अंबिकापुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरबा जिले के पाली वन परिक्षेत्र की स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 80 से अधिक महिलाओं ने शनिवार को अंबिकापुर में स्थित वृक्षमित्र ओपी अग्रवाल के जैव विविधता केंद्र का अवलोकन किया। वन विभाग के माध्यम से आयोजित शैक्षणिक भ्रमण में महिलाओं ने कम जमीन पर ज्यादा आय अर्जित करने की तकनीक को नजदीक से देखा और समझा। महिलाओं का उत्साहवर्धन करने के लिए छत्तीसगढ़ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सेवानिवृत्त प्रमुख अभियंता आरएन गुप्ता भी जैव विविधता केंद्र पहुंचे। उन्होंने समूह की महिलाओं को जल, जंगल, जमीन से जुड़कर आय उपार्जक गतिविधियों का विस्तार करने कई माडल पर चर्चा की। महिलाओं ने यहां मिश्रित खेती का भी अवलोकन किया।

पाली वन परिक्षेत्र के कोडार,बतरा और कर्रा-नवापारा गांव की समूह से जुड़ी महिलाएं वन अधिकारी-कर्मचारियों के साथ जैव विविधता केंद्र पहुंची थी।खेती को लाभकारी बनाने के साथ यहां आय उपार्जन की सहायक गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। महिलाएं वर्तमान में वन विभाग से जुड़कर कार्य कर रही है। जल,जंगल,जमीन से कैसे आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है इसके संबंध में जानकारी प्राप्त की। वृक्षमित्र ओपी अग्रवाल ने जैव विविधता केंद्र में विकसित जंगल,फलों के उत्पादन, मिश्रित खेती,वर्मी कंपोष्ट,मछली पालन,गो पालन के संबंध में जानकारी दी। दरअसल ओपी अग्रवाल ने खेती का एक नया माडल भी विकसित किया है जिसमें कम जमीन पर खेती, मछली पालन, गो-पालन कर आय में बढोत्तरी की जा सकती है। यहां एक तालाब भी है।जहां मछली पालन, बत्तख पालन भी किया जा सकता है। समूह से जुड़ी कांति सिंह ने बताया कि यहां आकर उन्होंने काफी कुछ सीखा है।जमीन कम होने के बावजूद पौधरोपण के बाद कैसे तीन वर्ष में वह हमारे लिए लाभकारी होता है, यह भी देखा। बता दें कि वृक्षमित्र ओपी अग्रवाल आदिवासी बहुल उत्तर छत्तीसगढ़ में सामाजिक व कृषि वानिकी के जनक माने जाते है। पिछले चार दशक से पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य कर रहे अग्रवाल ने जैव विविधता के लिए भी कार्य किया है। इन्होंने ऐसी सीख दी कि आज उत्तर छत्तीसगढ़ के हर गांव में सामाजिक वानिकी का उदाहरण देखा जा सकता है। गरीबी और कुपोषण के खिलाफ भी इन्होंने जंग छेड़ रखी है। किंवाच की खेती को बढ़ावा देने में लगे है। कई क्विंटल बीज का वितरण किया है। सर्वाधिक प्रोटीन वाले किंवाच का उपयोग जनजातीय समाज सब्जी तथा इसके बीज को दाल के रूप में करता है। व्यावसायिक स्तर पर कंपनियां इसे ऊंचे दर पर खरीदती है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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