अंबिकापुर । नईदुनिया प्रतिनिधि

जिला पंचायत सरगुजा की सामान्य सभा की बैठक में लिए गए निर्णय के परिपालन में जल संसाधन विभाग द्वारा डीएमएफ मद से नहर मरम्मत के कराए गए कार्य की जांच रिपोर्ट अभी तक प्रस्तुत नहीं की जा सकी है। आलम यह है कि बुधवार को संबंधित फाइल खोजने के बावजूद नहीं मिली। शासन के निर्देश पर खाद्य सतर्कता कमेटी का गठन डेढ़ साल पहले ही सरगुजा जिले में कर लिया गया, लेकिन उस कमेटी में शामिल तीन जिला पंचायत सदस्यों को इसकी जानकारी ही नहीं थी। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिला पंचायत सरगुजा की सामान्य सभा की बैठकों में लिए जाने वाले निर्णयों को लेकर अधिकारी कितनी गंभीरता बरत रहे हैं। कई मामलों में जांच कमेटी गठित किए जाने के बावजूद अंतिम प्रतिवेदन नहीं आने और किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होने पर बुधवार को आहूत बैठक में सदस्यों ने गहरी नाराजगी जताई।

जिला पंचायत सरगुजा के वर्तमान कार्यकाल की संभवतः आखिरी बैठक बुधवार को अध्यक्ष फूलेश्वरी सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में पिछले सामान्य सभा की बैठकों में लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन को लेकर लंबी चर्चा हुई। जिला पंचायत सदस्य राकेश गुप्ता ने इस बात पर अप्रसन्नता व्यक्त की कि सामान्य सभा की बैठक में कई गंभीर मुद्दों पर जांच कमेटी भी बनी, लेकिन अंतिम रूप से न तो रिपोर्ट आ सकी और न ही उस रिपोर्ट के आधार पर कोई कार्रवाई अथवा व्यवस्था में सुधार के लिए अधिकारियों ने पहल की। चर्चा के दौरान ही यह बात निकलकर सामने आई कि पूर्व में डीएमएफ मद से जल संसाधन विभाग को नहरों के मरम्मत के लिए राशि प्रदान की गई थी। जिला पंचायत अध्यक्ष के नेतृत्व में गठित जांच कमेटी में सदस्य के रूप में जिपं सदस्य राकेश गुप्ता भी शामिल थे। अधिकारियों के साथ उन्होंने नहरों का निरीक्षण भी किया था। निरीक्षण में यह बात उजागर हुई थी कि नहर निर्माण कार्य में लापरवाही की गई है। सदस्यों ने जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया था, लेकिन यह रिपोर्ट आज तक सामान्य सभा में प्रस्तुत ही नहीं की गई। इसपर गहरी नाराजगी जताई गई। सदस्यों का कहना था कि चूंकि जिम्मेदार अधिकारी व जनप्रतिनिधि निरीक्षण के दौरान साथ थे, इसलिए उन्होंने किसी दूसरे प्लेटफार्म में शिकायत नहीं की। जिला पंचायत अध्यक्ष ने फाइल प्रस्तुत करने का आदेश पहले ही दिया था, लेकिन फाइल प्रस्तुत नहीं करने पर बुधवार को फाइल ढूंढने का आदेश दिया गया, लेकिन तीन घंटे तक संबंधित शाखा के अधिकारी फाइल ढूंढते रहे, लेकिन वह नहंी मिली। नए सिरे से जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है ताकि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके। बैठक में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग के कार्यों में लेटलतीफी पर भी सदस्यों ने नाराजगी जताई। आरईएस के पास कुल 64 निर्माण कार्य हैं, जिनमें से वर्ष 2014-15 से कई निर्माण कार्य अधूरे पड़े हुए हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष फूलेश्वरी सिंह ने डीएमएफ से नहर मरम्मत के कार्यों की हुई जांच की फाइल नहीं मिलने को लेकर कहा कि उन्होंने पहले ही संबंधित अधिकारी को पत्र लिखकर आदेशित किया था। संबंधित अधिकारी ने 10 दिन की मोहलत ली थी। उनका स्थानांतरण हो गया, अब उक्त शाखा का काम देख रहे अधिकारी ने दो दिन में फाइल प्रस्तुत करने कहा है।

