अंबिकापुर । Ambikapur News: सरगुजा जिले के नदी नालों के किनारे इन दिनों गर्मी में बोई जाने वाली धान की फसल लहलहा रही है। जिन जिन गांव में नदी नाले हैं वहां धान की हरियाली इन दिनों देखते ही बन रही है। इस बार लगातार बेमौसम बारिश होने के कारण भी गर्मी वाली धान की किस्म से किसानों को जबरदस्त पैदावार मिलने की उम्मीद है। धान में अब बालियां निकलने की स्थिति में है। 15 जून से पहले धान पक जाएगी और यदि बारिश शुरू नहीं हुई तो किसानों को अच्छा उत्पादन भी मिलेगा।

अंबिकापुर शहर के आसपास स्थित नदी नालों में इन दिनों धान की खेती पहली बार अधिक नजर आ रही है। इस बार खेतों में नमी लगातार बरकरार थी क्योंकि बेमौसम बारिश होती रही और किसानों को नदी नालों को बांधना नहीं पड़ा।

नगर से लगे खैरवार बांकी जलाशय से लेकर कई किलोमीटर तक नदी के हजारों हेक्टेयर भूमि पर किसानों ने गर्मी वाली धान की फसल ली है। धान पकने की ओर अग्रसर है। किसानों के मुताबिक गर्मी में बोई जाने वाली धान काफी अधिक पैदावार देती है। खरीफ में बोई जाने वाली धान से इसका वजन भी अधिक होता है। वर्षों से नदी नालों के किनारे धान की खेती सरगुजा के किसान करते आ रहे हैं किंतु इस बार रकबा बढ़ गया है।

हालांकि कृषि विभाग शासन के आदेश का पालन करते हुए गर्मी में बोई जाने वाली धान का रकबा का डाटा नहीं रखता जानकारी भी शासन तक कृषि विभाग ने महज 100 हेक्टेयर का दिया है किंतु जिले में इस बार हजारों हेक्टेयर में धान की फसल किसानों ने गर्मी में ली है। इस सीजन ने धान में पानी अधिक लगता है। इस कारण जल स्रोत को देखते हुए जल संरक्षण करने कृषि विभाग व प्रशासन गर्मी में धान न बोनेबकी सलाह देता है, बावजूद इसके किसान हर वर्ष गर्मी में धान का रकबा बढ़ाते हैं क्योंकि उत्पादन खरीफ से अधिक होता है।

सरगुजा में उड़ेला प्रथा पर विराम

सरगुजा जिले में वर्षों से रबी की फसल कटाई के बाद उड़ेला प्रथा यानी अपने घर के मवेशियों को छोड़ने की प्रथा चली आ रही थी। इस बार बड़े पैमाने पर नदी नाले के किनारे धान की खेती अधिकांश गांव में होने के कारण ग्रामीणों ने इस प्रथा को बाय बाय कर दिया है। इस बार लोगों ने अपने मवेशियों को बांधकर रखा है क्योंकि हर किसान धान की खेती किया हुआ है। धान के साथ नदी नालों के किनारे साग सब्जियों की खेती भी किसानों ने की है।

लाकडाउन का उठाया किसानों ने फायदा

लगभग दो माह से सरगुजा के शहरी व ग्रामीण इलाके में लाकडॉउन की स्थिति है। ग्रामीण शहर की ओर मजदूरी करने नहीं आ रहे। इस कारण गांव में ही वे कामकाज खोज रहे हैं। लिहाजा नदी नालों के किनारे गर्मी वाली धान की रखवाली करने के साथ शेष बची जमीन में साग सब्जियों की खेती कर परिवार सहित उसी में लगे हुए हैं।

लॉकडाउन का अच्छा फायदा ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने उठाया है। शहर में मजदूरी करना छोड़ अपने खेत में ही खाली जमीन पर साग सब्जियां उगा कर उसकी देखरेख कर रहे हैं। कोरोना वायरस के संकट के कारण जहां लोग घर में रहकर तनाव महसूस कर रहे हैं वहीं किसान परिवार सहित धान की रखवाली और साग सब्जी उगाने में लगा है।

करीब 5 हजार हेक्टेयर में है धान की खेती

कृषि विभाग के पास इस मौसम में धान की खेती का रिकॉर्ड उपलब्ध है पर महज 100 हेक्टेयर का है किंतु सरगुजा जिले में लगभग 5000 हेक्टेयर में धान गर्मी वाली धान की खेती किए जाने की संभावना है। शहर के पास स्थित गांव के नदी नालों में ही बड़े पैमाने पर धान की खेती नजर आ रही है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि दूर-दराज में कितने बड़े पैमाने पर धान की खेती हुई होगी।

Posted By: Himanshu Sharma

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

जीतेगा भारत हारेगा कोरोना
जीतेगा भारत हारेगा कोरोना