अंबिकापुर। नगर के चंबोथी तालाब सामुदायिक भवन में उस समय वर और वधु पक्ष सकते में आ गए जब कन्यादान की बारी आने पर वधु ने शादी करने से इंकार कर दिया। देर रात तक लड़की को समझाने की कोशिश परिजन करते रहे लेकिन बात नहीं बनी और वर पक्ष को बिना दुल्हन के वापस लौटना पड़ा।

बेटी के हाथ पीले करने लाखों रुपये खर्च करके की गई तैयारियां भी इन परिस्थितियों में धरी रह गई। छेका, तिलक, मंडप, हल्दी की रस्म के बाद विवाह की शुभ घड़ी आई थी। मेहमानों से सामुदायिक भवन पटा था। द्वारचार सहित अन्य रस्म भी निर्विघ्न सम्पन्न हो गई।

कन्यादान के साथ वर-वधू को आशीर्वाद देने के लिए लोग आतुर थे। दुल्हन के वेष में युवती अपने होने वाले जीवन साथी के करीब खड़ी थी। कन्यादान रस्म के लिए पंडित ने जैसे ही मंत्रोच्चार प्रारंभ किया, दुल्हन के तेवर बदल गए। उसने शादी से इंकार कर दिया। इससे बाराती और घराती सकते में आ गए।

दूल्हे के पिता ने बेटी को समझाते हुए परिवार की लाज रखने की समझाइश दी लेकिन वह नहीं मानी। मंगलवार को कोतवाली में भी इसे लेकर गहमागहमी बनी रही। लड़की पक्ष भी उसकी इस हरकत से इतना नाखुश रहा कि शादी के जोड़े में बेटी को महिलाओं के लिए बने स्वधार गृह के सुपुर्द कर दिया।

Posted By: Hemant Upadhyay