बतौली(नईदुनिया न्यूज)। आजादी के सात दशक बाद भी सरगुजा के ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आ रही तस्वीर बयां कर रही है कि जन सुविधा विस्तार के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है। शनिवार को मैनपाट के कदनई से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जो दूरस्थ इलाकों में व्याप्त बुनियादी कमियों को लेकर शासन-प्रशासन तक को झकझोर देने वाली है। मैनपाट विकासखंड के जंगल, पहाड़ से घिरे कदनई गांव की गर्भवती महिला को संस्थागत प्रसव के लिए परिजनों ने झेलगी में बैठाकर उफनती घुनघुट्टा नदी को पार कराया। प्रशासन के निर्देश के बावजूद पहले से गर्भवती महिला को नजदीक के प्राथमिक अथवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दाखिल नहीं कराने से यह परिस्थिति बनी। महिला को बतौली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में दाखिल कराया गया है।

मैनपाट विकासखंड के कदनई निवासी ससिता पति गिरधारी मझवार का यह पहला प्रसव था। शुक्रवार रात आठ बजे ही उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई थी। सुबह लगभग 11 बजे पति गिरधारी ने पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता रविंद्र पैकरा को खबर की थी। पुरुष स्वास्थ्य कर्ता ने 102 वाहन को फोन कर मामले की जानकारी दी थी। इसके बाद ससिता के परिजनों ने उसे घुनघुट्टा नदी तक झेलगी से पहुंचाया था। उफनती नदी को भी झेलगी से ही पार करना पड़ा था। नदी पार करने के बाद भी करदना पहुंचने पर सभी ससिता को आधे किलोमीटर झेलगी से ढोकर वाहन तक ले गए थे। हालांकि इस समय तक भी वाहन वहां पहुंच नहीं पाई थी। सभी को 15 से 20 मिनट वाहन के लिए इंतजार करना पड़ा था। वाहन के आने के बाद 20 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद ससिता को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया और जहां उसके प्रसव कराने की प्रक्रिया शुरू हो सकी।

बतौली से नजदीक लेकिन जोड़ा गया है मैनपाट से

कदनई गांव ब्लाक मुख्यालय बतौली से लगभग 25 किमी है, लेकिन जंगल-पहाड़ से घिरे कदनई पंचायत को मैनपाट विकासखंड में शामिल किया गया है। बतौली से 20 किमी दूर करदना तक पक्की सड़क है। करदना व कदनई के बीच घुनघुट्टा नदी बहती है। बारिश के दिनों में यही नदी बड़ी आबादी को बस्ती से निकलने में सबसे बड़ी बाधा है। कदनई बतौली के नजदीक होने के बावजूद इसे मैनपाट ब्लाक से जोड़ा गया है। ब्लाक मुख्यालय नर्मदापुर जाने के लिए भी कदनई पंचायत के लोगों को पहले बतौली फिर काराबेल होकर मैनपाट ब्लाक मुख्यालय नर्मदापुर जाना पड़ता है।

मंत्री व कलेक्टर के निर्देश बेअसर

ऐसी ही तस्वीर जून महीने में सामने आई थी। उस दौरान क्षेत्र के विधायक व प्रदेश के खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने कलेक्टर संजीव झा की मौजूदगी में विशेष बैठक ली थी। इस बैठक में मंत्री ने झेलगी में गर्भवती महिलाओं अथवा बीमार लोगों की तस्वीर सामने आने पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। कलेक्टर ने व्यवस्था बनाई थी कि ऐसे पहुंचविहीन इलाकों की गर्भवती महिलाओं की सतत निगरानी की जाए। आवश्यकता पड़ने पर 10-15 दिन पहले उन्हें नजदीक के अस्पताल में संस्थागत प्रसव के लिए ले आया जाए। कलेक्टर ने किराए की वाहन उपलब्धता के भी निर्देश दिए थे, लेकिन कदनई की ससीता मझवार के लिए यह कोई भी व्यवस्था नहीं हो सकी।

