरोना संक्रमित लोगों का ईलाज जान को दांव पर लगाकर सरकारी डाक्टर कर रहे हैं। स्वास्थ्य कर्मचारी रात दिन लगे हुए हैं। लोग ठीक होकर घर भी लौट रहे हैं।क्वारन्टाइन सेन्टरों मे हमारे शिक्षक ,पटवारी, एएनएम, सचिव और पुलिस लगी है। चौकं चौराहों पर पुलिस खड़ी है। सार्वजनिक उपक्रम रात दिन देश के विकास के लिए उत्पादन मे लगे हैं। इंडियन एयरलाइंस, इंडियन रेलवे यात्रियों व सामानों को गंतव्यों तक पहुंचा रहे हैं।

ये वही कर्मचारी और संस्थान हैं जिनको अनुत्पादक व सफेद हाथी कहा जाता रहा है। विश्व महामारी मे यह सब फ्रंटलाइन कोरोना योद्धाओं के रुप मे आखिरी सांस तक खड़े रहेंगे। आईजी ने कहा है कि बस इन संस्थाओ मे विश्वास कीजिए। इनकी कमजोरियों को दूर करने का अभियान चलाएं न कि लाभ कमाने वालों के हवाले कर दें। कुछ संस्थाएं लोककल्याण के लिए मजबूत होनी जरुरी है। कोई निकम्मा नहीं होता है ,बस कोई सेवा भाव के लिए काम करता है और कोई लाभ के लिए।

Posted By: Anandram Sahu

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