अंबिकापुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। अंबिकापुर निवासी ओमप्रकाश अग्रवाल, आदिवासी बहुल उत्तर छत्तीसगढ़ में सामाजिक व कृषि वानिकी के जनक माने जाते है। पिछले चार दशक से पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य कर रहे ओमप्रकाश अग्रवाल ने जैव विविधता के लिए भी कार्य किया है। उनके केंद्र में आज की युवा पीढ़ी अध्ययन कर रही है। एमएससी फार्म फारेस्ट्री के विद्यार्थियों की यह प्रयोगशाला है। सिर्फ डेढ़ वर्ष में संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय परिसर भकुरा (अंबिकापुर)में डेढ़ लाख पौधों का रोपण और उसकी सुरक्षा कर ओमप्रकाश अग्रवाल ने यह दिखा दिया है कि उम्र का पड़ाव कुछ भी हो लेकिन वानिकी के क्षेत्र में उनका काम थमने वाला नहीं है। 70 के दशक में स्कूल और फिर कालेज की शिक्षा पूरी करने के बाद इनके पास विकल्प खुले हुए थे। कानून की पढ़ाई भी इन्होंने की थी। सुविधाओं की कोई कमी भी नहीं थी लेकिन बचपन से ही हरियाली के प्रति प्रेम और समर्पण ने युवा अवस्था में ही इन्हें पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन के कार्य में मोड़ दिया। अंबिकापुर नगर निगम क्षेत्र में लगभग 50 एकड़ निजी जमीन पर शहरी जंगल स्थापित करने का श्रेय इन्हें जाता है। समाज और राष्ट्र के लिए कुछ अलग करने की इनकी चाहत ने समाज को ऐसी सीख दी कि आज उत्तर छत्तीसगढ़ के हर गांव में सामाजिक वानिकी का उदाहरण देखा जा सकता है। मन में व्यवसायिक दृष्टिकोण होता तो ओम प्रकाश अग्रवाल भी अपनी जमीन पर कांक्रीट का नया शहर बसा सकते थे लेकिन उन्होंने समाज को कुछ देने की ठानी जिसका प्रतिफल है कि आज उत्तर छत्तीसगढ़ के हर घर की बाड़ी और खेत की मेड़ों पर सैकड़ों फलदार और छायादार पेड़ नजर आते है। गरीबी और कुपोषण के खिलाफ भी इन्होंने जंग छेड़ रखी है। किंवाच की खेती को बढ़ावा देने में लगे है। कई क्विंटल बीज का वितरण किया है। सर्वाधिक प्रोटीन वाले किंवाच का उपयोग जनजातीय समाज सब्जी तथा इसके बीज को दाल के रूप में करता है। व्यावसायिक स्तर पर कंपनियां इसे ऊंचे दर पर खरीदती है।

कम जमीन पर ज्यादा आय का माडल भी दिया-

तेजी से विकसित हो रहे अंबिकापुर शहर के वन वाटिका और उससे लगे बांस बाड़ी क्षेत्र को संरक्षित करने का काम भी इन्हीं के प्रयासों से संभव हो सका है। पूरा जीवन वन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय को समर्पित कर देने वाले ओम प्रकाश अग्रवाल जीवन के इस दौर में भी समाज के सामने एक ऐसा सफल माडल लेकर आए हैं जिसमें कम जमीन पर खेती, मछली पालन, गो-पालन कर आय में बढ़ोतरी की जा सकती है।

अब तक मिले पुरस्कार-

0 भारत सरकार की ओर से इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र पुरस्कार

0 अर्थ मैटर्स की ओर से पृथ्वीमित्र पुरस्कार

0 छत्तीसगढ़ की ओर से पर्यावरण मित्र पुरस्कार

0 इफको का प्रतिष्ठित सहकारिता बंधु पुरस्कार

0 संस्था सीएमएस नईदिल्ली द्वारा ग्रीन एंबेसडर अवार्ड

0 अर्थ डे की ओर से ग्रीन लीडर अवार्ड

0 संत गहिरा गुरु विश्विद्यालय द्वारा डाक्टर आफ साइंस की मानद उपाधि

Posted By: Nai Dunia News Network

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