अंबिकापुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। साउथ ईस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड(एसईसीएल) से मिली वित्तीय सहायता के बावजूद मेडिकल कालेज अस्पताल में मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग स्कैन(एमआरआई) की स्थापना पांच वर्षों में नहीं की जा सकी है। एमआरआई के लिए दो बार निविदा जारी होने के बाद भी कंपनियों ने आपूर्ति में रुचि ही नहीं दिखाई। एमआरआई मशीन खरीदी के लिए छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कार्पोरेशन(सीजीएमएससी)को अधिकृत किया गया है।

मशीन के खराब होने की स्थिति में निर्माता कंपनी को काली सूची में दर्ज करने की शर्त ने कंपनियों के हाथ खींच लिए हैं।छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कार्पोरेशन के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद लुंड्रा विधायक डा प्रीतम राम को जब इस बात की जानकारी मिली तो उन्होंने सीजीएमसी के अधिकारियो को नियम शर्तो को सरलीकृत किए जाने का निर्देश दिया है ताकि मेडिकल कालेज अस्पताल में भी एमआरआई की स्थापना हो सके और अंचल के लोगों को इसका लाभ रियायती दर पर मिल सके।अब नए सिरे से निविदा प्रक्रिया जारी करने की तैयारी चल रही है।एमआरआई की आवश्यकता मेडिकल कालेज अस्पताल को लंबे समय से है लेकिन खरीदी का मामला अधर में लटक गया है।

एसईसीएल से वित्तीय सहायता

वर्ष 2017-18 में एसईसीएल द्वारा सीएसआर मद से मेडिकल कालेज अंबिकापुर में सिटी स्कैन और एमआरआई के लिए 12 लाख रुपये स्वीकृत किये गए है।सिटी स्कैन की खरीदी के बाद एसईसीएल द्वारा लगभग पांच करोड़ का भुगतान किया गया है।शेष राशि सुरक्षित है।अस्पताल में एमआरआई मशीन की स्थापना के बाद संबंधित कंपनी को एसईसीएल की ओर से राशि जारी कर दी जाएगी।

बढ़ानी पड़ी है समयावधि

वर्ष 2020 तक एमआरआई मशीन की ख़रीदी कर लेनी चाहिए थी।एसईसीएल ने तीन वर्षों के लिए ही राशि स्वीकृत किया था।समयावधि व्यतीत हो जाने के बाद एसईसीएल की ओर से राशि नहीं मिल सकती थी लेकिन तत्कालीन कलेक्टर संजीव झा ने एसईसीएल से पत्राचार कर स्वीकृत आदेश की समयावधि को बढ़वाया है।इस साल किसी भी स्थिति में मशीन खरीद लेना है।अन्यथा एसईसीएल से वित्तीय सहायता नहीं मिलेगी।

दो बार निविदा हो चुकी निरस्त

मेडिकल कालेज अस्पताल अंबिकापुर में एमआरआई मशीन स्थापना के लिए सीजीएमएससी द्वारा दो बार निविदा जारी की जा चुकी है। पहली बार निविदा में एक भी एमएफआई मशीन निर्माता कंपनी ने रुचि नहीं लिया। दूसरी बार सिर्फ एक कंपनी का आवेदन प्राप्त होने के कारण इसे भी निरस्त करना पड़ा। एमआरआई मशीन खरीदी के लिए निर्धारित शर्तों को ही इस परिस्थिति के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। मशीन में खराबी आने पर कंपनी को सीधे काली सूची में दर्ज करने की शर्त ने निर्माता कंपनियों को अंबिकापुर मेडिकल कालेज में एमआरआई मशीन स्थापना से दूर रखा है।

क्या है एमआरआई

एमआरआई का मतलब है मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग स्कैन, जिसमें आम तौर पर 15 से 90 मिनट तक लगते है।ये इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर का कौन सा, कितना बड़ा हिस्सा स्कैन किया जाना।.कितनी तस्वीरें ली जानी हैं।ये रेडिएशन के बजाए मैग्नेटिक फील्ड पर काम करता है।इसलिए एक्स रे और सीटी स्कैन से अलग है।पूरे शरीर में जहां जहां हाइड्रोजन होता है, उसके स्पिन यानी घूमने से एक इमेज बनती है।शरीर में 70 फीसदी पानी होता है, इसलिए हाइड्रोजन स्पिन के माध्यम से बने इमेज से शरीर की काफी दिक्कतों का पता लगाया जा सकता है ये पता लगाया जाता है कि शरीर के उन हिस्सों में कोई दिक्कत तो नहीं है।

काली सूची में दर्ज करने की शर्त विलोपित करने का निर्देश

मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन के अध्यक्ष व लुंड्रा विधायक डा प्रीतम राम ने बताया कि मेडिकल कालेज अंबिकापुर में एमआरआई मशीन स्थापना के लिए निविदा में शामिल जटिल शर्तों को शिथिल करने अधिकारियों से कहा गया है। उन्होंने कहां के कंपनी को काली सूची में शामिल करने की शर्त के कारण ही कंपनी निविदा शामिल नहीं हो रहे हैं। यह एक ऐसी शर्त है जिससे मशीन निर्माता कंपनियों को ना सिर्फ बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है बल्कि उनकी साख पर भी विपरीत असर पड़ता है।

अंबिकापुर शहर के कई निजी चिकित्सा संस्थानों में एमआरआई मशीन संचालित है इसलिए हमने अधिकारियों से कहा है कि तकनीकी खराबी पर मेंटेनेंस और वारंटी का मानक तय कर निविदा जारी की जाए ताकि जल्दी से जल्दी अंबिकापुर मेडिकल कालेज में भी एमआरआई मशीन की स्थापना हो सके। हमारी पूरी कोशिश है कि अंचल के लोगों को शासकीय व्यवस्था के तहत एमआरआई की सुविधा मेडिकल कालेज अस्पताल अंबिकापुर में मिल सके।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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