अंबिकापुर। LALIT- 54: छत्तीसगढ़ के देवी राजमोहिनी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र अजिरमा के डीन डॉ वीके सिंह के मार्गदर्शन में भिंडी कि ललित-54 किस्म का ट्रायल सफल हो गया है। कृषि अनुसंधान केंद्र के लगभग 40 डिसमिल रकबे में 17 जुलाई को इस किस्म की भिंडी की बोवाई की गई थी। वर्तमान में भिंडी की तोड़ाई शुरू हो गई है और हर चार-पांच दिन के अंतराल में 25 से 30 किलोग्राम भिंडी निकल रही है। इस नई किस्म की सबसे खास बात यह है कि इे साल भर किसी भी मौसम में उगाया जा सकता है। कृषि वैज्ञानिकों ने सरगुजा के किसानों को अपनी भूमि के कुछ न कुछ रकबे में आर्थिक आय अर्जित करने के लिए भिंडी की बोवाई हर मौसम में करने की सलाह दी है। कृषि वैज्ञानिकों ने कहा है कि हर मौसम में भिंडी लगाएं और मुनाफा ज्यादा कमाएं।

इस वैश्विक कोरोना महामारी के समय में सब्जियों की खपत बढ़ गई है और सब्जियां महंगी बिकने लगी है। कम समय में तैयार होने वाली सब्जी में भिंडी का नाम सबसे पहले आता है। भिंडी का चुनाव प्रत्येक किसानों को अधिक से अधिक रकबे में करना चाहिए और इसे अपनी फसलों की फसलों में शामिल करना चाहिए जिससे कम समय में ज्यादा मुनाफा और नगद आय हो सके।

किसानों की जेब में नगद राशि हर दो-चार दिन के अंतराल में भिंडी से आ सकती है। इसे कृषि विज्ञान केंद्र में ललित-54 किस्म ने साबित कर दिया है। इस समय बाजार में भिंडी की कीमत भी काफी अधिक है। यदि जुलाई माह में किसानों ने भिंडी की बोवाई की होती तो निश्चित रूप से इससे अच्छा मुनाफा भी मिलता। कुछ किसानों ने जरूर इसकी बोवाई की और अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं।

कृषि विज्ञानियों के मुताबिक भिंडी को एकल फसल के अलावा अंतरवर्ती फसल के रूप में अपने छोटे रकबे में निश्चित रूप से शामिल कर लेना चाहिए। भिंडी की फसल को वर्ष भर हर मौसम में खरीफ, रबी, जायद में आसानी से लिया जा सकता है जिससे की पैदावार मिल सकेगी। भिंडी में कुछ व्याधियां दिखाई देती हैं।

यदि किसान समय-समय पर सतत निगरानी रखें तो फसल का उत्पादन प्रभावित नहीं होता और कम रकबे में बढ़िया आय देकर भिंडी जाती है। कृषि विज्ञानी डॉ पीके भगत ने बताया कि भिंडी में फुदका कीट, कपास का लाल कीड़ा एवं फल भेदक नुकसान ज्यादा करता है। ज्यादा नुकसान प्ररोह व फलबेधक से ही होता है। इसके नियंत्रण हेतु किसान प्रोपेनफास, क्लोरोसाइपर, फैनवैलेरेट, इमिडाक्लोप्रिड नामक दवाइयों का छिड़काव कर सकते हैं जिससे आसानी से नियंत्रण पाया जा सकता है।

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