अंबिकापुर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। मेडिकल कालेज के कोविड अस्पताल में आए दिन कोरोना संक्रमितों के भर्ती होने से जहां एक ओर बेड भरने की नौबत बन रही है, वहीं विशेष परिस्थितियों के लिए आक्सीजन सिलिंडर की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने से प्रबंधन पशोपेश में है। कोविड अस्पताल का दायरा बढ़ने के साथ ही मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसके बीच आइसीयू, वेंटिलेटर में मरीजों को रखने से बढ़ती आक्सीजन की खपत को भी प्रबंधन स्वीकार कर रहा है। इधर खपत के अनुरूप आक्सीजन सिलिंडर के नहीं मिलने से संकट की स्थिति बनी रहती है, हालांकि अभी तक अस्पताल प्रबंधन के द्वारा ऐसी नौबत न आए इसके भरसक प्रयास किए हैं, लेकिन अस्पताल प्रबंधन सिलिंडर बिना अफसरों की अनुमति के नहीं ले सकता है, जिससे हाथ-पांव मारने की स्थिति बन रही है। इसके बाद इमरजेंसी की स्थिति में सिलिंडर कैसे मिलेगा इसकी चिंता बढ़ गई है। अब तो यह भी चर्चा होने लगी है कि अधिकारियों का ध्यान निजी अस्पतालों को सुविधायुक्त बनाकर रखने की है, ताकि किसी खास को भर्ती करना पड़े तो वे उन्हें सर्वसुविधायुक्त निजी अस्पताल में भर्ती करा शाबासी ले सकें।

मंगलवार की रात 11 बजे मेडिकल कालेज के कोविड अस्पताल में स्थिति ऐसी थी की मात्र 10 जंबो सिलिंडर शेष थे। सिलिंडर कम देख रात में अकस्मात भागम-भाग की स्थिति बनती। प्रबंधन को जानकारी मिली कि पालीटेक्निक में बनाए गए आइसोलेशन वार्ड के लिए रिजर्व में 60 से अधिक सिलिंडर रखे गए हैं। अस्पताल में सिलिंडर की व्यवस्था देख रहे कर्मचारी ने पालीटेक्निक में कोविड विशेष पर ड्यूटी कर रहे कर्मचारी से संपर्क किया तो उसने सिलिंडर होने की जानकारी देते हुए गाड़ी भेजने कहा। आपात स्थिति के लिए व्यवस्था बनी रहे इसलिए कर्मचारी ने सिलिंडर लाने के लिए एंबुलेंस भेजा। एंबुलेंस चालक ने यहां आकर सिलिंडर की मांग की तो पालीटेक्निक के कर्मचारी ने किसी अधिकारी से संपर्क किया और प्लांट से सिलिंडर पहुंचेगा कहते हुए खाली हाथ लौटा दिया। इधर कोविड अस्पताल में बढ़ती आक्सीजन की मांग ने प्रबंधन की चिंता बढ़ा दी थी।

रिजर्व रहता है 16 सिलिंडर-

आक्सीजन जनरेट प्लांट से आक्सीजन कोविड आइसीयू, अस्पताल में जाने के बाद भी आपात परिस्थितियों के लिए 16 जंबो सिलेंडर को कनेक्ट करके रखा जाता है, जिससे अचानक बिजली गोल होने की स्थिति में आक्सीजन की सप्लाई अवरुद्ध न हो। वहीं अस्पताल के अधिकांश हिस्से में जंबो आक्सीजन सिलिंडर ही बेड टू बेड आक्सीजन सप्लाई का माध्यम है। अस्पताल के आपरेशन थिएटर, एसएनसीयू, बच्चा वार्ड, गायनिक वार्ड में भी आक्सीजन की जरूरत पड़ती है। कोविड मरीजों को किसी प्रकार की दिक्कत ना हो, यहां अधिक से अधिक संख्या में मरीज भर्ती हो सकें, इसलिए पुराने अस्पताल भवन के आइसीयू से लेकर वाडोर् तक कोविड मरीज भर्ती हो रहे हैं।

मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं-

अस्पताल अधीक्षक डा.लखन सिंह बताते हैं कि कोविड संक्रमण के बढ़ते मरीजों के बाद व्यवस्था में तब्दीली लाने के प्रयास काफी हुए हैं, लेकिन वर्तमान में सर्वाधिक जरूरत आक्सीजन की है। आक्सीजन का लेबल कम होने के कारण अधिकांश मरीजों को भर्ती होना पड़ रहा है। एक सौ में पांच-सात ही मुश्किल से मिलते हैं, जिन्हें आक्सीजन की जरूरत नहीं होती है। उन्होंने कहा कि बिगड़ते हालात के बीच बढ़ती मरीजों की संख्या को देखते हुए आक्सीजन की पर्याप्त मात्रा में सप्लाई की जानी जरूरी है। सौ खाली सिलिंडर के एवज में 50-60 सिलिंडर देने से काम चलना असंभव है।

बयान-

''आक्सीजन सिलिंडर की आपूर्ति कम है, लेकिन अभी तक बाधा की स्थिति नहीं बनी है। फिर भी बढ़ते मरीजों को देखते हुए अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन सिलिंडर होना चाहिए। जिला प्रशासन के अधिकारियों के निर्देश पर आक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। मंगलवार की रात विस्तार किए गए कोविड अस्पताल हेतु 10 सिलिंडर शेष थे, जिससे चिंता की स्थिति बन गई थी।''

डा.लखन सिंह

चिकित्सा अधीक्षक

मेडिकल कालेज अस्पताल

Posted By: Nai Dunia News Network

NaiDunia Local
NaiDunia Local