अंबिकापुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। स्वरोजगार के साथ प्लास्टिक के डिस्पोजल का उपयोग कम करने शहर में महिलाओं ने दो वर्ष पूर्व ही दीदी बर्तन बैंक के नाम से अभियान छेड़ दिया था। इस अभियान से शहर में किसी भी समारोह में प्लास्टिक के डिस्पोजल प्लेट, गिलास, कटोरी को कम करने में बड़ा साथ मिला है। दीदी बर्तन बैंक के नाम से महिलाओं की एक समूह ने शहर में काम शुरू किया जिससे अच्छी आर्थिक आय होने लगी तो देखते ही देखते अब पांच महिला समूहों ने यह काम शुरू कर दिया है। इन महिलाओं के द्वारा स्टील के न सिर्फ प्लेट, गिलास, कटोरी, जग बल्कि भोजन बनाने के बड़े-बड़े बर्तन भी उपलब्ध कराए जाते हैं। इससे महिलाओं को आर्थिक आय का अच्छा जरिया मिल गया है वहीं प्लास्टिक के डिस्पोजल के उपयोग में शहर ने अनूठा काम शुरू कर दिया है।

गौरतलब है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत वर्ष सिंगल यूज प्लास्टिक को लेकर देश के लोगों को अपील की और शासन, प्रशासन ने भी इस पर सख्ती से काम करना शुरू किया है। इन सबसे अलग अंबिकापुर शहर में पहले ही सिंगल यूज प्लास्टिक को दरकिनार करने यहां की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने अभियान चला दिया था। राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत महिला समूह को 50 हजार रुपये रिवाल्विंग फंड मिला और इस राशि के अलावे आपस में उधार लेकर महिलाओं ने एक लाख रुपये जमा किया और शुरू हुआ शहर में दीदी बर्तन बैंक का काम। चंद बर्तनों से महिलाओं ने काम शुरू किया तो इसका अच्छा प्रतिसाद भी मिलने लगा। आसपास होने वाले समारोहों के लिए लोग इन महिलाओं से ही स्टील के बर्तन किराए से लेने लगे। एक समूह की देखादेखी शहर में तीन समूहों ने यह काम शुरू कर दिया। काम चल निकला तो अब शहर में पांच समूह इस काम को कर रहे हैं। प्लास्टिक के खिलाफ देश में चल रहे अभियान के तहत कहीं कपड़े के झोले के उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है, तो कहीं कागज के बने पैकेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन सबसे अलग अंबिकापुर में बर्तन के यूज को प्राथमिकता दी जा रही है। खास बात यह है कि इन्होंने समारोहों में इस्तेमाल होने वाली डिस्पोजल की जगह बर्तन के उपयोग का सिलसिला दो वर्ष पूर्व ही शुरू हो चुका था।

'दीदी बर्तन बैंक' सार्थक परिणाम

'बर्तन बैंक' का मॉडल अंबिकापुर नगर निगम लेकर आया तो शुरुआत में ऐसा लगा कि यह सफल नहीं होगा पर इसका सार्थक परिणाम दिखने लगा है। शादी पार्टियों में प्लास्टिक डिस्पोजल के उपयोग को बंद करने के लिए बर्तन की व्यवस्था की गई। इस योजना का शुभारंभ सितंबर 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने किया था, लेकिन बर्तन बैंक का काम 2017 में ही शुरू हो चुका था।

हर मोहल्ले में फ्रेंचाईजी

अंबिकापुर से शुरू की गई यह योजना धीरे-धीरे अब कई शहरों में भी शुरू की गई है। यह योजना प्लास्टिक के उपयोग को रोकने की मुहिम में कारगार साबित हो रही है। अंबिकापुर में स्वयं सहायता समूह की महिलाएं 'दीदी बर्तन बैंक' संचालित करती हैं। नगर निगम क्षेत्र में पांच बर्तन बैंक खोले गए हैं। वहीं इन बैंकों के अधीन शहर के हर मोहल्ले में फ्रेंचाइजी दी गई है, जिसके माध्यम से बर्तन बैंक से लोग किराए पर बर्तन ले पाते हैं।

चौबीस घंटे का आठ रुपये प्रति सेट किराया

नगर निगम के स्वच्छता कार्य देख रहे प्रोग्रामर रितेश सैनी के मुताबिक बर्तन बैंक से बर्तन के एक सेट में एक थाली, तीन कटोरी, एक गिलास और एक चम्मच के सेट का किराया आठ रुपये तय किया गया है। यह कीमत 24 घंटे के लिए तय की जाती है। अप्रैल 2018 से दिसंबर 2018 तक बर्तन बैंक ने इससे दो लाख 94 हजार 960 रुपये कमाए हैं। जिसे पर्यावरण संरक्षण के साथ इसमें काम करने वाले कर्मचारियों पर खर्च किया जाता है। बर्तन बैंक की योजना न सिर्फ प्लास्टिक के खिलाफ एक मुहिम साबित हुई है, बल्कि महिलाओं के लिए रोजगार का साधन भी बन गया है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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