अनंगपाल दीक्षित अंबिकापुर।(नईदुनिया प्रतिनिधि)।

सड़क दुर्घटना में घायलों की सहायता करने कई ऐसे लोग हैं जो हमेशा आगे आते हैं।ऐसे लोगों की वजह से ही घायलों की जान बच जाती है। इन सबके बावजूद ऐसे मददगारों में पुलिस का एक डर भी बना रहता है। घायलों को आसपास के अस्पतालों में पहुंचाने के दौरान पुलिस उनसे इतनी पूछताछ करने लगती है कि मददगार सड़क पर घायलों को देखने के बाद भी हाथ आगे बढ़ाने में हिचकने लगते हैं। यही कारण है कि सड़क पर घायल लोगों के अस्पताल में तत्काल न पहुंचने के कारण मौत का आंकड़ा भी बढ़ रहा है। उच्चतम न्यायालय ने मौत के प्रतिशत को कम करने के लिए ऐसे मददगारों को आगे आने के लिए गुड सेमेरिटन (अच्छा मददगार )का नियम बनाया है।इसमें कहा भी है कि सड़क दुर्घटना में मदद करने और सूचना देने वाले व्यक्ति को अपराधी न समझा जाए। पुलिस को यदि मदद करने वाला व्यक्ति अपना नाम, पता नहीं बताना चाहता है तो उस पर किसी तरह का दबाव न बनाएं बल्कि उसे प्रोत्साहित करें।

सरगुजा संभाग में जागरूकता की कमी के कारण ऐसे मददगारों की कमी देखी जा रही है। यदि पुलिस प्रशासन जागरूकता अभियान चलाकर ऐसे मददगार को प्रोत्साहित करे तो निश्चित रूप से सड़क दुर्घटना में घायलों की जान बच सकती है। सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने को ही चिकित्सक सुनहरा अवसर (गोल्डन अवर) मानते हैं। इस अवधि में यदि कोई भी घायल अस्पताल पहुंचा तो उसकी जान बचा लेते हैं। शहर के कुछ चिकित्सक लगातार लोगों को प्रोत्साहित भी कर रहे हैं कि गोल्डन अवर में घायलों को अस्पताल तक ले आया जाए तो उसकी जान आसानी से बचाई जा सकती है। शहर के कुछ बड़े अस्पतालों में ऐसे मामले भी आए हैं जिसमें अच्छे मददगारों की वजह से लोगों की जान बची है। जरूरत है लोगों को जागरूक कर ऐसे मददगारों को प्रोत्साहित करने की।

बता दें कि उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने सड़क दुर्घटना में मदद करने वालों के लिए प्रोत्साहन राशि का प्राविधान किया है। राज्य सरकार की ओर से भी अच्छे मददगारों को पांच हजार तक की राशि देने की घोषणा की गई है किंतु सरगुजा संभाग में अब तक किसी को ऐसी प्रोत्साहन राशि दी गई हो यह बात सामने नहीं आई है और न ही सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन के अनुसार अच्छे मददगारों को पुलिस की ओर से आजतक कोई प्रोत्साहन नहीं दिया गया है। हालांकि शहर में रात्रि गश्त करने वाले पुलिस के छोटे कर्मचारियों के द्वारा जरूर ऐसे मददगारों की पीठ थपथपाई जाती है और उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है किंतु कभी भी उच्च अधिकारी ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करने सामने नहीं आते। अच्छे मददगारों को पुलिस और समाज के द्वारा प्रोत्साहन मिले और इन मददगारों की संख्या बढ़े तो सड़क दुर्घटना के बाद घायलों की जान आसानी से बचाई जा सकती है।

अच्छे मददगारों को पुलिस बनाए मित्र-

अच्छे मददगारों को पुलिस जब तक मित्र नहीं बनाएगी तब तक सड़क दुर्घटना में घायलों की जान नहीं बचेगी। लोग एक दूसरे की मदद करने सामने नहीं आएंगे।पुलिस को ऐसे लोगों को प्रोत्साहित कर समाज के सामने पहचान दिलाने की जरूरत है। शहर में कई ऐसे मामले पिछले कुछ वर्षों में सामने आए हैं जिसमें शहर के नागरिकों की मदद से घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया है क्योंकि अधिकांश बार यह देखा गया है कि एंबुलेंस और पुलिस के वाहन घटनास्थल पर देरी से पहुंचते हैं और तब तक घायलों की जान भी चली जाती है।

गोल्डन अवर में अस्पताल लाना यानी जान बचाना-डा जेके सिंह

अंबिकापुर के निजी सुपर स्पेशलिटी जीवन ज्योति अस्पताल के डायरेक्टर डाक्टर जेके सिंह लंबे समय से लोगों को जागरूक कर रहे हैं कि गोल्डन अवर को समझें और घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने में मदद करें। उन्होंने कहा कि ऐसे मददगारों को समाज और पुलिस के द्वारा प्रोत्साहन देना ही चाहिए। यदि अस्पताल में कोई घायल तत्काल पहुंचा तो वही उसके लिए सुनहरा अवसर है जब डाक्टर तत्काल इलाज कर उसकी जान बचा सकता है। कई ऐसे मामले अस्पतालों में सामने आते हैं जब पुलिस के एंबुलेंस और वाहन नहीं बल्कि आम नागरिक घायलों को अस्पताल पहुंचाते हैं और उनकी जान बच जाती है।

ये हमारा दायित्व है भले न मिले प्रोत्साहन-शिवेश सिंह बाबु

वर्षों से सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की मदद के लिए आगे आने और अस्पताल पहुंचाकर लोगों की जान बचाने में अपनी पहचान बना चुके शहर के शिवेश सिंह बाबू ने कहा कि हमें प्रोत्साहन मिले न मिले, हम मानवीय आधार पर लोगों की जान बचाते हैं। सड़क दुर्घटना में घायलों को बगैर किसी कानूनी पेचीदगी के,बगैर किसी डर भय के उठाकर अस्पताल पहुंचाना हमारा पहला कर्तव्य है। हर नागरिकों को अपने कर्तव्य को समझना पड़ेगा तभी सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की जान बचाई जा सकती है। मैं शहर के नागरिकों से अपील भी करता हूं कि सड़क दुर्घटना में घायल लोगों की तत्काल मदद के लिए हाथ बढ़ाएं, किसी भय में न रहें।

Posted By: Nai Dunia News Network

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