नईदुनिया विशेष

अंबिकापुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

मानसून की बेरुखी से जिले के किसान तो चिंतित हैं ही अब वन विभाग भी चिंतित होने लगा है क्योंकि जिले में आठ लाख पौधारोपण का लक्ष्य इस बार रखा गया है। यदि 15 से 20 दिन पौधारोपण के बाद बारिश नहीं हुई तो पौधों की जीवित रहने को लेकर संशय की स्थिति निर्मित हो जाएगी। छोटे पौधों के लिए ऐसा मौसम ज्यादा खतरनाक है क्योंकि पॉलीथिन के पैक में जितनी मिट्टी रहती है यदि सूख गई तो पौधों को बचा पाना मुश्किल होगा। जिले के कई इलाकों में पौधारोपण तेजी से चल रहा है। जुलाई माह के अंत तक सभी पौधे लगा दिए जाने की बात कही जा रही है किन्तु मानसून का यही हाल रहा तो पौधों को नुकसान पहुंच सकता है।

सरगुजा जिले में मानसून के सक्रिय न होने से एवं अभी से ही खंड वर्षा ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। धान की बोवाई होने के बाद बारिश न होने के कारण जहां धान के पौधे पीले पड़ रहे हैं वहीं धान की नर्सरी खराब हो रही है। रोपाई प्रभावित हो रही है। फसलों के साथ अब एक और बड़ा संकट पौधारोपण अभियान पर पड़ सकता है। वन विभाग ने इस बार करीब आठ लाख पौधारोपण का लक्ष्य रखा है। मानसून के शुरुआती दौर से ही अलग-अलग इलाकों में पौधारोपण किया जा रहा है किन्तु बारिश न होने से इन पौधों पर खतरा मंडराने लगा है। हालांकि वन विभाग ने निर्धारित स्थानों पर 60 प्रतिशत से अधिक पौधों का रोपण कर लिया है। वन महोत्सव के लिए कुछ बड़े इलाकों में हजार-दो हजार पौधों का रोपण सामूहिक रुप से जनप्रतिनिधि एवं आमजनों के द्वारा कराए जाने के लिए रोका गया है। विभाग का दावा है कि जुलाई माह के अंत तक पौधारोपण का लक्ष्य पूरा हो जाएगा।

मैनपाट में दो लाख का लक्ष्य, 1.60 लाख रोपित

मैनपाट में इस बार दो लाख पौधों के रोपण का लक्ष्य रखा गया था। अब तक एक लाख 60 हजार पौधों का रोपण किया जा चुका है। 40 हजार पौधों का रोपण करना शेष है। डीएफओ प्रियंका पाण्डेय ने बताया कि मैनपाट में हर रोज बारिश की फुहारें पड़ जाती हैं इस कारण यहां पौधारोपण के बाद किसी तरह की परेशानी उत्पन्न नहीं हो रही है। लगाए गए सभी पौधें स्वस्थ हैं। शेष 40 हजार पौधों का रोपण भी जल्द करा दिया जाएगा।

गाड़ाघाट में 37 हजार पौधों का हुआ रोपण-

शहर से लगे ग्राम पंचायत खैरबार के गाड़ाघाट में आक्सीजोन इलाका विकसित करने एवं वनभूमि को अतिक्रमण से बचाने इस बार 40 हजार से अधिक पौधों का रोपण किए जाने का लक्ष्य रखा गया था, जहां लगभग 37 हजार पौधों का रोपण किया जा चुका है। यहां भव्य वन महोत्सव मनाए जाने की तैयारी है। प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री टीएस सिंहदेव की उपस्थिति में इसी हफ्ते वन महोत्सव मनाया जाएगा। यहां करीब तीन हजार पौधे एक साथ रोपे जाएंगे। इसके अलावा सरगुजा विश्वविद्यालय क्षेत्र भकुरा में भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा चुका है। यहां करीब दो हजार पौधे वन महोत्सव के दिन लगाए जाने शेष है।

इस बार नहीं नीलगिरी का पौधा

नीलगिरी के पौधे को लेकर लगातार कई तरह की बातें वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सामने आ रही हैं, ऐसे में इस बार राज्य स्तर से भी नीलगिरी व क्लोनल के पौधे का टेंडर नहीं हुआ। सरगुजा में इसके करीब दो लाख पौधे लगाने का लक्ष्य था किन्तु शासन स्तर से इसका टेंडर न होने के कारण इस बार जिले में नीलगिरी का पौधा कहीं भी रोपित नहीं किया गया है।

मानसून कमजोर,लगाए पौध अभी जीवित- प्रियंका

सरगुजा डीएफओ प्रियंका पाण्डेय ने कहा कि मानसून निश्चित रुप से कमजोर लग रहा है। पौधारोपण के बाद बारिश की हल्की फुहार भी दो-चार दिनों के भीतर आ जाए तो पौधे जीवित व स्वस्थ रह सकते हैं। जिले में लगे पौध अब तक जीवित हैं। उन्होंने कहा कि यह जरुर है कि यदि पौधारोपण के बाद 15 से 20 दिन तक बारिश ही न हो तो पौधों के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है। खासकर छोटे पौधे प्रभावित हो सकते हैं। हमारा लक्ष्य आठ लाख पौधारोपण का है। हम इस माह के अंत तक आसानी से यह लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।