अंबिकापुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। सरगुजा जिले में सड़क सुरक्षा उपायों की अनदेखी पर पहली बार ठेका कंपनी के विरुद्ध अपराध पंजीकृत किया गया है।पिछले दिनों भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव के काफिले में शामिल वाहन के उदयपुर नर्सरी के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से प्रधान आरक्षक की मौत हो गई थी।चालक तथा दो पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला कि घटनास्थल पर अधूरा काम कर छोड़ दिया गया था। वाहन चालकों को सतर्क करने कोई संकेतक भी नहीं लगाए गए थे।इसी लापरवाही के आधार पर उदयपुर पुलिस ने अंबिकापुर- शिवनगर राष्ट्रीय राजमार्ग नवनिर्माण में लगी डीवी प्रोजेक्ट कंपनी लिमिटेड के उन अधिकारियों के विरुद्ध अपराध पंजीकृत किया है जो घटनास्थल पर सड़क निर्माण की जिम्मेदारी उठा रहे हैं।पुलिस ने अभी किसी को नामजद नहीं किया है।अपराध पंजीकृत करने के साथ ही पुलिस प्रकरण की जांच भी आरंभ कर चुकी है।जांच व बयान के आधार पर जिन अधिकारियों की जिम्मेदारी वहां सुरक्षा संकेतक लगाने की थी उन्हें नामजद किया गया।

इसके पहले सड़क सुरक्षा में मानकों का पालन नहीं करने के कारण कई दुर्घटनाएं हो चुकी है लेकिन कभी निर्माण अथवा ठेका कंपनी के विरुद्ध एफआइआर नहीं हुई थी लेकिन इस बार पुलिसकर्मियो की वाहन के दुर्घटनाग्रस्त होने पर पुलिस ने सख्ती दिखाई है।उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में भी सड़क दुर्घटना के मामलों में पुलिस इसी तरह जांच और कार्रवाई करेगी।इस मामले में वाहन चालक प्रदीप सिंह की शिकायत पर धारा 304 ए, 336 व 337 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

चालक ने गिनाए दुर्घटना के कारण

उदयपुर के खरफरी नाला के सामने बाएं तरफ कच्ची सड़क मिट्टी डला हुआ गड्ढा जैसा छोड़ दिया गया था। दाहिने तरफ सीमेंट कांक्रीट की सड़क बनी थी।कोई सांकेतक चिन्ह भी नहीं था, जिससे पता चल सके कि वाहन को किस तरफ लेकर जाना है इसलिए समझ में कुछ नहीं आया।बाएं तरफ कच्ची सड़क जिस पर मिट्टी डालकर सड़क बनाया गया था उसमें गढ्ढा ढलान जैसा दिखने पर भ्रमित होकर वाहन को दुर्घटना से बचाने के लिये दाहिने तरफ सीमेंट कांक्रीट सड़क में वाहन को ले जाने के लिए अचानक दाहिने तरफ मोड़ने पर बायां चक्का सीसी सड़क के किनारे लगने से वाहन अनियंत्रित हो गया। दाहिने तरफ किसी प्रकार का सुरक्षा रेलिंग न होने से पलट कर लगभग 15 फीट गढ्ढे में दाहिने तरफ गिर गया, जिससे वाहन का चारों चक्का ऊपर हो गया था।

यह उपाय किया जाना था सड़क पर

निर्माणाधीन सड़क पर संकेतक नहीं लगाए गए थे।अधूरा निर्माण कर सड़क को छोड़ दिया गया था।दिन के समय तो दिक्कत नहीं है लेकिन रात के समय दिखने वाले सड़क डायवर्सन एवं सुरक्षा संबंधी संकेतक लगाए जाने चाहिए थे ताकि दूर से चालक को वह दिखने लगे और उस अनुरूप चालक सुरक्षित तरीके से उक्त स्थल को पार कर सके।आवश्यकता के अनुरूप ऐसे स्थलों पर रेलिंग भी लगाई जानी चाहिए थी ताकि सड़क किनारे खाई में न पलटे।

यह थी घटना

चालक प्रदीप सिंह के साथ बोलेरो वाहन क्रमांक सीजी 29 ए 6246 से पुलिसकर्मी रविशंकर प्रसाद भगत, रामदेव सिंह, अनिल साय पैकरा के साथ तारा से पेट्रोलिंग करते अंबिकापुर लौट रहे थे। रात्रि करीब 12ः30 बजे दुर्घटना हुई थी।वाहन में चालक तथा तीनों पुलिसकर्मी फंस गए थे। गंभीर एवं अंदरूनी चोट लगने से सामने सीट पर बैठे प्रधान आरक्षक रविशंकर प्रसाद भगत बेहोश हो गए थे।शेष तीनों को चोट आई थी।उदयपुर अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद प्रधान आरक्षक रविशंकर प्रसाद भगत को मृत घोषित कर दिया गया था।

निर्माणाधीन सड़क पर पहले भी हुए हादसे

अंबिकापुर- शिवनगर राष्ट्रीय राजमार्ग नवनिर्माण और चौड़ीकरण के कार्य में सड़क सुरक्षा उपायों की अनदेखी के कारण पूर्व में भी हादसे हुए हैं। निर्माणाधीन पुलिया के गड्ढे में गिरने से मोटरसाइकिल सहित चालक गिर गया था, जिस कारण उसकी मौत हो गई थी। इसी प्रकार अधूरे निर्माण और सड़क सुरक्षा उपायों की अनदेखी के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर तत्कालीन कलेक्टर संजीव झा ने भी एफआइआर के निर्देश दिए थे लेकिन उस दौर में भी सड़क अथवा ठेका कंपनी के विरुद्ध एफआइआर नहीं हुआ था।

Posted By: Nai Dunia News Network

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