अंबिकापुर।Employment Opportunities: लॉकडाउन ने कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने की प्रेरणा तो दी ही है, साथ ही हर किसी को एक नया अनुभव भी दिया है। सकारात्मक सोच के साथ न सिर्फ विभाग बल्कि समाज व राष्ट्र के विकास के लिए पूरी तरह समर्पित आइजी रतनलाल डांगी ने कोरोना संकट से उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनजर सोशल मीडिया से ऐसा सुझाव दिया है जो आने वाले समय में स्थानीय स्तर पर रोजगार और कला, संस्कृति, सभ्यता को जीवित रखने में मददगार साबित होगा। आइजी रतन लाल डांगी का कहना है कि कोरोना संकट ने हमें बहुत कुछ नया सीखा दिया है। वर्तमान समय में दूसरे राज्यों में कामकाज की तलाश में गए छत्तीसगढ़ के मजदूरों की वापसी हो रही है।

छत्तीसगढ़ से भी दूसरे प्रांतों के मजदूरों को वापस भेजा जा रहा है। छत्तीसगढ़ में पहुंचने वाले प्रवासी श्रमिकों को क्वारंटाइन सेंटर में रखा जा रहा है, जहां उनका नाम, पता और मोबाइल नंबर अंकित किया जा रहा है। इस जानकारी के साथ यदि हम सभी श्रमिकों की कार्यकुशलता और दक्षता की जानकारी भी एकत्रित कर ले तो आने वाले समय में अपने-अपने राज्यों में ही कुशल, अकुशल और अर्ध कुशल श्रेणी में मजदूरों को रोजगार मिल जाएगा। उद्योगों के संचालन में दित नहीं आएगी।

संकट की घड़ी को हम आसानी से दूर कर सकेंगे, इसके लिए उद्योग व श्रम विभाग के माध्यम से पहल करने की आवश्यकता जताते हुए उन्होंने कहा कि रोजी-रोटी की तलाश में सैकड़ों हजारों किलोमीटर दूर जाने वाले श्रमिक परिवार की परेशानी लॉकडाउन के दौरान हम सभी ने देखी। आइजी का मानना है कि कामकाज की तलाश में अपना घर, गांव छोड़कर दूसरे प्रदेशों में जाने वाला मजदूर मेहनतकश हाथों से देश की तरी में तो योगदान देता है, लेकिन भविष्य के लिए कई समस्याएं भी खड़ी करता है। जहां वह काम में जाता है, वहां जाने से अपनी सभ्यता, संस्कृति से दूर हो हो जाता है। बच्चे शिक्षा ग्रहण करते भी हैं, तो उसका समुचित लाभ नजर नहीं आता।

यदि छत्तीसगढ़ का मजदूर किसी दूसरे राज्य में काम के लिए गया है तो वहां की शिक्षा व्यवस्था से जुड़कर कुछ महीनों बाद वापस आ जाने के कारण श्रमिक परिवार का बच्चा न तो छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ पाता है और न ही किसी दूसरे राज्य में उसकी शिक्षा पूरी हो पाती है। इस कठिन परिस्थिति से निपटने के लिए जरूरी है कि बाहर से आने वाले श्रमिकों के नाम के साथ उनके हुनर को भी सूची में अंकित किया जाए ताकि लॉकडाउन के बाद छत्तीसगढ़ में ही उन्हें उनकी कार्यकुशलता के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों में काम मिल सके।

ऐसा हुआ तो उद्योग धंधे, निर्माण, कल कारखानों में बाहरी मजदूरों की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यही व्यवस्था दूसरे राज्यों में हो जाए तो सभी श्रमिकों को अपने-अपने राज्य में ही बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध हो जाएंगे। पलायन की स्थिति से बचा जा सकेगा। भविष्य में ऐसा कोई संकट आने की स्थिति में जो परेशानी अभी नजर आ रही है, वह नहीं दिखेगी।

हर क्षेत्र में हुनरमंद है यहां के श्रमिक

आइजी का कहना है कि यदि छत्तीसगढ़ का कोई श्रमिक दूसरे राज्य में जाकर कल कारखाना निर्माण कार्य, आटोमोबाइल, होटल, ढाबा, दुकान, ईंट भट्ठा में कार्य करता है, तो वही काम छत्तीसगढ़ में भी उन्हें मिल सकता है। संबंधित श्रमिक परिवारों की महिला सदस्यों को भी मनरेगा के तहत कार्य से जोड़ा जा सकता है। बच्चों की पढ़ाई स्थानीय सभ्यता, संस्कृति के अनुरूप यही के स्कूलों में की जा सकती है। आइजी का कहना है कि दूसरे राज्यों में जाकर काम करने के दौरान सभ्यता, संस्कृति भाषा में आने वाली विभिन्नता से भी बचा जा सकता है।

पलायन से भी बचा जा सकेगा

आइजी का कहना है कि लॉकडाउन समाप्त होने के बाद परिस्थितियां सामान्य होने में वक्त लगेगा। कठिन परिस्थितियों से जूझ कर एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश जाने वाले श्रमिक तत्काल अपने कार्य क्षेत्र में वापस लौटने से पहले कई बार सोचेंगे। ऐसी विपरीत परिस्थिति में कल कारखानों, निर्माण कार्य, उद्योग धंधों के समक्ष मजदूरों की समस्या उत्पन्न हो सकती है, लेकिन यदि छत्तीसगढ़ के अलावा सभी राज्यों में प्रवासी मजदूरों की कार्यकुशलता और हुनर की जानकारी संग्रहित कर ली जाए तो अपने-अपने राज्यों में ही रोजगार के अवसर मिल जाएंगे। मंदी की परिस्थितियों से भी आसानी से निकला जा सकेगा। भविष्य की कठिन परिस्थितियों से भी आसानी से हम लड़ सकेंगे। राज्य और केंद्र सरकार को भी प्रवासी मजदूरों की सकुशल अपने घर, गांव वापसी को लेकर मशत नहीं करनी पड़ेगी।

लगातार कर रहे प्रोत्साहित

आइजी रतनलाल डांगी कोरोना संकट की घड़ी में सभी की हौसला अफजाई में लगे हुए हैं। छत्तीसगढ़ के वे पहले आइपीएस अफसर हैं, जिन्होंने संकट की घड़ी में अपने और परिवार की चिंता किए बगैर दिन रात ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए नकद राशि देकर सम्मानित करने में लगे हुए हैं। उनकी प्रेरणा से सरगुजा पुलिस रेंज के अधिकारियों कर्मचारियों में भी नए उत्साह का संचार हुआ है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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