मितानिन हो गई थी बीमार

शनिवार को ससीता के साथ शकुंती पैकरा 102 वाहन से बतौली स्वास्थ्य केंद्र पहुंची थी। उसने बताया कि ससिता कदनई के जिस मोहल्ले में रहती है, उन सभी लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं स्कूल पारा के आंगनबाड़ी में आकर दी जाती है। यह इलाका आमगांव उप स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आता है जो लगभग पांच किलोमीटर दूर है और वहां जाना भी लोगों के लिए काफी मुश्किलों भरा है। उसने यह भी बताया कि ससीता जिस जगह निवास करती है, वहां संज्ञानी पैकरा मितानिन नियुक्त की गई है, लेकिन पिछले पांच दिनों से उसकी तबीयत काफी खराब थी। वह अंबिकापुर से इलाज करा कर वापस लौटी थी। उसकी अनुपस्थिति में वह स्वयं ससीता के साथ मदद के लिए आप आई है।

डेढ़ महीने से कोई स्वास्थ्य कार्यकर्ता ससीता से नहीं मिला

दूरस्थ अंचलों में प्रसव की सुविधाएं बहाल करने के लिए उच्च अधिकारियों के कड़े निर्देश के बाद भी मैनपाट के कदनई में इस संबंध में काफी लापरवाही बरतने की शिकायतें प्राप्त हुई है। ससीता के पति गिरधारी ने बताया कि पिछले डेढ़ महीने से कोई भी स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता उन लोगों के घर तक नहीं पहुंचा। उसने यह अवश्य बताया की दो टीके उसकी पत्नी ससीता को स्कूल पारा के आंगनबाड़ी केंद्र में लगाए गए थे, लेकिन उसके बाद किसी स्थानीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता ने उसका हालचाल नहीं लिया और न ही प्रसव की सुविधाएं देने के संबंध में किसी प्रकार की कोई बात की। इस संबंध में यह भी बताया गया की पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता रविंद्र पैंकरा और एएनएम उमेत्री सिंह ने भी उनसे कभी घर आकर मुलाकात नहीं की। इस वजह से अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने पर 102 वाहन को बुलाना पड़ा और आनन-फानन में झेलगी से पहुंचाने की मशक्कत की गई थी। गिरधारी की मां बिलासो बाई ने भी इस संबंध में जानकारी दी कि दो टीका स्कूल पारा आंगनबाड़ी जाकर ससीता ने स्वयं को लगवाए थे, जिसके बाद इसी महीने में प्रसव का दिन बताया गया था। अचानक रात को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिवार जन परेशान हो चले थे।

कदनई मैनपाट स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत आने वाला इलाका है, लेकिन आपातकालीन परिस्थितियों में कदनई के लोग बतौली ही आते हैं। किन परिस्थितियों में स्थानीय कार्यकर्ता ससिता तक नहीं पहुंच पाए। यह जांच का विषय है। यदि ऐसी लापरवाही की गई है तो यह काफी गंभीर मामला है, जिसके संबंध में मैनपाट के स्वास्थ्य अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए।

डॉ. संतोष सिंह पैकरा

बीएमओ, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बतौली

भाजपा के 15 वर्षों के शासनकाल में कदनई जैसे दूसरे पहुंचविहीन गांवों तक बरसात के दिनों में भी सुलभ आवागमन की सुविधा के लिए पुल-पुलियों की मांग लगातार की गई। विपक्ष की सरकार होने के कारण जनसुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया गया। अब सुविधा विस्तार तेजी से हो रहा है। कदनई में पुल बनेगा और आवागमन की यह समस्या भी दूर होगी।

अमरजीत भगत

खाद्य मंत्री, छत्तीसगढ़

सुलगते सवाल

0 दूरस्थ पहुंचविहीन इलाकों में गर्भवती महिलाओं का क्यों नहीं हो रहा सर्वे?

0 कलेक्टर के निर्देश के बाद भी सामान्य परिस्थिति में गर्भवती को नजदीक के अस्पताल क्यों नहीं लाया गया?

0 हर वर्ष आ रही ऐसी तस्वीर लेकिन प्रशासनिक स्तर पर नहीं बन रही ठोस रणनीति।

0 पहुंचविहीन गांव की संख्या गिनती के हैं, पुल नहीं तो प्रसव और दूसरी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं?

0 मंत्री और कलेक्टर के निर्देश के परिपालन में स्वास्थ्य विभाग की क्या थी जिम्मेदारी।

Posted By: Nai Dunia News Network

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

Ram Mandir Bhumi Pujan
Ram Mandir Bhumi Pujan