सदस्यों को पता ही नहीं

सार्वजनिक वितरण प्रणाली के बेहतर क्रियान्वयन के लिए शासन स्तर से वर्ष 2017 में सतर्कता कमेटी गठन का आदेश आया था। इस आदेश के परिपालन में मार्च 2018 में कमेटी का गठन कर लिया गया। खाद्य विभाग की समीक्षा के दौरान यह बात निकलकर सामने आई कि इस कमेटी में जिला पंचायत के जिन चार सदस्यों को शामिल किया गया था, उनमें से तीन उपस्थित सदस्यों को पता ही नहीं था कि वे इसी कमेटी के सदस्य भी हैं। ऐसी कमेटी के गठन पर भी सदस्यों ने सवाल उठाए और कहा कि जब उन्हें पता ही नहीं तो कमेटी क्या कार्य करेगी।

तीन साल से नहीं मिल रहा फसल बीमा के सीएसआर की राशि

फसल बीमा योजना में बीमा कंपनी करोड़ों रुपये निवेश करा रही है। अनुबंध की शर्तों के मुताबिक दो प्रतिशत राशि सीएसआर के तहत जिला स्तर पर व्यय किया जाना है, लेकिन बीमा कंपनियां तीन साल से यह रकम नहंी दे रही हैं। जिला पंचायत सदस्य राकेश गुप्ता ने बुधवार की बैठक में जब मामला उठाया तो अधिकारी भी संतोषप्रद जवाब नहंी दे सके। इसपर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई तथा कहा कि प्रावधान के अनुरूप बीमा कंपनी से उक्त राशि जमा कराई जानी चाहिए।

पशुपालन विभाग की प्रगति भी धीमी

बैठक में पशुपालन विभाग के कामकाज की भी समीक्षा की गई। कृत्रिम गर्भाधान, बधियाकरण, टीकाकरण की प्रगति काफी कम होने पर सदस्यों ने असंतोष व्यक्त किया। समय पर टीकाकरण नहीं होने से मवेशियों की मौत होने की भी शिकायत सामने आई। विभागीय अधिकारियों के कार्य व्यवहार से लगा कि वे अपने विभाग में जनप्रतिनिधियों की निगरानी नहीं चाहते, इसलिए सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों का गोलमोल जवाब देते नजर आए। डेयरी उद्यमिता योजना में 24 लोगों को अनुदान का लाभ दिया गया है। इसमें सिर्फ एक आदिवासी वर्ग का व्यक्ति लाभांवित हुआ है। जिला पंचायत सदस्य राकेश गुप्ता ने कहा कि जिला पंचायत की बड़ी रकम बैंकों में जमा रहती है। सरगुजा में आदिवासियों की जनसंख्या 65 फीसद है, इसके बावजूद आदिवासियों वे वास्तविक किसानों को ऐसी लाभकारी योजनाओं का लाभ न देना अनुचित है।

अध्यक्ष ने नए सिरे से जांच कमेटी का दिया निर्देश

मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराने वाली रिवार्ड्‌स कीचन की व्यवस्था को लेकर सदस्यों द्वारा उठाए गए सवालों पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष के नेतृत्व में गठित जांच कमेटी की रिपोर्ट भी बुधवार को प्रस्तुत की गई। 12 बिंदूओं पर की गई जांच में संचालन को सही माना गया है। पूर्ववत संस्था को मध्यान्ह भोजन का कार्य व भुगतान किए जाने की अनुशंसा भी की गई है। इस जांच रिपोर्ट पर जिला पंचायत अध्यक्ष फूलेश्वरी सिंह ने कहा कि अधिकारियों द्वारा तैयार रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया जा सकता। नए सिरे से कमेटी गठित कर इसकी जांच कराई जाए।

Posted By: Nai Dunia News Network