अंबिकापुर। सरगुजा जिले में सिटी बसों के संचालन को लेकर कलेक्टर संजीव झा ने सख्ती बरती है।महीनों से बंद सिटी बस सेवा का संचालन यथा शीघ्र करने का निर्देश देते हुए उन्होंने कहा है कि अगर जल्द ही सिटी बसों का संचालन शुरू नहीं होता है तो ऐसे में बस आपरेटर के ऊपर कठोर कार्रवाई की जाएगी। बस आपरेटर पर लंबित 23 लाख रुपए रायल्टी तो वसूला जाएगा साथ ही उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। इसके साथ ही सारी बसें भी आपरेटर से वापस ले ली जाएंगी और बसों में हुए नुकसान की भरपाई भी बस आपरेटर से ही करवाई जाएगी।

सरगुजा जिला अरबन पब्लिक सर्विस सोसायटी के द्वारा सिटी बसों का संचालन वर्ष 2015 से किया जा रहा है। सिटी बसों के संचालन बावत अंबिकापुर बस ट्रांसपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड नमनाकला का चयन बस आपरेटर के रूप में किया गया था। सेवा प्रदाता के द्वारा प्रतिबस प्रतिमाह 2500 रुपये बस रायल्टी फीस सोसायटी के कोष में जमा किया जाना था। बस आपरेटर को कार्यालय द्वारा कई पत्र लिखे गए,लेकिन कोई सकारात्मक जबाब नहीं मिला। कर मार्च 2020 की स्थिति में लंबित बस रायल्टी फीस 23 लाख जमा किये जाने बावत् सूचित किया गया है, किन्तु आज दिनांक तक बस आपरेटर के द्वारा लंबित बस रायल्टी फीस सोसायटी के कोष में जमा नहीं किया गया है।

कोरोना काल में सिटी बसों का संचालन बंद किया गया था, स्थिति सामान्य होने पर यात्रियों की सुविधा हेतु सिटी बसों का नियमित रूप से पुनः संचालन किये जाने बावत बस आपरेटर को पत्र जारी किया गया था लेकिन बस आपरेटर द्वारा अभी तक बसों का संचालन शुरू नहीं किया गया है।इससे नाराज सरगुजा कलेक्टर संजीव झा ने बस आपरेटर को जल्दी बसों का संचालन शुरू करने का निर्देश दिया है अगर जल्द ही बसों का संचालन शुरू नहीं किया जाता है तो ऐसी स्थिति में बस ऑपरेटर पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बस आपरेटर से 23 लाख रायल्टी तो वसूल किया ही जाएगा साथ में बस आपरेटर को काफी जुर्माना भी भरना पड़ सकता है इतना ही नहीं बस आपरेटर से सारी बसें भी वापस ले ली जाएंगी और बसों में हुई क्षति की भरपाई भी बस आपरेटर के द्वारा ही करवाई जाएगी।

दबाब बनाकर ले ली थी बसें

अत्याधुनिक सुविधाएं वाली 36 सिटी बसें जब सरगुजा को मिली तो यहां बस आपरेटरों को तगड़ा झटका लगा।उन्हें लगा कि सिटी बसों का संचालन आरंभ हो जाने से उनकी आय पर सीधा असर पड़ेगा।ऐसे में बस आपरेटरों ने प्रशासन पर दबाब बनाना शुरू कर दिया।प्रशासन अपने स्तर से बसों का संचालन नहीं कर सकता था तब बस आपरेटरों से आग्रह किया गया।शुरुआती दौर में वे बसों का संचालन करने तैयार ही नहीं हुए।उन्होंने अपनी शर्तों पर बसों का संचालन कराने जोर लगाया।प्रशासन की भी मजबूरी थी आखिरकार मामूली किराए में बसों को आपरेटरों को दे दिया गया था।बसों को निगम द्वारा तैयार स्थल पर रखवाने का निर्देश था लेकिन मठपारा में बसों के कंडम हो जाने के बाद टर्मिनल बनाया गया था।

महज 2500 मासिक शुल्क पर ले ली थी लाखों की चकाचक बसें

सरगुजा के लिए यह बड़ा दुर्भाग्य था कि सिटी बसों के संचालन को लेकर बस आपरेटरों ने ठेके के समान रिंग बना लिया था।एक -एक बसें अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस थी।कई सुविधाएं आटोमेटिक थी लेकिन महज ढाई हजार रुपये प्रतिमाह के किराए पर लाखों की एक बस को ले लिया गया था।शहर में तो बसें चली नहीं।ग्रामीण क्षेत्र की रूटों पर इन सरकारी बसों से भरपूर कमाई कर सभी को कंडम भी कर दिया गया।मरम्मत की ओर कभी ध्यान ही नहीं दिया गया।2500 रुपये मासिक किराया की अदायगी भी नहीं की गई।

अधिकांश बसें कंडम,मरम्मत में खर्च होगी बड़ी राशि

सरगुजा जिले में सुनियोजित तरीके से सिटी बसों के संचालन को अवरुद्ध करने का खेल भी चला।सिटी बसों को लेने के बाद उसके रखरखाव की ओर ध्यान ही नहीं दिया गया।सरकारी संपत्ति को बर्बाद करने कोई कसर बाकी नहीं रखी गई।बसों के जो दरवाजे आटोमेटिक बंद होते थे उनके खराब होने पर रस्सी से बांधना शुरू किया गया।शीशे टूटी और सीटें क्षतिग्रस्त हुई तो भी मरम्मत नहीं कराया गया।आज अधिकांश बसें कंडम हो चुकी है जो सड़क पर शायद चलने की स्थिति में भी नहीं है।सभी बसों की गिनती कराई जाए तो भी बड़ी गड़बड़ी सामने आ सकती है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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