अंबिकापुर। नईदुनिया प्रतिनिधि

वानिकी पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर से आए वैज्ञानिकों ने वन विभाग के मैदानी अमले, किसानों एवं स्वसहायता समूह के सदस्यों को विभिन्न कृषि वानिकी के उपयोगी माडल की जानकारी देकर उसका लाभ उठाने कहा गया। शुक्रवार को प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। इस मौके पर डीएफओ पंकज कमल ने आहृवान किया कि जो तकनीक प्रशिक्षण के दौरान आप सभी ने सीखा उसका उपयोग कर वनवासियों के जीवन में आर्थिक उन्नति ला सकते हैं।

प्रशिक्षण के आखिरी दिन वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. ननीता बेरी ने सतत आजीविका के लिए लाख, फल एवं बांस के पौधों के उपयोग की विभिन्न कृषि वानिकी माडल की विस्तार से जानकारी दी। डा. गीता जोशी ने सरगुजा वन क्षेत्र में बांस के उपयोग एवं वृद्घिकरण की संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। आरबी मांझी ने खदानों से निकली मिट्टी की जैविक सुधार हेतु संस्थान द्वारा विकसित माडलों के बारे में प्रशिक्षणार्थियों को बताया। समापन से पहले प्रशिक्षणार्थियों को कृषि विज्ञान केंद्र अजिरमा के सहयोग से क्षेत्र भ्रमण कराया गया। इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डा. रविंद्र तिग्गा ने एकीकृत कृषि प्रबंधन की जानकारी दी। दो दिवसीय प्रशिक्षण में सरगुजा वनवृत्त के वनकर्मचारी के अलावा किसान एवं स्व सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं शामिल हुई। इस मौके पर रेंजर धर्मजीत पटेल, फेंकू चौबे, महाजन साहू, राकेश कुमार रावत, सपना मुखर्जी सहित संयुक्त वनमंडलाधिकारी सीतापुर एसबी पांडेय, उपवनमंडलाधिकारी बीएस भगत, बिजेंद्र सिंह ठाकुर उपस्थित थे। कार्यक्रम के आयोजन में अजय वर्मा एवं उनकी टीम शामिल थी।

Posted By: Nai Dunia News Network

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