अंबिकापुर। Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में हाथी प्रभावित क्षेत्र के युवाओं ने हाथियों से बचाव के लिए सोशल मीडिया को बड़ा हथियार बना लिया है। हाथी प्रभावित सरगुजा, सूरजपूर, बलरामपुर, कोरबा, धरमजयगढ़, रायगढ़ व कटघोरा वनमंडल के हाथी प्रभावित क्षेत्र के युवाओं द्वारा तैयार वाट्सएप ग्रुप में वन अधिकारी व कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है। अलग-अलग नाम के वाट्सएप ग्रुप में हाथियों के व्यवहार को लेकर भी सुझावों का आदान-प्रदान होता है। स्वप्रेरणा से ये ग्रुप बनाए गए हैं, जिसमें सभी प्रभावित क्षेत्र के कुछ युवाओं को सभी व्हाट्सअप ग्रुप में शामिल किया गया है, ताकि सही समय पर सही जानकारी एक-दूसरे क्षेत्र में प्रसारित की जा सके। सरगुजा, सूरजपुर और बलरामपुर जिले में ही लगभग 10 वाट्सएप ग्रुप क्रियाशील हैं।

क्षेत्र के पंचायत प्रतिनिधि, व्यवसायी, शासकीय कर्मचारी यहां तक कि हर पारा- टोला से दो -चार लोगों को जोड़ा गया है ताकि समय पर सूचना मिलते ही वे दूसरे लोगों को भी सतर्क कर सके। सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर जिले में ही लगभग ढाई हजार लोगों का मजबूत सूचना तंत्र हाथियों के विचरण को लेकर तैयार हो चुका है। धरमजयगढ़, कोरबा, कटघोरा, कोरिया जिले में भी हाथियों के विचरण और गतिविधियों की जानकारी देने तैयार व्हाटसप ग्रुप में हाथी प्रभावित क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग जुड़े हुए हैं। हाथियों से बचाव की विभागीय कोशिशों से इतर प्रभावित क्षेत्र के लोगों को सतर्क करने में सोशल मीडिया सहारा बना हुआ है।

तत्कालीन सीसीएफ केके बिसेन ने शुरू की थी कोशिश

मजबूत सूचना तंत्र और जनजागरूकता से हाथियों से जानमाल की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल की शुरुवात तत्कालीन सीसीएफ केके बिसेन ने की थी।उन्होंने मीडिया,वन कर्मचारियों के साथ प्रभावित क्षेत्र के लोगों का अलग-अलग ग्रुप बनाकर हाथियों से सुरक्षा और उनके प्रबंधन को लेकर जो प्रयास शुरू किया था उसका सार्थक नतीजा यह निकला कि प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले लोगों ने वन विभाग से समन्वय बनाकर व्हाट्सअप ग्रुप तैयार किए और हाथियों की सही समय पर सही जानकारी पहुंचाने का बीड़ा उठाया।

ये है व्हाट्सअप ग्रुप जिनमे हाथियों के संबंध में मिलती है जानकारी

हाथियों के विचरण को लेकर सूचनाओं के आदान- प्रदान को लेकर तैयार व्हाट्सअप ग्रुप कई नाम से है। सूरजपुर, बलरामपुर जिले में "हाथी विचरण की जानकारी' नाम से कई ग्रुप संचालित है जिन्हें नाम के बाद एक, दो, तीन,चार,पांच आदि से अलग-अलग क्षेत्र के लोगों को जोड़ा गया है। इसी प्रकार हाथी मित्र दल, गजराज मीडिया, वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट, हाथी विचरण, हाथी मेरे साथी आदि नाम से ग्रुप संचालित किया जा रहा है।

यह होता है फायदा

0 एक गांव से दूसरे गांव जाते वक्त लोग ग्रुप के माध्यम से ही हाथियों की मौजूदगी के संबंध में जानकारी प्राप्त करते है।

0 साप्ताहिक बाजार अथवा किसी कस्बे से जंगल किनारे बसाहट के लोगों को शाम ढलने के बाद लौटना होता है तो रास्ते के आसपास हाथियों की मौजूदगी को लेकर जानकारी प्राप्त करते हैं।

0 जंगली रास्तों के आसपास हाथियों के मौजूद रहने पर वन कर्मचारी पहले से ही उक्त रास्तों से आवाजाही न करने लोगों को सजग कर देते हैं।

0 एक गांव के नजदीक खेतों में हाथियों की मौजूदगी पर आसपास के गांवों के लोगों को सतर्क करने पहले ही व्हाटसप में सूचना दे दी जाती है कि हाथी अभी कहां हैं और आगे किधर जा सकते हैं।

0 व्हाट्सअप ग्रुप का मुख्य उद्देश्य जनहानि को रोकना है। प्रभावित लोग क्षति से संबधित जानकारी और फ़ोटो भी शेयर कर देते है ताकि मुआवजा में दिक्कत न हो।

हाथियों के साथ रहना सीखना होगा

सरगुजा वन वृत्त के वन सरंक्षक एसएस कंवर ने कहा कि मजबूत सूचना तंत्र के साथ ग्रामीणों को जागरूक और सतर्क कर हम हाथियों से होने वाली जनहानि को शून्य करने का लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। मुझे इस बात की खुशी है कि हाथी प्रभावित क्षेत्र के लोगों ने स्व प्रेरणा से सोशल मीडिया को हाथियों से बचाव के लिए हथियार बनाया है। हाथियों के लोकेशन के संबंध में सटीक और सही समय पर जानकारी देने में ये ग्रुप मददगार साबित हो रहे हैं। हमे हाथियों के साथ रहने की कला और आदत विकसित करनी होगी।

Posted By: Himanshu Sharma

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