अंबिकापुर(नईदुनिया न्यू)। सरगुजा जिले के मैनपाट वन परिक्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत कंडराजा के आश्रित ग्राम बाव पहाड़ में कोरवाओं की बस्ती में जंगली हाथियों ने जमकर कहर बरपाया है। 15 हाथियों के दल ने शनिवार की रात यहां आठ झोपड़ी और कच्चे मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया।इन्हीं झोपड़ियों और कच्चे मकानों में पहाड़ी कोरवा अपने बाल- बच्चों के साथ निवास करते थे। भरी बरसात में आशियाना छिन जाने के बाद हाथी प्रभावितों के समक्ष नई समस्या उत्पन्ना हो गई है। प्रशासन अथवा वन विभाग की ओर से अभी तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जा सकी है प्रभावितों में तीन यादव परिवार के लोग भी शामिल हैं।

बता दें कि सरगुजा जिले के मैनपाट और रायगढ़ जिले के कापू वन परीक्षेत्र की सीमा में 15 हाथियों का दल पिछले दो महीने से जमा हुआ है। हाथी बीच-बीच में जंगल से आबादी क्षेत्रों की ओर प्रवेश कर जाते हैं। शनिवार की रात 15 हाथियों का दल हाथी प्रभावित ग्राम कण्डराजा के बाव पहाड़ इलाके में पहुंच गया। यहां कोरवाओं की बस्ती है। हाथियों के आने की भनक लगते ही पहाड़ी कोरवा जान बचाकर भाग निकले। रात के अंधेरे में छोटे-छोटे बच्चे और महिलाओं को लेकर सभी सुरक्षित स्थानों पर चले गए थे। सुबह जब वह वापस लौटे तो बस्ती का नजारा बदला हुआ था। जिन झोपड़ियों और कच्चे मकानों में वे निवास करते थे। उन सभी को हाथियों ने तहस-नहस कर दिया था।हाथियों ने घर में रखे अनाज भी खाए और दैनिक उपयोग के जरूरी सामानों को भी नष्ट कर दिया। सारे बर्तन क्षतिग्रस्त कर दिए। कोरवाओं के पास अब खाने पीने के लिए भी कुछ नहीं बचा है। रविवार पूरे दिन बारिश के दौरान प्रभावित परिवार के सदस्य परेशान होते रहे। शासकीय अवकाश का दिन होने के कारण भी इन्हें कोई सरकारी मदद भी नहीं मिल सकी है।बताते चलें कि कण्डराजा हाथियों का विचरण क्षेत्र है। पूर्व के वर्षों में इस बस्ती के अधिकांश घरों को हाथियों ने उजाड़ दिया था। उस दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रभावित परिवारों के लिए आवास स्वीकृत किए गए थे। अलग से राशि का प्रावधान कर हाथी प्रभावितों के लिए सुरक्षित कालोनी का निर्माण किया गया था जिसे हाथी प्रभावित कालोनी के नाम से जाना जाता है। इस कालोनी के अगल-बगल तक हाथी आते रहे हैं कच्चे मकानों को हाथियों द्वारा लगातार निशाना बनाया जाता है।

अब सिर छिपाने की जगह नहीं बची

हाथियों ने मंगल, सांझू कोरवा,बुद्धू, बिहानी पहाड़ी कोरवा के अलावा बालेश्वर यादव, रामचंद्र यादव और शिव प्रसाद यादव की झोपड़ियों और कच्चे मकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया है। अब इन प्रभावित परिवारों के समक्ष सिर छिपाने की जगह भी नहीं है।रविवार अवकाश का दिन होने के कारण अधिकारी भी मौके पर नहीं पहुंचे हैं। अब उम्मीद की जा रही है कि सोमवार को प्रभावित परिवारों के लिए आंगनबाड़ी अथवा किसी सरकारी स्कूल में वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी, इन्हें आवास और भोजन दोनों की जरूरत है।यदि तत्काल मदद नहीं मिली तो बरसात में भरण- पोषण की समस्या उतपन्ना हो जाएगी।

अधिकारी रुके थे लेकिन नहीं गए प्रभावित क्षेत्र में

शनिवार की रात सरगुजा संभाग के वन विभाग के आलाधिकारियों के अलावा जिला स्तर के अधिकारी भी मैनपाट में ही रुके थे।सुबह जंगली हाथियों द्वारा नुकसान पहुंचाए जाने की खबर वन कर्मचारियों के माध्यम से अधिकारियों तक पहुंच चुकी थी।प्रभावितों को उम्मीद थी कि अधिकारी क्षेत्र के भ्रमण पर आएंगे और जरूर कुछ मदद पहुंचाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका। प्रभावित परिवारों की किसी ने भी सुध नहीं ली।

ग्रामीणों की जिद पड़ रही भारी

सरगुजा जिले के लखनपुर और मैनपाट वन परिक्षेत्र के कई ऐसे दूरस्थ बसाहट है जहां साल ,दो साल में जंगली हाथियों का आना- जाना लगा रहता है।जंगली हाथी जब भी आते हैं घरों को तोड़फोड़ करने के साथ भारी नुकसान पहुंचाते हैं। कई दिनों तक प्रभावित परिवारों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता है। वन विभाग की ओर से प्रभावित परिवारों को जंगल से निकलकर बस्ती के बीचों- बीच अथवा सुरक्षित स्थान पर मकान बनाकर रहने की समझाइश दी जाती है लेकिन ग्रामीण भी वर्षों से काबिज जमीन को छोड़ने तैयार नहीं होते।ग्रामीणों की जिद के आगे हर बार नुकसान झेलना पड़ता है और वन विभाग को मुआवजा राशि देनी पड़ती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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