अंबिकापुर।(नईदुनिया प्रतिनिधि) फर्जी तरीके से जमीन रजिस्ट्री और हत्या के एक मामले को लेकर अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह बुधवार को अंबिकापुर में सुनवाई करने पहुंचे। आवेदिका के घर जाकर जानकारी ली। इसके बाद अधिकारियों को तलब कर गलत जानकारी देने पर जमकर फटकार लगाई। मौके पर कलम बंद बयान भी दर्ज किया है।

आप जीते जनजाति आयोग के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने यहां पहुंच कर नगर से लगे नेहरू नगर ,डिगमा निवासी सुनीता चेरवा पति स्व रामविलास चेरवा के निवास में जाकर सुनीता के द्वारा आयोग में 21 मार्च 2022 को प्रस्तुत आवेदन के संबंध में जानकारी ली व बयान दर्ज किया। पूरे घटनाक्रम की जानकारी के साथ सुनीता का बयान भी अध्यक्ष ने लिया। यहां से वापस उच्च विश्रामगृह पहुंचे जहां से उन्होंने गांधीनगर थाने के विवेचक और नायब तहसीलदार को तलब कर घटना के संबंध में पूरी जानकारी ली और बयान भी दर्ज किया। पूछताछ के दौरान बताया गया कि सुनीता चेरवा के पति की फांसी पर लटकी लाश मिली थी। पुलिस की जांच में जिसके सहारे फांसी लगाई गई थी उसकी ऊंचाई जमीन से 160 सेंटीमीटर थी और मृतक की लंबाई भी इतनी ही थी। उसके पैर व हाथ जमीन पर थे। ऐसे में फांसी खुद से लगाकर आत्महत्या किए जाने को लेकर संदेह भी हो रहा है ल। इस मामले में अपराधिक प्रकरण भी दर्ज है जिसमें गांधीनगर थाने में पदस्थ तत्कालीन महिला निरीक्षक भी शामिल है किंतु अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। आयोग के अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने धरमी,भक्तु राम, सचिन तिग्गा,रामकृपाल साहू, सुभोजित मंडल व पुलिस अधिकारी शांति हेलेना तिग्गा व तत्कालीन हल्का पटवारी के खिलाफ धारा 419, 420, 467,468, 471 का मामला दर्ज चुका है। इस मामले में अब तक गिरफ्तारी न होने को लेकर भी आयोग के अध्यक्ष ने नाराजगी जताई है। उन्होंने अधिकारियों के गोलमोल जवाब पर जमकर फटकार भी लगाई। उन्होंने कहा वर्तमान में आप जो बातें बता रहे हैं वही आयोग के मिनिट्स में दर्ज हो रहे हैं। बाद में आप सभी से मुकर भी नहीं सकते हैं। आयोग अध्यक्ष की बातों से अधिकारी सकते में भी नजर आए। इस दौरान आयोग के सदस्य अमृत टोप्पो भी मौजूद थे।

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