अंबिकापुर । संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत के निर्देश का भी कोई असर नहीं हुआ। जिला पुरातत्व संग्रहालय की बदहाली अभी तक दूर नहीं हुई है। न तो करोड़ों के भवन और वहां रखे पुरातात्विक धरोहरों की साफ सफाई की गई है और ना ही परिसर को ही साफ सुथरा रखने कोई प्रयास शुरू हुआ। सरगुजा की ऐतिहासिक महत्त्व से जुड़े धरोहरों की जानकारी लेने पहुंचने वाले लोग यहां की बदहाली देख निराश भाव से लौट रहे हैं। विजिटर्स रजिस्टर में सुझाव व्यवस्था में सुधार को लेकर है। विजिटर्स रजिस्टर भी दिखावे का साबित हो रहा है, इसमें लिखे जा रहे सुझावों पर किसी प्रकार का कोई अमल नहीं किया जा रहा है।

ऐतिहासिक व पुरातात्विक महत्व के लिए देशभर में ख्याति प्राप्त सरगुजा जिले के पुरा अवशेषों को संरक्षित करने के उद्देश्य से अंबिकापुर से लगे सरगंवा गांव में पूर्ववर्ती भाजपा शासनकाल में लगभग सवा करोड़ रुपए की लागत से जिला पुरातत्व संग्रहालय के नाम से भवन का निर्माण कराया गया था।

उस दौरान दावा किया गया था कि सरगुजा जिले में यत्र-तत्र असुरक्षित तरीके से बिखरे पड़े ऐतिहासिक व पुरातात्विक महत्व से जुड़े धरोहरों को यहां लाकर संरक्षित किया जाएगा। दावे के विपरीत जिला पुरातत्व संग्रहालय में कई वर्ष पूर्व लाए गए गिनती के पुरा अवशेषों को छोड़कर कुछ भी नहीं है।

यहां सरगुजा क्षेत्र की ऐतिहासिक, धार्मिक, पुरातात्विक महत्त्व से जुड़े धरोहरों का मॉडल भी तैयार कर रखा गया है लेकिन इस मॉडल की चमक भी फीकी पड़ती जा रही है। सबसे दुर्भाग्य जनक बात यह है कि देखरेख के अभाव में भवन भी खस्ताहाल होता जा रहा है ।भवन के भीतर कई कमरों में सरगुजा की सांस्कृतिक विरासत के रूप में टाइल्स लगे कमरों में रजवार शैली के अलावा भित्ति चित्र और कोरवाओं के मकान प्रतीकात्मक रूप से बनाए गए हैं लेकिन इसका भी सही तरीके से देखरेख नहीं होने के कारण यह बदहाल होते जा रहे हैं।

बड़ी उम्मीद से जिला पुरातत्व संग्रहालय पहुंचने वाले लोगों को सिर्फ निराशा ही हाथ लगती है ।पिछले दिनों संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने सरगवा स्थित जिला पुरातत्व संग्रहालय का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान यहां व्याप्त अव्यवस्था को देखकर उन्होंने नाराजगी जताई थी।संग्रहालय सहित समूचे परिसर की साफ सफाई का कड़ा निर्देश जारी किया था।

मंत्री के निरीक्षण का एक माह से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन व्यवस्था में कोई सुधार परिलक्षित नहीं हो रहा है। मुख्य मार्ग से संग्रहालय प्रवेश करने वाले मार्ग के दोनों और परिसर में घास उग आए हैं। चारों ओर गंदगी पसरी नजर आती है। जगह-जगह झाड़ियां उग आई हैं उनकी भी साफ सफाई नहीं कराई जा रही है।

बताया जा रहा है कि पुरातत्व संग्रहालय के संरक्षण व संवर्धन के लिए शासन स्तर से अलग से राशि का प्रावधान नहीं किए जाने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। यहां देखरेख के नाम पर अधिकारियों कर्मचारियों की आवश्यकता के अनुरूप पदस्थापना भी नहीं की गई है, जिस कारण जिला पुरातत्व संग्रहालय सिर्फ नाम का रह गया है ,जिस उद्देश्य से जिला पुरातत्व संग्रहालय का निर्माण कराया गया था उसकी पूर्ति होती नजर नहीं आ रही है।

