असीम सेनगुप्ता

अंबिकापुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। मानव की तरह जंगली हाथियों को भी अलग-अलग खाद्य पदार्थों का स्वाद पसंद आता है। खरीफ खेती के इस सीजन में हाथियों का जंगल छोड़कर रिहायशी क्षेत्रों में पहुंचने का कारण भी यही है। उत्तर छत्तीसगढ़ में इन दिनों धान की बालियों में दूध भर आए हैं।इसे मिल्किंग स्टेज यानी दूध भरने की अवस्था कहा जाता है। धान में ये अवस्था बहुत महत्वपूर्ण है। इस समय कीटों का प्रकोप बढ़ता है पर यहां हाथी इसे चूस रहे हैं,क्योंकि इसमें मीठापन है और कोमल होने के कारण यह गले में गड़ता नहीं है।इसके अलावा मक्का, सब्जी वर्गीय फसलों के साथ गन्नो में भी रस भर आया है।

इन खाद्य सामग्री का स्वाद चखने जंगल छोड़ कर हाथियों का दल रिहायशी क्षेत्रों के समीप पहुंच रहा है। धान की बालियों, गन्नो को सूंड़ से लपेट रस पीने वाले हाथियों की चहल - कदमी प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों के साथ वन कर्मचारियों के लिए चिंता का कारण बन चुकी है।वन विभाग जनहानि रोकने के प्रयास में लगा है तो प्रभावित क्षेत्र के लोग फसलों की सुरक्षा नहीं होने से व्यथित है।वन विभाग क्षति के अनुरूप मुआवजा देने का भरोसा देकर ग्रामीणों को सतर्क करने में लगा है। जंगल में एक ही प्रकार का आहार होने के कारण हाथियों का दल खरीफ सीजन में पसंदीदा भोजन का स्वाद लेने प्रति वर्ष खरीफ सीजन में जंगल छोड़ देता है।

कुल 339 हाथियों में सिर्फ 90 हाथी अभयारण्य क्षेत्र में

छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 339 जंगली हाथी हैं।इनमें से सिर्फ 90 हाथी अभयारण्य क्षेत्र और टाइगर रिजर्व में है।शेष सभी हाथी रिहायशी क्षेत्रों के समीप आ गए हैं।एलीफैंट रिजर्व सरगुजा के तमोर पिंगला अभयारण्य में 48 जंगली हाथी हैं ,इनमें से भी 36 हाथी गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान से आए हैं जो मध्यप्रदेश के सीधी,शहडोल ,अनूपपुर तक आते-जाते रहते है।जशपुर जिले के बादलखोल अभयारण्य में सिर्फ नौ तथा दक्षिण छत्तीसगढ़ के उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व के 33 हाथियों को छोड़ दे तो 249 हाथी गांवों,कस्बों के किनारे आ चुके हैं।

बेहद संवेदनशील और स्वाद पसंद होते हैं हाथी : अमलेंदु

छत्तीसगढ़ वन्यजीव बोर्ड के सदस्य अमलेंदु मिश्र का कहना है कि हाथी सामाजिक प्राणी होता है। बेहद संवेदनशील और स्वाद पसंद होने के कारण हमेशा यह एक समान आहार पसंद नहीं करते हैं। खरीफ के सीजन में रिहायशी क्षेत्रों के नजदीक उन्हें पसंदीदा खाद्य सामग्री मिलती है।लंबे समय तक जंगली हाथियों के प्रबंधन कार्य से जुड़े रहने के कारण मेरा अनुभव बताता है कि इस सीजन में हाथी जंगल में रहना पसंद नहीं करते हैं। बस्तियों के नजदीक उन्हें अलग अलग स्वाद की खाद्य सामग्रियां मिल जाती है इसलिए वे जंगल छोड़ रिहायशी इलाकों के नजदीक विचरण करने लगते हैं।

छत्तीसगढ़ में कहां कितने हाथी

0 एलीफैंट रिजर्व सरगुजा- 57

0बलरामपुर वनमंडल -44

0जशपुर वनमंडल- 40

0सरगुजा वनमंडल-10

0सूरजपुर वनमंडल-03

0धरमजयगढ़ वनमंडल-82

0कटघोरा वनमंडल-41

0रायगढ़ वनमंडल-18

0 कांकेर वनमंडल-01

0 धमतरी वनमंडल-04

0 उदंती सीतानदी-33

0महासमुंद वनमंडल-03

0बलौदाबाजार -03

खरीफ की खेती के दौरान जंगली हाथियों का रिहायशी क्षेत्रों के नजदीक विचरण स्वाभाविक है।सरगुजा वनवृत्त में सेवाकाल के दौरान मैंने इसे अनुभव किया है।आहार के लिए ही हाथी आते हैं।हमारी कोशिश होनी चाहिए कि ग्रामीणों को समझाए की उन्हें फसल क्षति का सर्वाधिक मुआवजा मिलेगा।फसल बचाने वे खेतों से हाथियों को खदेड़ने न जाए। जनजागृति से ही हम हाथियों से होने वाली जनहानि को रोक सकते हैं।

केके बिसेन सेवानिवृत्त वन संरक्षक छत्तीसगढ़

सदस्य,एलीफैंट प्रोजेक्ट वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार

Posted By: Yogeshwar Sharma

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