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अंबिकापुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

नगरीय निकाय चुनाव से पूर्व राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत बीस साल पहले जिन्हें आवास योजना का लाभ मिला था उन्हें मालिकाना हक देने और 2018 के पूर्व नजूल भूमि पर काबिज लोगों को पट्टा देने शहर में सर्वे अंतिम चरण पर है। प्रथम चरण में उन झुग्गी बस्तियों को प्राथमिकता दिया जा रहा है, जहां लोग वर्षों से छोटे-छोटे भूखंड पर काबिज हैं। शासन-प्रशासन की ओर से कोशिश की जा रही है कि नगरीय निकाय चुनाव के पहले अधिक से अधिक लोगों को पट्टा वितरण की शुरुआत कर दी जाए।

वर्षों से नजूल भूमि के पट्टा को लेकर विपक्ष में रही कांग्रेस ने आवाज उठाई थी। यही कारण था कि जन घोषणा पत्र तैयार करने के दौरान नेता प्रतिपक्ष रहे विधायक टीएस सिंहदेव ने नजूल भूमि का पट्टा देने की मांग को जन घोषणा पत्र में प्रमुखता से रखा था। जिसकी पहल अब कांग्रेस सरकार शुरु कर दी है। निकाय चुनाव से पहले पट्टा देने की शुरुआत करने की कोशिश की जा रही है। शहर में प्रशासन व निगम की टीम ने नजूल भूमि पर बसे लोगों के मकानों की नापजोख शुरु कर दी है। प्रशासन द्वारा बनाई गई टीम शहर के गांधीनगर सहित विभिन्न इलाकों में पहुंच नजूल भूमि पर छोटे मकान बनाकर निवास कर रहे लोगों के मकानों की नापजोख कर रही है। यह काम अब अंतिम चरणों पर है। प्रथम चरण में राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत बीस वर्ष पूर्व जिन नागरिकों को पट्टा मिला था उन्हें उस मकान व भूमि का मालिकाना हक देने की कवायद की जा रही है। इन्हें स्थायी पट्टा दिया जाएगा। लगभग 450 वर्गफुट की भूमि का पट्टा इन नागरिकों को मिलेगा। यह नपं क्षेत्रों में एक हजार वर्गफुट, नपा क्षेत्रों में आठ सौ वर्गफुट व निगम क्षेत्रों में 700 वर्गफुट होगा। शहर में सर्वे शुरु होने से लोगों में उत्साह है। कांग्रेस की ओर से पार्षद का चुनाव लड़ने दावेदारी कर रहे लोगों के साथ वर्तमान पार्षद भी प्रशासन व निगम की टीम के साथ एक-एक घर में पहुंच सर्वे के साथ नापजोख करा रहे हैं।

केवल आवासीय प्रयोजन के लिए

नगरीय क्षेत्रों के भूमिहीन लोगों को पट्टा देने भी सर्वे चल रहा है। इसके तहत सात सौ वर्गफुट भूमि का ही पट्टा मिलेगा। यह पट्टा केवल आवासीय प्रयोजन के लिए होगा। शहर के गांधीनगर, गोधनपुर, केदारपुर, नवागढ़, मायापुर, गंगापुर, बिशुनपुर सहित कई इलाकों में सर्वाधिक लोग नजूल भूमि पर काबिज हैं। वर्षों से शहर के इन इलाकों के लोगों को नजूल भूमि पर बसे होने के कारण पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह भय समाया रहता था कि कब प्रशासन की कार्रवाई हो जाएगी और उनका घर-मकान टूट जाएगा। समय-समय पर ऐसी कार्रवाईयां प्रशासन व निगम द्वारा की जातीं थीं जिससे भयावह स्थिति निर्मित होती थी।

खूब हो चुकी है नजूल भूमि पट्टे को ले सियासत

शहर में नजूल भूमि के पट्टे को लेकर लगातार कई वर्षों से सियासत होते आ रही थी। भाजपा शासनकाल में तो भाजपा के नेताओं ने चुनावी शिगुफा फेंक शहर में नजूल भूमि का पट्टा दिए जाने की घोषणा भी कर दी थी। इसको लेकर सोशल मिडिया व अन्य मंचों पर भाजपा और कांग्रेस के नेताओं में जमकर नोंक-झोंक भी हो चुकी है। आरोप-प्रत्यारोप भी होता रहा है किन्तु अब प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद नजूल भूमि पर बसे लोगों को पट्टा मिलना तय हो गया है।

सर्वे का कार्य अंतिम चरण पर है। 30 अक्टूबर तक सर्वे किया जाना था। रिपोर्ट मंगाई जा रही है। इसमें राजीव गांधी आश्रय आवास के स्थायी पट्टे व नजूल भूमि पर काबिज लोगों को पट्टा देने का सर्वे कराया गया है।

अजय त्रिपाठी

एसडीएम, अंबिकापुर

नजूल भूमि का पट्टा दिए जाने सर्वे कराया जा रहा है। कांग्रेस ने सरकार बनते ही इसे गंभीरता से लिया। पंचायत मंत्री टीएस सिंहदेव की पहल पर इस मुद्दे को जन घोषणा पत्र में भी लाया गया और उस पर अमल शुरु हो गई है। हरहाल में चुनाव से पूर्व नजूल भूमि का पट्टा वितरण के साथ बीस वर्ष पूर्व राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत मिले आवास व भूमि का स्थायी मालिकाना हक भी दिया जाएगा।

शफी अहमद

सभापति, नगर निगम

Posted By: Nai Dunia News Network

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