अंबिकापुर।(नईदुनिया प्रतिनिधि)।

सरगुजा में विलुप्त हो रहे आक्रामक ट्रिंकेट सांप का सर्पमित्र सत्यम द्विवेदी ने नगर के बिलासपुर चौक के समीप से रेस्क्यू किया और सुरक्षित तरीके से उसे नगर के बांसवाणी में छोड़ दिया है। लोगों की सूचना पर पहुंचे सत्यम ने बड़ी मुश्किल से इस आक्रामक सांप का रेस्क्यु किया।

सत्यम द्विवेदी ने बताया कि यह जहरीला सांप नहीं है। लेकिन अपनी सुरक्षा और दुश्मनों से मुकाबला करने के लिए ये इतना डरावना रूप बना लेता है कि अक्सर सामने वाला उसका रौद्र रूप देखकर ही डरकर भाग जाता है। इस प्रजाति के सांप की लंबाई लगभग साढ़े चार फीट तक होती है। सबसे बड़ी बात है कि इसके मुंह के भीतरी भाग में काला धब्बा बना होता है। ये फुंफकारते हुए जहरीले सांप करैत की तरह खूंखार नजर आता है। रंग स्लेटी,काला व पीला होता है।सत्यम ने बताया कि रेस्क्यु के दौरान लोगों ने इस दुर्लभ नजारे को कैमरे में कैद किया है।इसकी तुलना भारतीय ब्लैक मांबा से की जाती है।ग्रामीण क्षेत्रों में मानना है उड़कर हमला करता है और इसे उड़ने वाला सांप भी कहा जाता है। सत्यम ने बताया कि इस मानसूनी सीजन में लगातार सांप निकलने की सूचना आ रही है। अब लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है कि वह घर व बाड़ी में निकलने वाले सांप को न मारे बल्कि तत्काल इसकी सूचना दें ताकि उनके घर व बाड़ी से सांप को रेस्क्यू कर सुरक्षित जगह पर छोड़ दिया जाए। ग्रामीण क्षेत्र में अभी भी लोग धारदार हथियारों से सांप पर वार करते हैं, यह बिल्कुल गलत है। सांप को छेड़ने से ही वह आक्रामक होता है। किसी भी सांप पर प्रहार न करें बल्कि तत्काल इसकी सूचना दें। कई ऐसे विलुप्त सांप भी होते हैं जिन्हें संरक्षित करना हम सबकी जिम्मेदारी है।

हर रोज एक दर्जन सांपों का करते हैं रेस्क्यु-

सर्पमित्र सत्यम ने बताया कि हर रोज अंबिकापुर शहर से ही एक दर्जन सांपों का रेस्क्यू कर रहा हूं। कई जगह लोग साधारण सांप निकलने पर भी घबरा जाते हैं सांप से छेड़छाड़ करने लगते हैं, यही कारण है कि वह आक्रामक होकर कई बार लोगों पर हमला भी कर देता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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