सड़क की धूल कमरों में

जिला पुरातत्व संग्रहालय में प्रवेश करते ही हाल नुमा कमरे में सरगुजा व कोरिया जिले के प्रसिद्ध स्थलों का मॉडल बनाकर रखा गया है। इसके पीछे उद्देश्य है कि यहां आने वाले लोग सरगुजा की ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक व पुरातात्विक महत्त्व से अवगत हो सके लेकिन यह मॉडल धूल से भर गया है। पूर्व में जब सड़क निर्माण का काम चल रहा था तब समूचा परिसर धूल से सराबोर रहता था ।उसी दौरान यहां की चमक फीकी पड़ी। सड़क निर्माण का काम पूरा हो चुका है अब धूल भी नहीं उड़ती। उसके बावजूद साफ सफाई नहीं कराए जाने से सिर्फ मॉडल ही नहीं बल्कि कमरों में भी धूल भरा हुआ है।

विजिटर्स रजिस्टर भी दिखावे का

जिला पुरातत्व संग्रहालय का भ्रमण करने आने वाले लोगों के लिए विजिटर रजिस्टर रखा गया है ताकि आमजन यहां की व्यवस्था और पुरातात्विक महत्व से जुड़े धरोहरों के संरक्षण के लिए अपना सुझाव दे सके।अधिकांश लोग सुझाव लिख रहे है लेकिन उस पर कोई अमल नहीं हो रहा पा रहा ।विजिटर्स रजिस्टर व्यवस्था में सुधार ,साफ-सफाई और यहां सीसीटीवी कैमरा लगाने से भरा पड़ा नजर आ रहा है, लेकिन ना तो साफ सफाई हो रही है और ना ही सरगुजा में बिखरे पड़े पुरातात्विक धरोहरों को सहेजने का कोई प्रयास हो रहा है।

सिर्फ एक संविदा कर्मचारी

जिला पुरातत्व संग्रहालय में उन पुरा अवशेषों को रखा गया है जो कई वर्ष पहले प्रशासन द्वारा ऐतिहासिक स्थलों से लाया गया था । इन्हें असुरक्षित तरीके से यहां लाकर रख दिया गया है। देखरेख के नाम पर संविदा आधार पर नियुक्त एक कर्मचारी को रखा गया है जिस पर बड़ी जिम्मेदारी है।

इसी कर्मचारी के भरोसे जिला पुरातत्व संग्रहालय को छोड़ दिया गया है ।यही वजह है कि बाहर से आने वाले लोग यहां सीसीटीवी लगाने का लगातार सुझाव दे रहे हैं लेकिन शासन प्रशासन स्तर से ना तो सुरक्षा को लेकर गंभीरता बरती जा रही है और नहीं आवश्यकता के अनुरूप कर्मचारियों की ही पद स्थापना की जा रही है।

पहचान गुम हो रही संग्रहालय की

बदहाली के कारण जिला पुरातत्व संग्रहालय अपनी पहचान खोता जा रहा है। संग्रहालय परिसर में लंबा चौड़ा स्थान है ,जहां शासन- प्रशासन स्तर पर आयोजित होने वाले शासकीय कार्यक्रमों को व्यवस्थित तरीके से आयोजित किया जा सकता है।

ऐसा होने से पुरातत्व संग्रहालय को अलग पहचान भी मिल सकती है लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा निजी होटलों में ही शासकीय कार्यक्रम आयोजित करने में ज्यादा रुचि ली जाती है ।संग्रहालय परिसर में यदि शासकीय तौर पर आयोजित होने वाले कला संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम हो तो इस स्थल से लोगों का जुड़ाव और बढ़ेगा।