अंबिकापुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। हसदेव अरण्य में कोल ब्लाक के विरोध के बीच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीन प्रस्तावित कोयला खदानों पर रोक लगा दी है। जन भावनाओं को देखते हुए हसदेव अरण्य क्षेत्र के परसा कोल ब्लाक (हरिहरपुर - फतेहपुर), केते एक्सटेंशन तथा पेंडरखी कोल ब्लाक से कोयला खनन की अनुमति नहीं देने की सहमति मुख्यमंत्री ने दी है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से चर्चा के बाद स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने शुक्रवार को अंबिकापुर में पत्रकारों से चर्चा के दौरान यह जानकारी दी। स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने बताया कि परसा ईस्ट केते बासेन(पीईकेबी) कोल ब्लाक से द्वितीय चरण के कोयला उत्खनन के लिए ग्रामीणों में ही एक राय नहीं है। इसलिए वे तटस्थ है। किसी एक का समर्थन करना न्यायसंगत नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री सिंहदेव ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों ,जनप्रतिनिधियों से चर्चा के बाद शुक्रवार को ही उन्होंने प्रस्तावित नई कोयला खदानों को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने सहमति दे दी है कि हसदेव अरण्य के सरगुजा क्षेत्र की तीनों खदानों को नहीं खोला जाएगा। सिंहदेव ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने बातचीत के आधार पर लिए गए निर्णय से स्थानीय मीडिया को भी अवगत कराने की बात कही इसलिए वे इसे साझा कर रहे है।

पेड़ों की हटाई नहीं होगी

मुख्यमंत्री द्वारा तीन प्रस्तावित खदान को नहीं खोलने की सहमति देने के बाद उस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई नहीं होगी। परसा कोल ब्लॉक(फतेहपुर,हरिहरपुर ) को लेकर ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए राजस्थान राज्य ताप विद्युत परियोजना को आबंटित परसा ईस्ट केते बासेन(पीईकेबी) के दूसरे चरण का कार्य आरंभ नहीं हो सका था। पहले चरण का कोयला उत्खनन के बाद काम बंद हो चुका है। इस खदान को लेकर भी ग्रामीण अब विरोध करने लगे थे। पूर्व में आरंभ हो चुके पीईकेबी कोयला खदान के द्वितीय चरण के काम को लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है।

कई लोगों की गई नौकरी

पूर्व से संचालित खदान में काम बंद होने से कई लोगों की नौकरी चली गई है। इसके लिए प्रभावित परिवार उन्हें(टीएस सिंहदेव) को दोषी मानते हैं। इस खदान को लेकर ग्रामीणों की एक राय भी नहीं है। खदान के समर्थन और विरोध दोनों में लोग खड़े हैं। यहां 90 लोगों को मुआवजा मिलना है। इनमें से 30 लोगों ने मुआवजा ले लिया है। खदान का दायरा बढ़ेगा या नहीं इस पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। सिंहदेव ने कहा कि गांव वाले ही जब एक साथ नहीं है तो किसी एक पक्ष के साथ मेरी उपस्थिति भी नहीं है लेकिन उक्त खदान से जो विस्थापित हुए,जिन्होंने मुआवजा लिया,जो पहले नौकरी करते थे ,वे तो चाहेंगे कि खदान का काम आरंभ हो।

गांव वालों की एकजुटता से अमेरा खदान का नहीं हो सका विस्तार

स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने बताया कि एसईसीएल विश्रामपुर क्षेत्र के अमेरा खुली खदान का विस्तारीकरण सिर्फ इसलिए नहीं हो सका कि अमेरा से लगे कटकोना और परसोढ़ी के ग्रामीणों ने खदान न खुलने देने एक साथ रहे।सभी की एक राय थी इसलिए वहां खदान का विस्तार नहीं हो सका।

यह है कोल ब्लाक की स्थिति

परसा कोल ब्लाक: इसके दायरे में फतेहपुर और हरिहरपुर ग्राम आ रहे है। कोल ब्लाक आबंटन के विरुद्ध मार्च महीने से ग्रामीणों का धरना चल रहा है। गांव वालों द्वारा फर्जी ग्राम सभा से अनुमति का आरोप लगाया जाता है। मुख्यमंत्री ने इसी कोल ब्लाक के फारेस्ट क्लीयरेंस को रद करने सहमति दी है।

केते एक्सटेंशन: केंद्र सरकार की कोल ब्लाक आबंटन की सूची में शामिल है। सर्वे की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। जन सुनवाई होना है लेकिन ग्रामीण इस कोल ब्लाक का भी विरोध कर रहे है।

पेंडरखी कोल ब्लाक: केंद्र सरकार के कोल ब्लाक की सूची में शामिल है लेकिन इसकी प्रक्रिया प्रारंभिक चरण में है। सिर्फ सर्वे का काम चल रहा है।

ऐसा नहीं कि संकट की स्थिति उत्‍पन्न हो जाएगी :टीएस

स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जिन तीन कोयला खदानों को अनुमति नहीं देने की सहमति दी है उसमें परसा कोल ब्लाक भी है। इसे आबंटित किया जा चुका है। यह खदान आरंभ नहीं होने से ऐसी स्थिति नहीं बनने वाली है कि राजस्थान में कोयला और बिजली का संकट खड़ा हो जाएगा। हमने भी सारे रिपोर्टस का अध्ययन किया है ।

Posted By: Nai Dunia News Network

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