अंबिकापुर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। शासकीय नर्सिंग कॉलेज के छात्रावास में पानी की समस्या को लेकर नाराज छात्राओं ने सोमवार को कलेक्टोरेट के मुख्य प्रवेश द्वार पर धरना दिया। जिस वक्त पानी की समस्या को लेकर छात्राएं धरने पर बैठी थीं, ठीक उसी समय राज्य निर्वाचन आयुक्त ठाकुर राम सिंह कलेक्टोरेट सभाकक्ष में संभाग के सभी कलेक्टर व एसपी की बैठक ले रहे थे। पानी की समस्या दूर करने की मांग को लेकर नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं के धरने की खबर लगते ही एसडीएम अजय त्रिपाठी मौके पर पहुंचे। उन्होंने छात्राओं से चर्चा की और छात्रावास में पेयजल सहित दूसरी कमियों को अतिशीघ्र दूर करने का आश्वासन देकर विदा किया। इस दौरान प्रबंधन के रवैय्ये को लेकर छात्राओं में नाराजगी देखी गई।

सोमवार की दोपहर लगभग साढ़े 12 बजे कॉलेज की दो बस में सवार होकर नर्सिंग की छात्राएं सीधे कलेक्टोरेट पहुंच गईं। बस को कलाकेंद्र मैदान में खड़ी कर वे पैदल ही परिसर में पहुंची और खाद्य विभाग के कार्यालय के सामने मुख्य प्रवेश द्वार के समीप धरने पर बैठ गई। छात्रावास में पानी सहित दूसरी सुविधाओं की कमी का हवाला देकर छात्राओं ने प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। उसी दौरान नर्सिंग कॉलेज दो महिला अधिकारी भी मौके पर पहुंच गई और छात्राओं को वहां से ले जाने का प्रयास शुरू कर दिया। प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के रवैय्ये को लेकर छात्राओं ने गहरी नाराजगी जताई। इसी बीच एसडीएम अजय त्रिपाठी भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने नर्सिंग की छात्राओं से चर्चा शुरू की। छात्राओं ने अपनी समस्याओं से अवगत कराते हुए आरोप लगाया कि प्रबंधन को सारी वस्तुस्थिति से अवगत कराए जाने के बावजूद एक भी समस्या का निराकरण नहीं हो रहा है। सर्वाधिक परेशानी पानी को लेकर है। छात्राओं ने मांगों, समस्याओं से संबंधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। एसडीएम ने छात्राओं को समझाया कि वे पहले ही पानी की समस्या से अवगत करा सकती थी। एकजुट होकर सभी छात्राओं को यहां आने की कोई जरूरत ही नहीं थी। इस समस्या का निराकरण पहले ही हो जाता। उन्होंने छात्राओं को आश्वस्त किया कि छात्रावास में व्याप्त समस्या अतिशीघ्र दूर कर ली जाएगी। एसडीएम के आश्वासन के बाद भी प्रबंधन से जुड़ी दो अधिकारियों द्वारा छात्राओं पर यह दबाव बनाने की कोशिश की गई कि वे अपनी बात और किसी के समक्ष न रखें। इसे लेकर छात्र संगठन अभाविप के पदाधिकारी व संबंधित अधिकारियों के बीच बहस भी हुई। यह पूरा घटनाक्रम पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ। सीएसपी एसएस पैकरा, एसडीओपी चंचल तिवारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

अवकाश में भी दूर नहीं हुई समस्या

छात्राओं के मुताबिक नए भवन में 12 दिसंबर को छात्रावास स्थानांतरित हुआ। छात्रावास परिसर में बोरवेल की सुविधा है किंतु उसमें पर्याप्त पानी नहीं निकलता। नए भवन में शिफ्ट होने के पहले दिन से लेकर 20 दिसंबर तक बाल्टी से पानी लेकर छात्रावास भवन के उपरी माले में वे चढ़ते-उतरते रहे। 20 दिसंबर की शाम को छुट्टी घोषित हो गई। उस दौरान बोला गया कि 5 जनवरी 2020 तक समस्या का समाधान हो जाएगा। जब छुट्टियां खत्म हो जाएंगी और वे वापस आएंगे तबतक पानी की कोई भी समस्या नहीं रहेगी।

अब बोरवेल भी हो गया खराब

छात्राओं की दलील है कि अवकाश के बाद जब 5 जनवरी को वे वापस लौटे तो पानी की समस्या बरकरार थी। 14 जनवरी तक उसी व्यवस्था में काम चलता रहा। बाद में बोर भी खराब हो गया। उसके बाद एक टैंकर पानी मंगाया गया था और आश्वासन दिया गया था कि हर रोज तीन टैंकर पानी मंगवाया जाएगा। निगम के माध्यम से पानी की समस्या दूर कर लिए जाने का भी आश्वासन दिया गया, लेकिन समस्या जस की तस है। दूषित पानी के सेवन से छात्राएं टाइफाइड, उल्टी-दस्त से पीड़ित हो रही हैं। अध्यापन कार्य भी पानी की समस्या से प्रभावित हो रहा है।

छात्राओं की आवाज दबाने में लगा रहा प्रबंधन

नर्सिंग कॉलेज से बसों में सवार होकर कलेक्टोरेट पहुंचीं छात्राओं ने जब अधिकारियों और मीडियाकर्मियों को अव्यवस्था की जानकारी देनी शुरू की तो नर्सिंग कॉलेज से पहुंचीं प्रबंधन की कुछ महिला अधिकारी छात्राओं को रोकने लगी। कड़े लहजे में सभी को वापस नर्सिंग कॉलेज जाने नसीहत देने लगीं। और तो और एसडीएम को दिए गए ज्ञापन की प्रति भी छात्राओं से छीनकर वापस भेजने दबाव बनाने लगीं। नर्सिंग की अव्यवस्था को क्यों दबाना चाह रहीं हैं समझ से परे है। कुछ लोग यह भी कहने से नहीं रहे कि छात्राओं को यहां भेजने में किसी बाहरी तत्व सक्रिय हैं।

Posted By: Nai Dunia News Network

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