अंबिकापुर ।Ambikapur News: सरगुजा जिले के मैनपाट में इन दिनों एक घोड़े और हाथियों की दोस्ती वन विभाग के लिए भी हैरान कर देने वाली है। पहली बार घोड़ा छह दिनों तक हाथियों के साथ रहा।दिन में जंगल मे रहने वाले हाथियों के साथ घोड़ा भी डटा रहा। रात को घोड़ा भी हाथियों के साथ ही घूमता था। सुरक्षित वापसी के बाद घोड़ा के मालिक त्रिलोकी यादव ने घोड़े को बांधकर रखा था। अगले दिन उसे चरने के लिए छोड़ा तो घोड़ा फिर तेजी से जंगल की ओर चला गया।

24 घंटे से अधिक समय तक घोड़ा फिर हाथियों के साथ रहा और अब वापस लौट आया है। इस बार त्रिलोकी यादव घोड़े की निगरानी में लगे हुए हैं। अपने सामने उसे चरने के लिए छोड़ रहे हैं। उन्हें डर सता रहा है कि घोड़ा तीसरी बार हाथियों के पास न चला जाए। दो बार हाथियों ने घोड़े को नुकसान नहीं पहुंचाया लेकिन बार-बार हाथियों के दल में चले जाने से कहीं हाथी उस पर हमला कर जान न ले ले इसे घोड़ा मालिक चिंतित भी है।

चिंता की वजह यह है कि पिछले साल भी हाथियों का दल जब मैनपाट वन परिक्षेत्र में आया था उस दौरान भी कंडराजा गांव के त्रिलोकी यादव का पालतू घोड़ा हाथियों के बीच चला गया था। उस दौरान हाथियों के हमले से वह गंभीर रूप से चोटिल हुआ था लेकिन इस बार हाथियों के व्यवहार में भी बदलाव देखा जा रहा है। दो-दो बार घोड़ा के हाथियों के बीच चले जाने के बावजूद उसे किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है।

कंडराजा निवासी त्रिलोकी यादव बताते हैं कि उनका गांव हाथी प्रभावित रहा है। पूर्व में हाथी लगातार उनके गांव में आक्रमण करते थे। कुछ वर्ष पहले हाथियों ने बस्ती के सभी घरों को तबाह कर दिया था। प्रभावित परिवारों के लिए स्वीकृत मुआवजा राशि के अलावा शासन के मद से सभी प्रभावितों के लिए अलग कॉलोनी बना दी गई है, जहां प्रभावित परिवार निवास करते हैं लेकिन उनका एक मकान अभी भी जंगल किनारे स्थित है।

घोड़ा भी शांत इसलिए नहीं पहुंचाया नुकसान

त्रिलोकी यादव का घोड़ा शांत प्रवृति का है।वह मालिक के हर निर्देश का पालन करता है।लगभग दस साल के इस घोड़े का उपयोग त्रिलोकी यादव,घूमने और कृषि कार्य मे करते है।हाथियों के बीच चले जाने के बाद उसे भ्रमण करते टाइगर पॉइंट के पास देखा गया था।कभी वह हाथियों के आगे चलता था तो कभी बीच में रहता था।घोड़ा के सामान्य व्यवहार से हाथियों को भी किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं हुई यही कारण है कि हाथियों ने उसे नुकसान नहीं पहुंचाया होगा।

असामान्य व्यवहार न हो तो कोई दिक्कत नहीं: बिसेन

हाथी प्रबंधन में लगे छत्तीसगढ़ के सेवानिवृत्त मुख्य वन सरंक्षक केके बिसेन का कहना है कि हाथी एक शान्तिप्रिय वन्य प्राणी होता है । यह किसी भी जानवर को हानि नही पहुंचाता है।हाथी जब विचरण करते- करते किसी रिहायसी क्षेत्र में आता है तो उसके विचरण मार्ग में कहीं -कहीं मवेशी बंधी रहती है।जब हाथी पास होता है तो वे मवेशी बंधी होने के कारण इधर - उधर भागने का प्रयास करती है , आवाज करती है ।

उस मवेशी के इस असामान्य व्यवहार से हाथी की शान्ति भंग होती है तो वह हाथी हानि पहुंचाता है।यदि हाथी की मौजूदगी के दौरान शांति हो,कोई भी जानवर असामान्य व्यवहार न करें तो हाथी किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचाता लेकिन इंसानों को देखते ही वह हमला करता है क्योंकि मैंने अध्ययन में पाया है कि सालों से इंसान, हाथियों को खदेड़ने की कोशिश करते है।पूर्व में गुलेल चलाना, पत्थर फेंकना, मशाल जलाकर खदेड़ने की कोशिश हो चुकी है।इंसानों के इसी व्यवहार से हाथी उन पर हमला करते है।

लौट आया है घोड़ा: चौबे

मैनपाट रेंजर फेकू प्रसाद चौबे ने बताया कि लगभग छह दिनों तक घोड़ा हाथियों के दल में था। हाथियों ने उसे किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचाया।इस बात की जानकारी उन्हें भी है। घोड़ा दूसरी बार भी हाथियों के पास चला गया था इसकी जानकारी उन्हें घोड़ा मालिक की ओर से नहीं दी गई थी।

उन्होंने बताया कि मैनपाट और कापू वन परिक्षेत्र के सीमावर्ती जंगल में मौजूद हाथियों पर लगातार निगरानी की जा रही है वन विभाग की पहली कोशिश जनहानि रोकने की है। अब तक हाथियों ने जितना नुकसान पहुंचाया है।उसका आकलन कर लिया गया है। मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

Posted By: sandeep.yadav

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