बैकुंठपुर । नईदुनिया न्यूज

नये वर्ष के दूसरे दिन हुई बारिश के बाद तापमान में जहां गिरावट आई है। वहीं जिला अभी भी शीतलहर की चपेट में है। दो दिनों से बारिश तो थमी है लेकिन ठंड से राहत नहीं मिल पाई है। ठंड से बचने के लिए अभी भी गर्म कपड़े तथा अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है। उत्तर भारत समेत कोरिया जिले में पड़ रही कड़ाके की ठंड का असर अभी भी ज्यों का त्यों बना है। वनांचल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जनकपुर, कोटाडोल, रामगढ व सोनहत आदि पहाड़ी क्षेत्रों में तो कड़ाके की ठंड पड़ रही है। दो दिन पहले हुई बारिश के बाद तापमान में भारी गिरावट दर्ज हुई है। सुबह, शाम और रात्रि में ठंड हवाओं के साथ-साथ कोहरे से भी लोगों की परेशानियां बढ़ी है। दो दिनों से पूरे जिले में 8 बजे तक कोहरे से भी ढक रहा है। ऐसे में लोगों की दिनचर्या अभी भी पटरी पर नहीं लौट पायी है। सुबह आठ बजे के बाद ही लोग घरों से निकल रहे हैं। आसमान में अभी भी बादलों का डेरा बना हुआ है, जिससे बारिश होने की संभावना जताई जा रही है। नये साल के पहले सप्ताह में ठिठुरन से बचने के लिए लोगों को गर्म कपड़ों के साथ-साथ अलाव आदि का सहारा भी लेना पड़ रहा है।

फसल हो रही बर्बाद

अब दलहन-तिलहन की फसल पर मौसम की मार पड़ने लगा है। इससे कीट व्याधि सहित अन्य रोग से फसल ग्रसित है। यदि जल्द मौसम नहीं खुला तो दलहन तिलहन की फसल चौपट होने के आसार है। इसे लेकर किसान काफी चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि दलहन-तिलहन की फसल में ज्यादा सिंचाई की आवश्यकता नहीं पड़ती हैं। इसलिए वे लंबे समय से इसकी फसल ले रहे हैं। वे बड़े रकबा में चना, लाखड़ी, सरसों, अरहर, मूंग आदि की फसल ने रहे है। लेकिन पखवाड़ें भर से मौसम खराबी के चलते दलहन-तिलहन की फसल पर तनाछेदक, कीट व्याधि सहित अन्य रोग ने पांव पसारना शुरु कर दिया हैं। इसे लेकर अब उन्हें फसल चौपट होने का भय सताने लगा हैं।

पहले धान अब रबी को नुकसान

किसानों की माने तो खरीफ के तहत वे बड़े रकबा में धान का फसल लिए थे। इस तरह उनकी मेहनत रंग लाई। इससे धान का उत्पादन भी अच्छा हुआ। लेकिन फसल कटाई के समय ही अचानक इस बार बारिश हो गई। इसलिए अधिकांश किसानों को इस बार धान की फसल में काफी नुकसान हुआ। इसकी वजह से वे बाजार से उधार लिए खाद एवं कीटनाशक दवाई का पैसा भी चुका नहीं कर पा रहे हैं। इस तरह बेमौसम बारिश किसानों के लिए पूर्व में भी मुसीबत साबित हुआ। इससे किसान काफी परेशान हैं।

मौसम खुलने का इंतजार

किसानो का कहना है कि दलहन-तिलहन की फसल वे इस बार बड़ी मात्रा में ले रहे हैं। इस पर बेमौसम बारिश एवं खराब मौसम आफत बना हुआ है। क्योंकि लंबे समय से दलहन-तिलहन खराब मौसम का दंश झेल रहे है। यदि जल्द मौसम नहीं खुला तो किसानों को दलहन-तिलहन की फसल में भी नुकसान उठाना पड़ेगा। इसे लेकर किसान इन दिनो काफी चितिंत नजर आ रहे है। इसे लेकर उन्हें मौसम खुलने का बेसब्री से इंतजार हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network