अंबिकापुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। राजस्थान राज्य में फसलों एवं अन्य वनस्पतियों की भारी नुकसान पहुंचाने वाली टिड्डी दल महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश में प्रवेश कर अब छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ रहा है। टिड्डियों का एक बड़ा दल सूरजपुर व कोरिया जिले से लगे सिंगरौली की ओर बढ़ चुका है, जो कभी भी हवा की रुख के साथ उत्तरी छत्तीसगढ़ के कोरिया व सूरजपुर जिले में प्रवेश कर सकता है। इसे देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र व माता राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय सजग हो गया है। किसानों से आग्रह किया गया है कि अगर आसपास टिड्डी दल दिखें या उनके बारे में कुछ खबर मिले तो निकटतम टिड्डी कार्यालय, पुलिस थाना, राजस्व कार्यालय, ग्राम पंचायत, विद्यालय, डाक घर या कोई भी शासकीय कार्यालय को सूचित करें।

कृषि विज्ञान केंद्र मैनपाट के प्रभारी संदीप शर्मा व राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. वीके सिंह के मार्गदर्शन में किसानों तक इस कीट की पहचान आदि जानकारी उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है ताकि समय रहते इस कीट का समुचित नियंत्रण हो सके। कृषि विज्ञान केंद्र के कीट विशेषज्ञ सूर्य प्रकाश गुप्ता द्वारा बताया गया कि टिड्डियों का झुंड दिन के दौरान उड़ता रहता है और रात होने पर पेड़ों पर झाड़ियों में, फसलों में बसेरा करता है और वहां रात गुजारता है, फिर वे सुबह होने पर सूरज उगने के बाद अपने बसेरे के स्थान से उठकर उड़ना शुरू कर देते है।

एक दिन में 150 किमी की उड़ान

कीट विशेषज्ञ सूर्य प्रकाश गुप्ता ने बताया कि इस कीट का व्यस्क पीला एंव गुलाबी रंग का होता है, खासकर पीला रंग की टिड्डी अंडे देने में सक्षम होती है और पड़ाव डालने के बाद यह अंडा देना शुरू कर देती है। इस स्थिति का पूरा लाभ नियंत्रण करने में उठाना चाहिए। यह टिड्डियों का झुंड कितना खतरनाक है, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन टिड्डियों का झुंड एक दिन में 150 किमी की दूरी तय कर सकता है एवं यह अपने वजन के बराबर भोजन खाती है।

इन कीटनाशकों का करें उपयोग

टिड्डी नियंत्रण के सिलसिले में शीघ्र ही समुचित नियंत्रण उपाय करने के लिए दल की खोज और उनकी पहचान से संबंधित जानकारी समय पर मिलना आवश्यक है। खोज के दौरान मिले टिड्डियों की झुंड को समाप्त करने के लिए विभिन्न कीटनाशक का उपयोग किया जाता है, उनमें प्रमुख हैं लेंडासाइहेलोथ्रिन 50 ईसी एक मिग्रा प्रति लीटर पानी डेलटमेंथ्रिन 2.8 प्रतिशत ईसी एक मिली प्रति लीटर पानी। इनके रोकथाम के लिए सबसे जरूरी है, सजगता एवं सर्तकता। कृषक भाई जहां भी इस तरह का झुंड पाए तुरंत कृषि विज्ञान केंद्र मैनपाट के वाटसअप नंबर 9406166385 पर सूचित करें।

नईदुनिया ने मंगलवार को ही किया था आगाह

राजस्थान सहित देश के कई राज्यों में भारी नुकसान पहुंचाकर ट्डिी दल के छत्तीसगढ़ में प्रवेश करने की संभावना को लेकर मंगलवार को नईदुनिया ने प्रमुखता से खबर का प्रकाशन किया था। मध्यप्रदेश के रास्ते टिड्डी दल के छत्तीसगढ़ में प्रवेश की संभावना को लेकर प्रकाशित खबर 'कई राज्यों में फसलों को नुकसान कर चुके टिड्डी दल का छग में संभव है हमला' शीर्षक से प्रकाशित खबर के बाद पड़ोसी मध्यप्रदेश राज्य के सीधी जिले से टिड्डी दल के आगे बढ़ने की सूचना पहुंच गई, जिस कारण अलर्ट जारी करना पड़ा।

मंगलवार अलसुबह मध्यप्रदेश के सीधी जिले के उप संचालक कृषि ने जानकारी दी है कि टिड्डियों का एक दल सिंगरौली की ओर बढ़ गया है। इसे देखते हुए सीमावर्ती जिले कोरिया, सूरजपुर व बलरामपुर में किसानों को सतर्क किया जा रहा है। बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं।

डॉ. वीके सिंह

अधिष्ठाता, राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय

Posted By: Nai Dunia News Network

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