अंबिकापुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। उत्तरी छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में मौसम का मिजाज चक्रवात के कारण बदल चुका है। दो दिनों से आसमान में बादल और रिमझिम बारिश रूक-रूककर हो रही थी। सोमवार की शाम पूरे संभाग में अच्छी बारिश हुई, तेज हवा भी चली। मंगलवार की सुबह से आसमान में बादल छाए रहे और तेज हवा के साथ हुई तेज बारिश ने वातावरण में नमी ला दी है। वर्तमान स्थानीय मौसमी व्यवधान 24 घंटे बाद ही कमजोर पड़ने की संभावना है। गुलाबी ठंड की दस्तक के बीच हुई इस बारिश ने मौसम खुलते ही संभाग में कड़ाके की ठंड को निमंत्रण दे दिया है। उधर किसान भी खेतों में पके धान की फसल को देख परेशान हैं। कई किसान धान की कटाई भी शुरू कर चुके हैं। ऐसे में धान की फसल भी प्रभावित होने की संभावना है। हालांकि रबी की खेती के लिए यह बारिश अच्छी है। मौसम विज्ञानी एएम भट्ट के मुताबिक इस समय बिहार तथा उसके नजदीकी क्षेत्रों में समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई स्तर का एक चक्रवातीय परिसंचरण प्रभावी है। उत्तर प्रदेश के मध्य भाग में समुद्र तल से 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई का दूसरा चक्रवाती घेरा भी सक्रिय है। पंजाब और उसके नजदीकी क्षेत्र में भी पश्चिमी विक्षोभ प्रभावी होने के साथ उत्तर प्रदेश से बिहार तक द्रोणिका निर्मित है। दक्षिण भारत से भी मध्य भारत की ओर नमी आ रही है। इन सभी कारणों से उत्तर छत्तीसगढ़ के मौसम में बदलाव आया है। अंबिकापुर शहर में आठ मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। यह मौसम 24 घंटे के बाद ही बदलेगा।

तापमान में भी आई गिरावट-

लगातार बूंदाबांदी और बादल के छाए रहने से तापमान में भी गिरावट आ गई है। मंगलवार को अधिकतम तापमान 29 डिग्री व न्यूनतम 17 डिग्री दर्ज किया गया था। दो-तीन दिन लगातार न्यूनतम तापमान 20 से 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया जा रहा था। मौसम साफ होने के बाद तापमान में तीन से चार डिग्री और गिरावट आएगी।

रूककर करें धान कटाई व आलू लगाने का काम-

वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डा.संदीप शर्मा ने बताया कि किसानों को एक-दो दिन रूककर ही धान की कटाई व लगाने का काम करना चाहिए। आलू लगाने से बारिश में सड़ने की संभावना रहती है। पकी हुई धान की फसल काटकर जमीन पर रखने से दाने खराब होते हैं। एक-दो दिन में मौसम साफ होने के बाद ही धान कटाई व आलू लगाने का काम करें।

Posted By: Nai Dunia News Network

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