Ambikapur News : अंबिकापुर। ट्रेन देखने के लिए घर से वह निकल तो जरूर गया, लेकिन चार वर्षों में उसने जिंदगी का कड़ा संघर्ष देखा। इस बीच वह घर लौटने की इच्छा के बावजूद दूसरों की मदद के इंतजार में मेहनत करता रहा। पहले मायानगरी मुंबई और फिर आंध्र प्रदेश के लपोटा गोदावरी में किसी तरह दिन बिताता रहा। आखिरकार कष्ट का यह समय भी दूर हुआ और पुलिस की पहल से वह घरवालों से मिला तो सभी के चेहरे खिल उठे, फिलहाल बालक को क्वारंटाइन सेंटर में शिफ्ट किया गया है।

बचपन में बिछड़ने और परिजनों से मुलाकात की यह कहानी बॉलीवुड की फिल्म से कम नहीं है। पूरे मामले की शुरुआत सूरजपुर जिले के विश्रामपुर रेलवे स्टेशन से होती है। दरअसल बीते 10 मई 2016 को विश्रामपुर के अवराडुग्गू निवासी एक व्यक्ति ने विश्रामपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका 14 वर्षीय पुत्र 9 मई 2016 को मोहल्ले के तालाब में नहाने दोस्तों के साथ गया था। सभी दोस्त वापस आ गए, लेकिन वह घर नहीं आया। रिश्तेदारों, परिचितों से पूछताछ में पता करने पर कोई पता नही चला। विश्रामपुर पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज कर लिया। खोजबीन के नाम पर प्रकरण दबा रहा। परिजन परेशान होते रहे। पुलिस अधीक्षक सूरजपुर राजेश कुकरेजा ने थाना प्रभारियों को लंबित गंभीर अपराधों के निकाल में विशेष रूचि लेने व अपहृत प्रकरण के मामले में हर संभव प्रयास करने के निर्देश दिए तो विश्रामपुर थाने का चार साल पुराना प्रकरण भी बाहर निकला।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर व सीएसपी जेपी भारतेन्दु के मार्गदर्शन में थाने के लंबित गंभीर अपराधों का निकाल करने का मुहिम चलाइ और विगत 4 वर्ष पूर्व 2016 के अपहृत नाबालिक बालक के पतासाजी के लिए नए सिरे से कोशिश शुरू हुई। विज्ञापन के माध्यम से परिजन से बिछड़े बालक जो कि पीठापुरम मल्वपाठगोई, सेंटर रेलवे स्टेशन लपोटा, जिला गोदावरी (आंध्र प्रदेश) में संघर्षपूर्ण जीवन यापन कर रहा था। विश्रामपुर थाना का मोबाइल नंबर मिलने पर वहीं के एक व्यक्ति के मोबाईल फोन से थाना प्रभारी विश्रामपुर से संपर्क कर अपने बारे में बताया। जानकारी से थाना प्रभारी सुभाष कुजूर ने पुलिस अधीक्षक राजेश कुकरेजा को अवगत कराए जाने पर उन्होंने बालक को सकुशल वापस लाने के निर्देश दिए।

थाना प्रभारी विश्रामपुर सुभाष कुजूर ने बालक के परिजन से संपर्क कर लाकडाउन दौरान आंध्र प्रदेश से रायपुर आने वाली स्पेशल ट्रेन में टिकट कराकर बालक का रायपुर तक आने की समझाइश दी। बीते 7 जुलाई 2020 को बालक के रायपुर रेलवे स्टेशन पहुंचने पर थाना विश्रामपुर से टीम को रायपुर भेजकर उसके परिजन के समक्ष बरामद किया गया। अपने बिछड़े बच्चे को वर्षो बाद पाकर परिजनों के चेहरे खिल उठे।

मुंबई के बाद पहुंच गया गोदावरी

बालक ने बताया कि अपने मर्जी से घर से बिना बताए ट्रेन देखने रेलवे स्टेशन विश्रामपुर गया और ट्रेन में चढ़ गया। ट्रेन चलने लगी। भीड़ के कारण उतर नहीं सका और ट्रेन बदलते नागपुर पहुंच गया फिर नागपुर से मुंबई पहुंच गया। मुंबई में दो साल तक मांग-मांग कर और छोटे-मोटे काम कर अपना पेट भरता था, फिर एक दिन परेशान होकर ट्रेन में बैठ गया और आंध्र प्रदेश के पीटापुरम गांव पहुंच गया। वहां करीब दो साल तक छोटे-मोटे काम करके गुजर- बसर करता रहा।

Posted By: Himanshu Sharma

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

Raksha Bandhan 2020
Raksha Bandhan 2020