असीम सेनगुप्ता

अंबिकापुर।अबूझमाड़ के कोर एरिया में घुसकर नक्सली कैंप ध्वस्त कर छह नक्सलियों को मार गिराने वाले निरीक्षक अलरिक लकड़ा को राष्ट्रपति का पुलिस वीरता पदक प्रदान किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस के ठीक एक दिन पहले इस घोषणा से सरगुजा पुलिस में उत्साह का माहौल है।पहले आरक्षक फिर शिक्षक और बाद में उपनिरीक्षक बने अलरिक लकड़ा वर्तमान में सरगुजा जिले के लखनपुर थाना प्रभारी हैं। बस्तर के अबूझमाड़ इलाके में तीन साल से अधिक समय तक पदस्थापना के दौरान 10 से अधिक नक्सलियों को मार गिराने के साथ उनका प्रशिक्षण शिविर ध्वस्त करने और नक्सलियों के कब्जे से विदेशी हथियार बरामद करने में भी सफलता हासिल की थी।

इन्हीं उल्लेखनीय सेवाओं के कारण उन्हें समय पूर्व पदोन्नात्ति भी दी गई थी।पहले नक्सलियों की मांद में घुसकर नक्सल उन्मूलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले निरीक्षक अलरिक लकड़ा इन दिनों मैदानी क्षेत्र में शांति,सुरक्षा और कानून - व्यवस्था में मदद कर रहे है।शहरी क्षेत्रों के अपराधियों पर शिकंजा कसने में वे लगे हुए है।बता दें कि निरीक्षक अलरिक लकड़ा मूलत: जशपुर जिले के बगीचा ब्लाक के ग्राम मझगांव के रहने वाले हैं लेकिन अब वे बस्तर के निवासी हो गए है।बीस सालों से उनका परिवार बस्तर जिले में ही निवास करता है।

पहले आरक्षक फिर शिक्षक और अब निरीक्षक

निरीक्षक अलरिक लकड़ा ने शासकीय सेवा की शुरुआत पुलिस विभाग में आरक्षक के पद से की थी।1999 से 2008 तक वे आरक्षक के पद पर बस्तर में ही पदस्थ थे लेकिन इन्होंने यह नौकरी छोड़ दी थी।वर्ष 2008 से वर्ष 2013 तक वे बस्तर के चित्रकोट में शिक्षक के रूप में बच्चों को पढ़ाने के काम मे लग गए।इसी साल पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक की भर्ती हुई और अलरिक लकड़ा अपनी प्रतिभा के दम पर उप निरीक्षक बन गए।प्रशिक्षण अवधि में राजनांदगांव जिले में सेवा देने के बाद उन्हें सीधे बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले में पदस्थ कर दिया गया था।यहां नक्सलियों के विरूद्ध लगातार सफल आपरेशन की वजह से उन्हें समय पूर्व पदोन्नात्ति देकर निरीक्षक बना दिया गया।

अबूझमाड़ डीआरजी टीम का किया नेतृत्व

राष्ट्रपति के पुलिस वीरता पदक के लिए चयनित निरीक्षक अलरिक लकड़ा बताते हैं कि नारायणपुर जिले में पदस्थापना के दौरान उन्हें अबूझमाड़ डीआरजी टीम का नेतृत्व करने का मौका दिया गया।इसे माड़ टीम के रूप में जाना जाता था।उस दौरान अबूझमाड़ के कोर एरिया में घुसकर बड़ा आपरेशन नहीं चला था।24 अगस्त 2019 को उनकी टीम ने अबूझमाड़ के भीतरी क्षेत्र में गुमरका के जंगल मे नक्सलियों के प्रशिक्षण शिविर स्थल पर हमला बोला।नक्सलियों ने भी जबाबी फायरिंग की लेकिन निरीक्षक अलरिक के नेतृत्व में टीम ने छह नक्सलियों को मार गिराया।एक जवान भी बलिदान हुआ। पहली बार नक्सली कैंप ध्वस्त कर अबूझमाड़ के धूर नक्सल प्रभावित क्षेत्र से उनकी टीम पांच नक्सलियों का शव लेकर बाहर आई थी।बड़ी संख्या में नक्सलियों के हथियार भी जब्त किए गए थे।एक नक्सली का शव उनके साथी ही ले गए थे।

नक्सलियों से विदेशी हथियार बरामद करने का भी श्रेय

गुमरका में छह नक्सलियों को मार गिराने वाले अबूझमाड़ डीआरजी के टीम लीडर अलरिक लकड़ा ने नक्सलियों के खिलाफ दस से अधिक सफल मुठभेड़ कर नक्सलियों को भारी नुकसान पहुंचाया था।बालेबाड़ा में दो जुलाई 2019 को दो नक्सलियों को मार गिराने के साथ पहली बार नक्सलियों से विदेशी हथियार बरामद करने का श्रेय भी उन्हें जाता है।उन्होंने अबूझमाड़ के आसनार में भी एक सफल मुठभेड़ को अंजाम देकर दो नक्सलियों को मार गिराया था।इन्हीं सफलताओं के कारण उन्हें राष्ट्रपति का पुलिस वीरता पदक गणतंत्र दिवस 2023 को प्रदान किया जाएगा।

सरगुजा का कार्यकाल भी उपलब्धि भरा

वर्ष 2020 के शुरुआती दिनों में निरीक्षक अलरिक लकड़ा सरगुजा में पदस्थ हुए।यहां सीतापुर, उदयपुर,गांधीनगर थाना प्रभारी के बाद वर्तमान में वे लखनपुर थाना प्रभारी के रूप में कार्य कर रहे हैं।सरगुजा में भी उनका कार्यकाल उपलब्धि भरा है।अंतरराज्यीय साइबर ठगों को दूसरे राज्यों से गिरफ्तार करने के अलावा नशे के खिलाफ भी उन्होंने बड़ी कार्रवाई की है।शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले अपराधों की त्वरित विवेचना,अंधे हत्याकांड का राजफाश कर अपराधियों की धरपकड़ में भी वे आगे हैं।

इसी प्रकार करते रहें बेहतर काम :आइजी

सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अजय कुमार यादव ने निरीक्षक अलरिक लकड़ा को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।उन्होंने भविष्य में भी इसी प्रकार और बेहतर कार्य करने शुभकामनाएं दी हैं। निरीक्षक अलरिक लकड़ा ने इस सम्मान के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन,सहयोग और समर्थन तथा सहकर्मियों से मिले साथ के लिए आभार जताया है।

Posted By: Yogeshwar Sharma

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